नवरात्र / माता के इन 21 स्वरूपों की करें आराधना, सभी कष्ठ हो सकते हैं दूर - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Tuesday, 28 April 2020

नवरात्र / माता के इन 21 स्वरूपों की करें आराधना, सभी कष्ठ हो सकते हैं दूर



शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो चुकी है, जो 18 अक्टूबर को समाप्त होंगी। इस दौरान देवी मां के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। आज हम आपको माता के विशेष स्वरूप के बारे में बता रहे हैं, जिनकी आराधना करना आपके लिए शुभ फल देने वाला हो सकता है।

माता के 21 स्वरूप

  1. शैलपुत्री


    दक्ष प्रजापति की पुत्री सती ने अपने पति शिव का अपमान होने पर यज्ञाग्नि में ही आत्म-दाह कर लिया था। उन्होंने अगला जन्म, शैलराज हिमालय के घर में लिया इसलिए उनका नाम शैलपुत्री पड़ा।

    वाहन- वृषभ
    संयम और दृढ़ता का प्रतीक है, जिसके बल पर व्यक्ति पर्वत जैसी बाधाओं को भी पार कर सकता है।

  2. ब्रह्मचारिणी


    देवी ने भगवान शिव को पुन: पति रूप में प्राप्त करने के लिए हजारों वर्षतक बेल-पत्र और फिर निर्जल व निराहार रहकर घोर तपस्या की जिसके कारण उन्हें ‘ब्रह्मचारिणी’ नाम मिला।

    वाहन
    इनका कोई वाहन नहीं है। ये पैदल रहकर तप और साधना का संदेश देती हैं।

  3. चंद्रघंटा


    नवदुर्गा का इस तीसरे स्वरूप में देवी के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है इसलिए इनका नाम चंद्रघंटा है। इस घंटे की भयानक ध्वनि से दैत्य भी कांप उठते हैं।

    वाहन- सिंह
    यह अत्यंत निडरव बलशाली पशु है। यह साधक को निर्भीकता एवं शक्ति के विकासकरने का संदेश देता है। 

  4. कूष्मांडा


    देवी के इस स्वरूप को कुम्हड़ा (कद्दू) पसंद है इसलिए इनका नाम कूष्मांडा है। इनका सूर्यलोक में वास है और यह अष्टभुजाधारी हैं जिनमें यह क्रमश: कमण्डल,
    धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृत-कलश, चक्र, गदा औरजप-माला धारण करती हैं।

    वाहन- सिंह
    यह प्रतीक है कि मां कूष्मांडा की पूजा से कष्टों का नाश होता है तथा साधकों को आयु, बल और आरोग्य प्राप्त होता है।

  5. स्कंदमाता 


    भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। यह कमल-पुष्प पर विराजती हैं इसलिए पद्मासना भी कहलाती हैं।

    वाहन- सिंह
    यह अत्यंत एकाग्र पशु है इसलिए स्कंदमाता की आराधना से साधक को एकाग्रता मिलती है।
     

  6. कात्यायनी


    कथानुसार महर्षि कात्यायन ने तपस्या द्वारा मां भगवती को प्रसन्न किया जिसके फलस्वरूप, देवी ने महर्षि के घर कात्यायनी रूप में जन्म लिया।

    वाहन- सिंह
    कात्यायनी का सिंह शांत व ज्ञानशील माना जाता है इसलिए इनकी पूजा-अर्चना से शोक और संताप दूर होते हैं तथा अध्ययन में सफलता मिलती है।
     

  7. कालरात्रि


    कठिन परिस्थितियों और काल से रक्षा के कारण इनका नाम कालरात्रि है। इनकी उपासना से सिद्धियां प्राप्त होती हैं तथा आसुरी शक्तियों का नाश होता है। शुभफल प्रदाता होने के कारण इन्हें शुभंकरी भी कहते हैं।

    वाहन- गर्दभ
    यह मनुष्य को सहनशील रहने और सुख-दुख में सम रहने की प्रेरणा देता है।

