Brother of goddess Sita-देवी सीता के भाई - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Tuesday, 28 April 2020

Brother of goddess Sita-देवी सीता के भाई



देवी सीता के भाई

श्रीराम और देवी सीता का विवाह कदाचित म हादेव एवं माता पार्वती के विवाह के बाद सबसे प्रसिद्ध विवाह माना जाता है।
इस विवाह की एक और विशेषता ये थी कि इस विवाह में त्रिदेवों सहित लगभग सभी मुख्य देवता किसी ना किसी रूप में उपस्थित थे।
कोई भी इस विवाह को देखने का मोह छोड़ना नहीं चाहता था। श्रीराम सहित ब्रह्महर्षि वशिष्ठ एवं राजर्षि विश्वामित्र को भी इसका ज्ञान था।
कहा जाता है कि उनका विवाह देखने को स्वयं ब्रह्मा, विष्णु एवं रूद्र ब्राह्मणों के वेश में आये थे।
चारो भाइयों में श्रीराम का विवाह सबसे पहले हुआ। विवाह का मंत्रोच्चार चल रहा था और उसी बीच कन्या के भाई द्वारा की जाने वाली विधि आयी।
इस विधि में कन्या का भाई कन्या के आगे-आगे चलते हुए लावे का छिड़काव करता है। उत्तर भारत, विशेषकर बिहार एवं उत्तर प्रदेश में आज भी ये प्रथा देखने को मिलती है।
विवाह पुरोहित ने जब इस प्रथा के लिए कन्या के भाई का आह्वान किया तो ये विचार किया जाने लगा कि इस प्रथा को कौन पूरा कर सकता है।
समस्या ये थी कि उस समय वहाँ ऐसा कोई नहीं था जो माता सीता के भाई की भूमिका निभा सके।
अपनी पुत्री के विवाह में इस प्रकार विलम्ब होता देख कर पृथ्वी माता भी दुखी हो गयी।
चर्चा चल ही रही थी कि अचानक एक श्यामवर्ण का युवक उठा और उसने इस विधि को पूरा करने के लिए आज्ञा माँगी।
वास्तव में वो स्वयं मंगलदेव थे जो वेश बदलकर नवग्रहों सहित श्रीराम का विवाह देखने को वहाँ आये थे।
देवी सीता का जन्म पृथ्वी से हुआ था और मंगल भी पृथ्वी के पुत्र थे। इस नाते वे देवी सीता के भाई भी लगते थे। इसी कारण पृथ्वी माता के संकेत से वे इस विधि को पूर्ण करने के लिए आगे आये।
इस प्रकार एक अनजान व्यक्ति को इस रस्म को निभाने को आता देख कर राजा जनक दुविधा में पड़ गए।
जिस व्यक्ति के कुल, गोत्र एवं परिवार का कुछ पता ना हो उसे वे कैसे अपनी पुत्री के भाई के रूप में स्वीकार कर सकते थे।


उन्होंने मंगल से उनका परिचय, कुल एवं गोत्र पूछा।
इसपर मंगलदेव ने मुस्कुराते हुए कहा - हे महाराज जनक ! मैं अकारण ही आपकी पुत्री के भाई का कर्तव्य पूर्ण करने को नहीं उठा हूँ। आपकी आशंका निराधार नहीं है किन्तु आप निश्चिंत रहें, मैं इस कार्य के सर्वथा योग्य हूँ।
अगर आपको कोई शंका हो तो आप महर्षि वशिष्ठ एवं विश्वामित्र से इस विषय में पूछ सकते हैं।
ऐसी तेजयुक्त वाणी सुनकर राजा जनक ने महर्षि वशिष्ठ एवं विश्वामित्र से इसके बारे में पूछा। वे दोनों तो सब जानते ही थे अतः उन्होंने सहर्ष इसकी आज्ञा दे दी।
इस प्रकार गुरुजनों से आज्ञा पाने के बाद मंगल ने देवी सीता के भाई के रूप में सारी रस्में निभाई।
रामायण के सारे संस्करणों में तो नहीं किन्तु कम्ब रामायण एवं रामचरितमानस में इसका उल्लेख है। ये कथा अपनी बहन के प्रति एक भाई के उत्तरदायित्वों के निर्वाह का एक मुख्य उदाहरण है।
️सिया वर राम चन्द्र की जय


The marriage of Sri Ram and Goddess Sita is probably considered to be the most famous marriage after the marriage of Hadeva and Mata Parvati.
Another feature of this marriage was that almost all the main deities, including the trinity, were present in some form or the other.
Nobody wanted to give up the temptation to see this marriage. Brahmarshi Vashistha and Rajarshi Vishwamitra also knew this along with Shriram.
It is said that Brahma, Vishnu and Rudra came to disguise themselves as Brahmins to see their marriage.
Among the four brothers, Ram was married first. The mantra of marriage was going on and in the meantime a method followed by the girl's brother came.
In this method, the girl's brother sprinkles the girl in front of the girl. This practice is still seen in North India, especially in Bihar and Uttar Pradesh.
When the marriage priest called upon the girl's brother for this practice, then it was considered that who can complete this practice.
The problem was that at that time there was no one who could play the role of mother Sita's brother.
On seeing this kind of delay in the marriage of her daughter, Mother Earth also became sad.
The discussion was going on that suddenly a young man of Shyamvarna got up and asked for permission to complete this method.
In fact, he was Mangaldev himself, who had come there to see the marriage of Sri Ram with the Navagrahas changed.
Goddess Sita was born to Prithvi and Mars was also the son of Prithvi. Because of this, they also seemed to be the brothers of Goddess Sita. That is why, with the help of Mother Earth, he came forward to complete this method.
Thus, seeing an unknown person coming to perform this ritual, King Janak got confused.
How could they accept a person whose clan, gotra and family do not know anything as their daughter's brother.
He asked Mangal to introduce him, Kul and Gotra.
On this, Mangaldev smiled and said - O Maharaj Janak! I have not been able to carry out the duty of your daughter's brother without any reason. Your apprehension is not unfounded, but be sure, I am absolutely capable of this task.
If you have any doubt, then you can ask Maharishi Vasistha and Vishwamitra in this matter.
On hearing such a sharp voice, King Janak asked Maharishi Vasistha and Vishwamitra about it. They both knew everything, so they gladly gave the order.
In this way, Mangal performed all the rituals as the brother of Goddess Sita after getting orders from the gurus.
Not all versions of Ramayana, but it is mentioned in Kamb Ramayana and Ramcharitmanas. This story is a prime example of a brother's responsibilities towards his sister.
Asiya Var Ram Chandra Jai

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