ब्राह्मण पुत्र होने के बाद भी परशुराम में क्यों थे क्षत्रियों के गुण - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Wednesday, 29 April 2020

ब्राह्मण पुत्र होने के बाद भी परशुराम में क्यों थे क्षत्रियों के गुण

ब्राह्मण पुत्र होने के बाद भी परशुराम में क्यों थे क्षत्रियों के गुण


Kahani Bhagwan Parshuram Ki | यह तो हम सभी जानते है की भगवान परशुराम एक ब्राह्मण थे। लेकिन आचरण उनका क्षत्रियों जैसा था।ब्राह्मण पुत्र होते हुए भी परशुराम में क्षत्रियों के गुण क्यों थे, इसका जवाब जानने के लिए पढ़ते है यह पौराणिक प्रसंग –
इसलिए परशुराम में थे क्षत्रियों के गुण
महर्षि भृगु के पुत्र ऋचिक का विवाह राजा गाधि की पुत्री सत्यवती से हुआ था। विवाह के बाद सत्यवती ने अपने ससुर महर्षि भृगु से अपने व अपनी माता के लिए पुत्र की याचना की। तब महर्षि भृगु ने सत्यवती को दो फल दिए और कहा कि ऋतु स्नान के बाद तुम गूलर के वृक्ष का तथा तुम्हारी माता पीपल के वृक्ष का आलिंगन करने के बाद ये फल खा लेना।
किंतु सत्यवती व उनकी मां ने भूलवश इस काम में गलती कर दी। यह बात महर्षि भृगु को पता चल गई। तब उन्होंने सत्यवती से कहा कि तूने गलत वृक्ष का आलिंगन किया है। इसलिए तेरा पुत्र ब्राह्मण होने पर भी क्षत्रिय गुणों वाला रहेगा और तेरी माता का पुत्र क्षत्रिय होने पर भी ब्राह्मणों की तरह आचरण करेगा।
तब सत्यवती ने महर्षि भृगु से प्रार्थना की कि मेरा पुत्र क्षत्रिय गुणों वाला न हो भले ही मेरा पौत्र (पुत्र का पुत्र) ऐसा हो। महर्षि भृगु ने कहा कि ऐसा ही होगा। कुछ समय बाद जमदग्रि मुनि ने सत्यवती के गर्भ से जन्म लिया। इनका आचरण ऋषियों के समान ही था। इनका विवाह रेणुका से हुआ। मुनि जमदग्रि के चार पुत्र हुए। उनमें से परशुराम चौथे थे। इस प्रकार एक भूल के कारण भगवान परशुराम का स्वभाव क्षत्रियों के समान था।
Why were the qualities of Kshatriyas in Parashurama even after being a Brahmin son

Kahani Bhagwan Parshuram Ki | We all know that Lord Parashurama was a Brahmin. But his conduct was like that of the Kshatriyas. Despite being a Brahmin son, Parashurama read this mythological passage to find out the answer of why the Kshatriyas had qualities.

That's why the qualities of Kshatriyas were in Parashurama

Maharishi Bhrigu's son Hrichik was married to Satyavati, daughter of King Gadhi. After marriage, Satyavati pleaded with her father-in-law Maharishi Bhrigu for a son for her and her mother. Then Maharishi Bhrigu gave two fruits to Satyavati and said that after the season bath you should eat this fruit after hugging the sycamore tree and your mother Peepal tree.

But Satyavati and her mother mistakenly made a mistake in this work. Maharishi Bhrigu came to know about this. Then he told Satyavati that you have embraced the wrong tree. Therefore, your son will be a Kshatriya despite being a Brahmin and your mother's son will behave like a Brahmin even if he is a Kshatriya.

Then Satyavati prayed to Maharishi Bhrigu that my son should not be of Kshatriya qualities even if my grandson (son of son) is like this. Maharishi Bhrigu said that this will happen. After some time Jamadagri Muni was born from the womb of Satyavati. Their conduct was similar to that of the sages. He is married to Renuka. Muni Jamadagri had four sons. Parashurama was the fourth among them. Thus, due to a mistake, Lord Parshuram's nature was similar to that of the Kshatriyas.

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