After all, why does Hanumanji like sindoor?-आखिर हनुमानजी सिंदूर क्यों पसंद करते हैं। - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Tuesday, 28 April 2020

After all, why does Hanumanji like sindoor?-आखिर हनुमानजी सिंदूर क्यों पसंद करते हैं।




हनुमान जी के जीवन के ऐसे कई रोचक प्रसंग हैं, जिनसे जीवन में प्रेरणा मिलती है। आज इस लेख में हम जानते हैं ऐसी ही कुछ रोचक बातों के बारे में कि आखिर हनुमानजी सिंदूर क्यों पसंद करते हैं।
हनुमान जी की पूजा महिलाओं को क्यों नहीं करनी चाहिए। साथ ही ये भी जानेंगे कि नटखट नन्हें मारुति ने ऐसा क्या किया कि उनका नाम हनुमान रख दिया गया।
श्री हनुमान क्यों हुए सिंदूरी शास्त्रों में इस विषय में जानकारी दी गई है कि जब रावण को मारकर राम जी सीता जी को लेकर अयोध्या आए थे। तब हनुमान जी ने भी भगवान राम और माता सीता के साथ आने की जिद की। राम ने उन्हें बहुत रोका। लेकिन हनुमान जी थे कि अपने जीवन को श्री राम की सेवा करके ही बिताना चाहते थे।
एक बार उन्होंनें माता सीता को मांग में सिंदूर भरते हुए देखा। तो माता सीता से इसका कारण पूछ लिया। माता सीता ने उनसे कहा कि वह प्रभु राम को प्रसन्न रखने के लिए सिंदूर लगाती हैं। हनुमान जी को श्री राम को प्रसन्न करने की ये युक्ति बहुत भा गई। उन्होंने सिंदूर का एक बड़ा बक्सा लिया और स्वयं के ऊपर उड़ेल लिया। और श्री राम के सामने पहुंच गए।
तब श्री राम उनको इस तरह से देखकर आश्चर्य में पड़ गए। उन्होंने हनुमान से इसका कारण पूछा। हनुमान जी ने श्री राम से कहा कि प्रभु मैंने आपकी प्रसन्नता के लिए ये किया है। सिंदूर लगाने के कारण ही आप माता सीता से बहुत प्रसन्न रहते हो। अब आप मुझसे भी उतने ही प्रसन्न रहना। तब श्री राम को अपने भोले-भाले भक्त हनुमान की युक्ति पर बहुत हंसी आई। और सचमुच हनुमान के लिए श्री राम के मन में जगह और गहरी हो गई।
क्यों नहीं करना चाहिए महिलाओं को हनुमानजी की पूजा ?
हनुमान जी सदा ब्रह्मचारी रहें। शास्त्रों में हनुमान जी की शादी होने का वर्णन मिलता है। लेकिन ये शादी भी हनुमान जी ने वैवाहिक सुख प्राप्त करने की इच्छा से नहीं की। बल्कि उन 4 प्रमुख विद्याओं की प्राप्ति के लिए की थी। जिन विद्याओं का ज्ञान केवल एक विवाहित को ही दिया जा सकता था।
इस कथा के अनुसार हनुमान जी ने सूर्य देवता को अपना गुरु बनाया था। सूर्य देवता ने नौ प्रमुख विद्याओं में से पांच विद्या अपने शिष्य हनुमान को सिखा दी थी। लेकिन जैसे ही बाकी चार विद्याओं को सिखाने की बारी आई।
तब सूर्य देव ने हनुमान जी से शादी कर लेने के लिए कहा क्योंकि ये विद्याओं का ज्ञान केवल एक विवाहित को ही दिया जा सकता था। अपने गुरु की आज्ञा से हनुमान ने विवाह करने का निश्चय कर लिया। हनुमान जी से विवाह के लिए किस कन्या का चयन किया जाए, जब यह समस्या सामने आई।
तब सूर्य देव ने अपनी परम तेजस्वी पुत्री सुवर्चला से हनुमान को शादी करने की प्रस्ताव दिया। हनुमान जी और सुवर्चला की शादी हो गई। सुवर्चला परम तपस्वी थी।
शादी होने के बाद सुवर्चला तपस्या में मग्न हो गई। उधर हनुमान जी अपनी बाकी चार विद्याओं के ज्ञान को हासिल करने में लग गए। इस प्रकार विवाहित होने के बाद भी हनुमान जी का ब्रह्मचर्य व्रत नहीं टूटा।
हनुमान ने प्रत्येक स्त्री को मां समान दर्जा दिया है। यही कारण है कि किसी भी स्त्री को अपने सामने प्रणाम करते हुए नहीं देख सकते बल्कि स्त्री शक्ति को वो स्वयं नमन करते हैं। यदि महिलाएं चाहे तो हनुमान जी की सेवा में दीप अर्पित कर सकती हैं।
हनुमान जी की स्तुति कर सकती हैं। हनुमान जी को प्रसाद अर्पित कर सकती हैं। लेकिन 16 उपचारों जिनमें मुख्य स्नान, वस्त्र, चोला चढ़ाना आते हैं, ये सब सेवाएं किसी महिला के द्वारा किया जाना हनुमान जी स्वीकार नहीं करते हैं।
बाल हनुमान ने ऐसा क्या किया कि उनका नाम हनुमान रख दिया गया ?
हनुमान माता अंजनी और केसरी के पुत्र थे। पवनदेव के आर्शीर्वाद से हनुमान का जन्म हुआ था। हनुमान जन्म से ही बहुत अधिक ताकतवर और विशाल शरीर वाले थे। हनुमान के बचपन का नाम मारुति था। एक बार मारुति ने सूर्यदेवता को देखकर फल समझ लिया। और तेजी से सूर्यदेवता की और पहुंचकर उन्हें निगलने की कोशिश में अपना मुंह बड़ा कर लिया।
इंद्र देव ने मारुति को ऐसा करता देखा तो अपना वज्र उन पर छोड़ दिया। वज्र जाकर मारुति की हनु यानी कि ठोड़ी पर लगा। वज्र लगते ही नन्हें मारुति बेहोश हो गए। यह देख उनके पालक पिता पवनदेव को गुस्सा आ गया।
जिससे उन्होंने सारे संसार में पवन का बहना रोक दिया। जीवन पानी बिना भी कुछ समय तक रह सकता है लेकिन प्राण वायु बिना तो एक क्षण नहीं। इसलिए इंद्र ने पवनदेव को तुरंत मनाया। इसके बाद नन्हें मारुति को सभी देवताओं ने अपनी ओर से शक्तियां प्रदान की। सूर्यदेवता के तेज अंश प्रदान करने के कारण ही हनुमान बुद्धि संपन्न हुए। वज्र मारुति के हनु पर लगा था जिसके कारण ही उनका नाम हनुमान हुआ।




