Devikupa Shaktipeeth-देवीकूप शक्तिपीठ - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Saturday, 25 April 2020

Devikupa Shaktipeeth-देवीकूप शक्तिपीठ

शक्तिपीठ का विशेष महत्व है
पुराणों के अनुसार, भद्रकाली कुरुक्षेत्र में सर्वोच्च शक्ति पीठधाम है। चैत्र और आश्विन मास की नवरात्रि को इस महा शक्ति पीठ में विशेष उत्सव के रूप में मनाया जाता है। नवरात्रि को माता की पूजा करने के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है। शक्तिपीठों में मां भद्रकाली का विशेष महत्व है। शक्तिपीठ माँ सती का प्रिय निवास स्थान है, जहाँ माता की शक्तियाँ प्रकट हुई थीं। हिंदू ग्रंथों में केवल 52 ऐसे शक्तिपीठों का उल्लेख है। शक्ति पीठ, 52 शक्ति पीठों में से एक, हरियाणा के कुरुक्षेत्र में श्रीदेवी कूप भद्रकाली मंदिर।


माता सती का यह अंग गिरा था
भद्रकाली शक्तिपीठ में, देवी सती के दाहिने पैर (घुटने के नीचे) का टखना गिरा था। इसका महत्व तब और बढ़ जाता है जब इसमें श्री कृष्ण का उल्लेख होता है। कहा जाता है कि भद्रकाली शक्तिपीठ में श्री कृष्ण और बलराम का मुंडन हुआ था। मंदिर के प्रमुख सतपाल शर्मा के अनुसार, भद्रकाली मंदिर देवी माँ काली को समर्पित है। भद्रकाली शक्ति पीठ, सावित्री पीठ के रूप में प्रसिद्ध है। भद्रकाली मंदिर में देवी काली की मूर्ति स्थापित है और मंदिर में प्रवेश करने पर एक बड़ा कमल का फूल बनाया गया है, जिसमें माता सती का दाहिना पैर स्थापित है, जो सफेद संगमरमर से बना है।

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यह मान्यता है
पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी सती ने यज्ञ कुंड में अपने जीवन का बलिदान दिया, जो उनके पिता दक्षेश्वर की ओर से किया जा रहा था। तब भगवान शंकर देवी सती के मृत शरीर को ले कर रुद्ररूप में ब्रह्मांड में घूम रहे थे। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 52 भागों में विभाजित किया। सती का दाहिना टखना इसी स्थान से गिरा था। सती का दाहिना टखना इस मंदिर में बने कुएं में गिरा था, इसलिए इस मंदिर को श्री देवी कूप मंदिर भी कहा जाता है। यह स्थान थानेसर में है।

नवरात्रि के दौरान माता के इस मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है।


अश्व दान की प्रथा
ऐसा माना जाता है कि श्री कृष्ण महाभारत काल में पांडवों के साथ इस मंदिर में आए थे। उसने विजय के लिए अपनी मां से मन्नत मांगी थी। युद्ध जीतने के बाद, पांडव मंदिर में आए और घोड़ों का दान किया, तब से यह प्रथा चली आ रही है। कुछ लोग यहां चांदी और सोने के घोड़े चढ़ाते हैं और आम लोग मिट्टी के घोड़े बनाते हैं। प्रणब मुखर्जी और देवी प्रतिभा पाटिल सिंह सहित कई राष्ट्रपतियों और वीआईपी ने यहां प्रार्थना की।

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कलश स्थापना के लिए केवल 1 घंटे का समय
नवरात्रि की शुरुआत रविवार से मां शैलपुत्री की पूजा से हुई। इस कारण शहर के मंदिरों में सजावट की गई है। माता के दर्शन करने वाले भक्तों के लिए मंदिरों में बहुत व्यवस्था है। रविवार को माता के भक्तों को कलश स्थापना करने के लिए केवल 1 घंटा 28 मिनट का समय मिलेगा। इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त में माता का कलश भी स्थापित किया जा सकता है।

