विशालाक्षी मंदिर या विशालाक्षी गौरी मंदिर - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Tuesday, 21 April 2020

विशालाक्षी मंदिर या विशालाक्षी गौरी मंदिर

विशालाक्षी मंदिर या विशालाक्षी गौरी मंदिर हिन्दूओं का प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह मंदिर देवी विशालाक्षी को समर्पित है। विशालाक्षी एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है वह जिसकी बड़ी आंखें हैं। विशालाक्षी मंदिर भारत के राज्य उत्तर प्रदेश के वाराणसी नगर में काशी विश्वनाथ मंदिर से कुछ दूरी पर गंगा नदी के तट पर स्थित मीरघाट( मणिकर्णिका घाट) पर है। वाराणसी का प्राचीन नाम काशी है। काशी प्राचीन भारत की सांस्कृतिक एवम पुरातत्व की धरोहर है। काशी या वाराणसी हिंदुओं की सात पवित्र पुरियों में से एक है। देवी पुराण में काशी के विशालाक्षी मंदिर का उल्लेख मिलता है।




विशालाक्षी मंदिर कजली तीज त्यौहार के लिए जाना जाता है, जो तीसरे दिन भद्रपद (अगस्त) के हिंदू महीने में पखवाड़े (दो सप्ताह का समय) के दौरान तीसरे दिन आयोजित किया गया था।
यह मंदिर माता के 51 शक्तिपीठों में से एक है। इस मंदिर में शक्ति को देवी विशालाक्षी के रूप पूजा जाता है और भैरव को संरक्षक व काल भैरव के रूप में पूजा जाता है। पुराणों के अनुसार जहाँ-जहाँ सती के अंग के टुकड़े, धारण किए वस्त्र या आभूषण गिरे, वहाँ-वहाँ शक्तिपीठ अस्तित्व में आये। ये अत्यंत पावन तीर्थस्थान कहलाते हैं। ये तीर्थ पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैले हुए हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी सती ने उनके पिता दक्षेस्वर द्वारा किये यज्ञ कुण्ड में अपने प्राण त्याग दिये थे, तब भगवान शंकर देवी सती के मृत शरीर को लेकर पूरे ब्रह्माण चक्कर लगा रहे थे इसी दौरान भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित कर दिया था, जिसमें से सती की दायें कान की बाली इस स्थान पर गिरी थी। इसलिए इस जगह को ‘मणिकर्णिका घाट’ भी कहते हैं।
एक अन्य आख्यान के अनुसार माँ अन्नपूर्णा, जिनके आशीर्वाद से संसार के समस्त जीव भोजन प्राप्त करते हैं, वे ही ‘विशालाक्षी’ हैं। ‘स्कंद पुराण’ की कथा के अनुसार जब ऋषि व्यास को वाराणसी में कोई भी भोजन अर्पण नहीं कर रहा था, तब विशालाक्षी एक गृहिणी की भूमिका में प्रकट हुईं और ऋषि व्यास को भोजन दिया। विशालाक्षी की भूमिका बिलकुल अन्नपूर्णा के समान थी।
श्री विशालाक्षी मंदिर में सभी त्यौहार मनाये जाते है विशेष कर कजली तीज, दुर्गा पूजा व नवरात्र के त्यौहार पर विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। इस दिन मंदिर को फूलो व लाईट से सजाया जाता है। मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं के दिल और दिमाग को शांति प्रदान करता है।

Vishalakshi Temple or Vishalakshi Gauri Temple is one of the famous temples of Hindus. This temple is dedicated to Goddess Vishalakshi. Visalakshi is a Sanskrit word meaning one who has big eyes. The Vishalakshi Temple is at the Mirghat (Manikarnika Ghat) situated on the banks of the Ganges, some distance from the Kashi Vishwanath Temple in Varanasi Nagar, Uttar Pradesh, India. The ancient name of Varanasi is Kashi. Kashi is a heritage of cultural and archeology of ancient India. Kashi or Varanasi is one of the seven holy men of Hindus. In the Devi Purana, there is mention of the Visalakshi temple of Kashi.
The Vishalakshi temple is known for the Kajali Teej festival, which was held on the third day during the fortnight (two weeks time) in the Hindu month of Bhadrapada (August).
This temple is one of the 51 Shakti Peethas of Mata. In this temple, Shakti is worshiped as Goddess Vishalakshi and Bhairava is worshiped as protector and Kaal Bhairava. According to the Puranas, wherever pieces of Sati's part, clothes or jewelery worn, Shaktipeeth came into existence there. They are called the most sacred shrines. These shrines are spread throughout the Indian subcontinent.
According to the mythology, Goddess Sati sacrificed her life in the sacrificial fire performed by her father Dakshevara, when Lord Shankar was circling the entire universe with the dead body of Goddess Sati, during this time, Lord Vishnu, with his Sudarshan Chakra, sati's body. Was divided into 51 parts, out of which Sati's right earring fell at this place. Therefore, this place is also called 'Manikarnika Ghat'.
According to another legend, Mother Annapurna, by whose blessings all the living beings of the world receive food, she is 'Vishalakshi'. According to the legend of 'Skanda Purana' when Rishi Vyasa was not offered any food in Varanasi, Vishalakshi appeared in the role of a housewife and gave food to sage Vyasa. Vishalakshi's role was similar to Annapurna's.
All the festivals are celebrated in Shri Vishalakshi Temple, especially special festivals are organized on the festival of Kajali Teej, Durga Puja and Navratri. On this day the temple is decorated with flowers and lights. The spiritual atmosphere of the temple brings peace to the hearts and minds of the devotees.

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