  8. अरण्यानी


    वन और उसमें रहने वाले पशुओं की देवी हैं। यह घुंघरू पहनती हैं और यद्यपि यह लक्षित नहीं होते किंतु इनके घुंघरुओं का स्वर अवश्य सुनाई पड़ता है। अरण्यानीदेवी समस्त वन्य पशुओं का पालन-पोषण करती हैं।

    वाहन- अश्व
    वन में परिश्रमी और फुर्तीला होने के साथ अधिक सजग रहने का संदेश देता है।

  9. महागौरी


    शिव-प्राप्ति हेतु कठोर तप से शिव प्रसन्न हुए पर इनका शरीर काला पड़ गया। गंगा में स्नान करने से इनका तन फिर से गौर वर्ण हो गया और यह महागौरीकहलाईं। श्वेत आभूषण व वस्त्रों के कारण श्वेतांबरधरा भी कहलाती हैं।

    वाहन- वृषभ
    इसकी शांत, स्थिर किंतु दृढ़ मुद्रा दर्शाती है कि श्रेष्ठ संकल्पशक्ति, स्थिर चित्त और शांत स्वभाव द्वारा अमोघ फल भी प्राप्त किए जा सकते हैं।
     

  10. गंगा देवी


    हिंदू धर्म में गंगा नदी को मां माना जाता है। इसमें स्नान करने से पूर्वसंचित पाप धुल जाते हैं और जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। इसी उद्देश्य से लोग इसमें अपने परिजनों की अस्थियों का विसर्जन भी करते हैं।

    वाहन- मकर
    मनुष्य को धैर्यपूर्वक लक्ष्य की ओर बढ़ने तथा जीवन की समस्याओं को अपनी प्रचंड शक्ति से समाप्त करने की प्रेरणा देता है।

  11. सिद्धिदात्री


    भगवान शिव ने इनसे सिद्धियां प्राप्त की और इन्हीं की कृपा से शिव का आधा शरीर नारी का हुआ जिससे वह ‘अर्धनारीश्वर’ कहलाए।

    वाहन- सिंह 
    अनेक प्रकट एवं अप्रकट शक्तियों का स्वामी होता है। सिद्धिदात्री की उपासना से साधक को आठों सिद्धियां प्राप्त होती हैं और कठिनतम कार्य भी सम्पन्न हो जाते हैं। 

  12. चण्डी


    यह देवी काली का एक स्वरूप है। यह अपने दयालु रूप में उमा, गौरी, पार्वती और भवानी कहलाती हैं और इन्हें उग्र रूप में दुर्गा, काली और भैरवी केनाम से जाना जाता है।

    वाहन-सिंह
    साहसपूर्वक अपने परिवार व समुदाय की रक्षा करता है। जंगल का राजा होने के नाते शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा देता है। 

  13. चामुण्डा


    देवी दुर्गा ने एक बार कौशिकी नाम से अवतार लिया था। इनसे युद्ध करने चण्ड - मुण्ड नामक दो असुर आए। तब देवी ने काली का रूप धारण करके दोनोंअसुरों का संहार कर दिया जिससे इनका नाम चामुण्डा पड़ गया।

    वाहन- प्रेत (शव)
    यह वृद्धावस्था और मृत्यु का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि मां चामुण्डा की उपासना से व्यक्ति -कष्टों से मुक्त हो जाता है।

  14. त्रिपुरभैरवी


    भैरव शब्द में भय और विस्मय का भाव समाहित है। त्रिपुरभैरवी दर्शाती हैं कि तीन ‘पुर’ अर्थात् चेतना की तीन अवस्थाओं को पार करके परम-ब्रह्म की प्राप्ति
    हो सकती है।

    वाहन- सूर्यमुखी-पुष्प
    यह साधक को हर परिस्थिति में प्रसन्न रहने और ज्ञान-रूपी प्रकाश की ओर देखने का संदेश देता है। यह दीर्घायु, प्रेम एवं निष्ठा का प्रतीक है।