There are many interesting episodes of Hanuman ji's life, which provide inspiration in life. Today in this article we know about some such interesting things why Hanumanji likes vermilion.

Why women should not worship Hanuman ji. At the same time, they will also know that what did the naughty little Maruti do that they were named Hanuman.

The information about why Sri Hanuman happened in Sinduri scriptures is that when Ram ji came to Ayodhya after killing Ravana. Then Hanuman ji also insisted on coming with Lord Rama and Mother Sita. Rama stopped them a lot. But Hanuman ji wanted to spend his life only by serving Shri Rama.

Once he saw Mother Sita filling vermilion in demand. So Mother asked Sita the reason for this. Mother Sita told him that she keeps vermilion to please Lord Rama. This trick of making Hanuman ji happy with Shri Rama was very much appreciated. He took a large box of vermilion and poured it on himself. And reached in front of Shri Ram.

Then Shri Ram was surprised to see him like this. He asked Hanuman the reason for this. Hanuman ji told Shri Ram that Lord I have done this to your delight. You are very happy with Mother Sita because of applying vermilion. Now be equally happy with me. Then Shri Rama laughed a lot at the tip of his naïve devotee Hanuman. And for Hanuman, Sri Rama's mind deepened.

Why should not women worship Hanumanji?

Hanuman ji always be celibate. There is a description of Hanuman's marriage in the scriptures. But even this marriage was not done by Hanuman ji with the desire to get marital happiness. Rather, to achieve those 4 major disciplines. The knowledge of which knowledge could be given only to a married.

According to this legend, Hanuman had made the Sun God his master. The Sun God taught five of the nine major disciplines to his disciple Hanuman. But as soon as the turn came to teach the remaining four disciplines.

Then Sun God asked Hanuman to get married because knowledge of these knowledge could only be given to a married man. Hanuman decided to get married by the orders of his guru. When to choose which girl to marry Hanuman ji, this problem came up.

Then Sun God proposed to Hanuman to marry his supremely brilliant daughter Suvarchala. Hanuman ji and Suvarchala got married. Suvarchala was the ultimate ascetic.

After getting married, Suvarchala became engrossed in penance. On the other hand, Hanuman ji started to gain knowledge of the rest of his four disciplines. Thus even after getting married, Hanuman ji's Brahmacharya fast was not broken.

Hanuman has given every woman equal status. This is the reason why we cannot see any woman bowing in front of her, but she salutes the female power herself. If women want, they can offer lamp in the service of Hanuman ji.

She can praise Hanuman ji. She can offer prasad to Hanuman ji. But Hanuman ji does not accept all the 16 treatments, which include bathing, dressing, dressing, etc., by a woman.

What did Bal Hanuman do that he was named Hanuman?

Hanuman Mata was the son of Anjani and Kesari. Hanuman was born by the blessings of Pawan Dev. Hanuman was very powerful and had a huge body from birth. Hanuman's childhood name was Maruti. Once Maruti saw the Sun God and understood the fruit. And quickly reached the Sun God and made his mouth big in an attempt to swallow them.

When Indra Dev saw Maruti doing this, he left his thunderbolt on them. Going to Vajra, Maruti's Hanu means that on the chin. As soon as the thunderbolt started, the little Maruti fainted. Seeing this, his foster father Pawan Dev got angry.

Due to which they stopped the flow of wind in the whole world. Life can remain for some time even without water, but not a moment without life. Therefore Indra immediately celebrated Pawan Dev. After this, all the Gods gave powers to the little Maruti on their behalf. Hanuman's intellect was enriched because of providing a sharp portion of the Sun God. Vajra was imposed on Maruti's Hanu, due to which his name was Hanuman.

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