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कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
आचार्य दीपक तेजस्वी के अनुसार, रविवार को कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6.12 बजे से सुबह 7.40 बजे तक रहेगा। यदि किसी कारणवश कोई भक्त इस दौरान कलश की स्थापना नहीं कर पाता है, तो वह अभिजीत मुहूर्त यानि 11 बजकर 47 मिनट से 12.35 मिनट तक कलश स्थापना कर सकता है। माता का आगमन हाथी पर होगा, इसलिए इस बार के नवरात्र कृषि क्षेत्र के लिए अच्छी खबर लाएंगे और फसल अच्छी होगी।

Shaktipeeth has special importance
According to the Puranas, Bhadrakali is the supreme power Peethadham in Kurukshetra. Navratri of Chaitra and Ashwin month are celebrated as special celebrations in this Maha Shakti Peeth. Navratri is considered to be the best period to worship the mother. Maa Bhadrakali has special significance in Shaktipeeths. Shaktipeeth is the beloved abode of Mother Sati, where the mother's powers were revealed. Only 52 such Shaktipeeths are mentioned in Hindu texts. Shakti Peetha, one of the 52 Shakti Peethas, Sridevi Kup Bhadrakali Temple in Kurukshetra, Haryana.


This part of Mother Sati had fallen
In Bhadrakali Shaktipeeth, the ankle of the right leg (below the knee) of Goddess Sati was dropped. Its importance is further enhanced when it includes mention of Shri Krishna. It is said that in the Bhadrakali Shaktipeeth, Shri Krishna and Balarama were shaved. According to the head of the temple, Satpal Sharma, the Bhadrakali temple is dedicated to the mother goddess Kali. Bhadrakali Shakti Peeth is famous as Savitri Peeth. The idol of Goddess Kali is installed in the Bhadrakali temple and on entering the temple a large lotus flower has been made, in which the right foot of the mother Sati is installed, which is made of white marble.

Lord Rama also fasted, wealth will be gained by worshiping him

This is recognition
According to mythology, Goddess Sati sacrificed her life in the Yagna Kund, which was being performed on behalf of her father, Dakshevara. Then Lord Shankar was walking in the universe wearing Rudraparup, carrying the dead body of Goddess Sati. Lord Vishnu divided Sati's body into 52 parts from the Sudarshan Chakra. Sati's right ankle fell from this place. The right ankle of Sati fell in the well built in this temple, so this temple is also called Sri Devi Kup temple. This place is in Thanesar.

During Navratri, entry of women is prohibited in this temple of Mother.


Horse donating practice
It is believed that Shri Krishna came to this temple with the Pandavas during the Mahabharata period. He had sought a vow from his mother for Vijay. After winning the war, the Pandavas came to the temple and donated horses, since then this practice has been going on. Some people offer silver and gold horses here and the common people make mud horses. Many Presidents and VIPs including Pranab Mukherjee and Devi Pratibha Patil Singh have offered prayers here.

Chant these mantras in Navratri, every wish will be fulfilled

Only 1 hour time for urn installation
Navratri started from Sunday with the worship of mother Shailputri. Due to this, decoration has been done in the temples of the city. There is a lot of arrangement in the temples for the devotees who visit Mata. On Sunday, devotees of Mata will get only 1 hour and 28 minutes to do the Kalash installation. Apart from this, the mother's urn can also be established in Abhijeet Muhurta.

Do this practice in Navratri to get success in life

Auspicious time for establishment of urn
According to Acharya Deepak Tejashwi, the auspicious auspicious time of establishment of the urn on Sunday will be from 6.12 am to 7.40 am. If for some reason a devotee is not able to establish the Kalash during this time, then he can do the Kalash installation from Abhijeet Muhurta i.e. from 11 to 47 minutes to 12.35 minutes. The arrival of the mother will be on the elephant, so this time the Navratras will bring good news for the agricultural sector and the harvest will be good.

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