  15. देवसेना


    इंद्र की पुत्री और भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) की पत्नी हैं। इनकी कार्तिकेय के साथ ही पूजा होती है। इनका नाम देवयानी भी है।

    वाहन- मोर 
    मोर दूरदर्शी औरसुंदरता का प्रतीक है इसलिए इसमें रजोगुण की प्रधानता होती है। साथ ही, यह आध्यात्मिकता व सतर्कता का भी प्रतीक है।

  16. पार्वती


    पार्वती देवी संपन्नता, प्रेम और निष्ठा की अधिष्ठात्री हैं। इनसे दिव्य शक्ति और भक्ति प्राप्त होती है। यह हिमालय पर्वत की पुत्री, भगवान शिव की पत्नी औरगणेश तथा कार्तिकेय की माता हैं। पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती को एकसाथ ‘त्रिदेवी’ कहते हैं।

    वाहन : व्याघ्र
    बाधाओं और भय को जीतकर अपनी सत्ता-स्थापना करने का प्रतीक है। व्याघ्र बलपूर्वक भावनाओं के आवेग पर नियंत्रण पाने का संदेश देता है।

  17. मनसा देवी


    सर्प-जाति की देवी हैं। सर्प-दंश के उपचार एवं उर्वरता व समृद्धि के लिए इनकी उपासना की जाती है। इनके अन्य नाम विषहरा, नित्या और पद्मावती हैं।

    वाहन : सर्प
    ख़तरनाक, चतुर और फुर्तीला होता है। सर्प से निर्भय रहने और बड़ी समस्याओं से जूझने की प्रेरणा मिलती है।

  18. लक्ष्मी


    धन, सौभाग्य और समृद्धि की देवी माना जाता है। यह भगवान विष्णु की पत्नी और शक्ति-स्वरूपा हैं तथा क्षीरसागर में विष्णु की सेवा में लीन रहती हैं।

    वाहन : उल्लू
    प्रकाश में दिखाईनहीं देता इसलिए यह दर्शाता है कि जो व्यक्ति श्रेष्ठ कर्म छोड़कर धन प्राप्ति में लगा रहता है, उसे सत्य के दर्शन नहीं होते।
     

  19. सरस्वती


    माता सरस्वती, ज्ञान की देवी हैं। यह पार्वती और लक्ष्मी के साथ ‘त्रिदेवी’ का रूप धारण कर लेती हैं। इनकी मुद्रा शांत है।

    वाहन- हंस
    इसका मुख्य आहार मोती है। जिस तरह मोती दुर्लभ हैं, उसी तरह ज्ञान भी दुर्लभ होता है और उसे प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को अथक परिश्रम करना पड़ता है।
     

  20. शीतला देवी


    स्कंद पुराण में शीतला देवी चार हाथों में कलश, सूप, झाड़ू तथा नीम के पत्ते धारण करती हैं। इनकी उपासना से समस्त ज्वर, दुर्गन्धयुक्त फोड़े, नेत्र-रोग, फुंसियां आदि दूर हो जाते हैं।

    वाहन : गर्दभ
    इसका उपचार में बड़ा महत्व है क्योंकि गर्दभ की लीद के लेप से चेचक के दाग मिट जाते हैं। साथ ही सूप से रोगी को हवा की जाती है और नीम के पत्ते फोड़ों को सड़ने नहीं देते।

  21. सन्तोषी मां


    भगवान गणेश और रिद्धि-सिद्धि की पुत्री हैं। इनकी उपासना से परिवार में प्रसन्नता, सुख-शान्ति तथा वैभव बना रहता है। यह चिन्ता और परेशानियों को दूरकरके सुख-सौभाग्य का वरदान देती हैं।

    वाहन: कमल-पुष्प
    यह सौंदर्य और पवित्रता का आदर्श संयोग दर्शाता है। यह सुख-वैभव के बीच में विरक्त रहने की प्रेरणा भी देता है।
     

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