Diwali / Deepawali story-दिवाली/दीपावली की कहानी - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Sunday, 26 April 2020

Diwali / Deepawali story-दिवाली/दीपावली की कहानी



दिवाली हिन्दू धर्म का मुख्य पर्व है। रोशनी का पर्व दिवाली कार्तिक
अमावस्या के दिन मनाया जाता है। दिवाली को दीपावली (Deepawali) के नाम से
भी जाना जाता है। मान्यता है कि दीपों से सजी इस रात में लक्ष्मीजी भ्रमण
के लिए निकलती हैं और अपने भक्तों को खुशियां बांटती हैं। दिवाली मनाने के
पीछे मुख्य कथा (About Diwali in Hindi) विष्णुजी के रूप भगवान श्री राम से
जुड़ी है।

छोटी दिवाली के पीछे की कहानी।

दंतकथाओं के अनुसार नरकासुर नाम का एक राक्षस था जो प्रागज्योतिषपुर
राज्य का राजा था। उसने इंद्र को युद्ध में परास्त करके माँ देवी की कान की
बालियों को छीन लिया था। येही नहीं उसने देवताओं और रिशिओं की 16 हज़ार
बेटियों का अपहरण करके उनको अपने इस्त्रिग्रह में बंदी बना रखा
था। इस्त्रियों के प्रति नरकासुर के द्वेष को देख कर सत्यभामा ने कृष्णा से
यह निवेदन किया की उन्हें नरकासुर का वध करने का अवसर प्रदान किया जाये।
यह भी मान्यता है की नरकासुर को यह श्राप था की उसकी मृत्यु एक इस्त्री के
हाथ ही होगी। सत्यभामा कृष्ण द्वारा चलाय जा रहे रथ में बेठ कर युद्ध करने
के लिए गयी। उस युद्ध में सत्यभामा ने नरकासुर को परास्त करके उसका वध किया
और सभी कन्याओं को छुडवा लिया।

इसी दिन को नरका चतुर्दशी कहते है। छोटी दिवाली भी इसी दिन मनाई जाती
है। इसका कारण यह है ही नरकासुर की माता भूदेवी ने यीह घोषणा की थी की उसके
पुत्र की मृत्यु के दिन को मातम के तौर पर नहीं बल्कि त्यौहार के तौर पर
याद रखा जाये।​


दीपावली पर्व के पीछे कथा (Story of Deepawali in Hindi)
अपने प्रिय राजा श्री राम के वनवास समाप्त होने की खुशी में अयोध्यावासियों
ने कार्तिक अमावस्या की रात्रि में घी के दिए जलाकर उत्सव मनाया था। तभी
से हर वर्ष दीपावली का पर्व मनाया जाता है। इस त्यौहार का वर्णन विष्णु
पुराण के साथ-साथ अन्य कई पुराणों में किया गया है।



दीपावली पर लक्ष्मी पूजा (Deepawali Pooja Vidhi Hindi)
अधिकांश घरों में दीपावली के दिन लक्ष्मी-गणेश जी की पूजा (Laxmi Puja on
Diwali) की जाती है। हिन्दू मान्यतानुसार अमावस्या की रात्रि में लक्ष्मी
जी धरती पर भ्रमण करती हैं और लोगों को वैभव का आशीष देती है। दीपावली के
दिन गणेश जी की पूजा का यूं तो कोई उल्लेख नहीं परंतु उनकी पूजा के बिना हर
पूजा अधूरी मानी जाती है। इसलिए लक्ष्मी जी के साथ विघ्नहर्ता श्री गणेश
जी की भी पूजा की जाती है।


दीपदान (Deepdan in Hindi)
दीपावली के दिन दीपदान का विशेष महत्त्व होता है। नारदपुराण के अनुसार इस
दिन मंदिर, घर, नदी, बगीचा, वृक्ष, गौशाला तथा बाजार में दीपदान देना शुभ
माना जाता है।
मान्यता है कि इस दिन यदि कोई श्रद्धापूर्वक मां लक्ष्मी की पूजा करता है
तो, उसके घर में कभी भी दरिद्रता का वास नहीं होता। इस दिन गायों के सींग
आदि को रंगकर उन्हें घास और अन्न देकर प्रदक्षिणा की जाती है।


दीपावली पर्व भारतीय सभ्यता की एक अनोखी छठा को पेश करता है। आज अवश्य
पटाखों की शोर में माता लक्ष्मी की आरती का शोर कम हो गया है लेकिन इसके पीछे की मूल भावना आज भी बनी हुई है। 
जैसे हिन्दू और जैन धर्म में दिवाली को लेकर अपनी-अपनी मान्यताएं है वैसे
ही सिख धर्म में भी दिवाली को मनाने हेतु अपनी ही अलग मान्यता है।
सिख धर्म में जो प्रचलित मान्यता है, यहाँ आप उसके बारे में पढेंगे ।

सिख धर्म में छठे गुरु ,गुरु हरगोबिन्द साहिब जी को उस समय के मुग़ल शहंशाह
जहांगीर ने ग्वालियर के किले में गुरु जी को बंदी बना लिया । क्यूंकि गुरु
जी तो गुरु थे ,वह जेल में भी दोनों समय कीर्तन करने लगे ।
गुरु जी जेल में थे और ऐसे समय में उनके श्रद्धालु कैसे चैन से बैठ जाते । गुरु जी को छुड़वाने के लिए सिखों का एक जत्था श्री आकाल तख़्त साहिब जी से अरदास करके बाबा बुढा जी की
अगुवाई में ग्वालियर के किले के लिए रवाना हो गया। जब यह ग्वालियर के किले
में पहुंचे तो इन्हें गुरु जी से मिलने भी न दिया गया जिसके फलस्वरूप
सिखों में और भी ज्यादा रोष हो गया।
 
इसके पश्चात साई मिया मीर जी ने जहांगीर से गुरु जी को छुड़वाने के लिए बात की ,जिसमे वह सफल भी रहे।
लेकिन गुरु जी ने अकेले किले से रिहाई के लिए मना कर दिया क्योंकि गुरु
जी वहां क़ैद अन्य राजाओं को भी जेल के बंधन से मुक्ति दिलवाना चाहते
थे।जहांगीर ने गुरु जी की बात मान ली लेकिन उसने कहा कि वह सिर्फ उतने
राजाओं को ही छुड़वा सकते है जितने कि उन्हें पकड़े सके । ऐसा जहांगीर ने कैद
से रिहा होने वालो की संख्या कम करने के लिए कहा था। गुरु जी भी मान गए।
गुरु जी ने अपने लिए एक खास तरह के वस्त्र तैयार कराये जिन्हें सभी राजा
पकड़ सकते थे। रिहाई के समय कैद में रह रहे 52 के 52 राजा ही गुरु जी को पकड़
कर रिहा हो गए।

जिस दिन गुरु जी रिहा हुए थे वह कार्तिक मास की अमावस्या का दिन था यानी
की दिवाली का दिन। गुरु जी रिहा होकर अमृतसर पहुंचे। गुरु जी के वापिस आने
की ख़ुशी में सभी लोगों ने अपने घर में दीये जलाये तथा श्री हरमंदिर साहिब में
भी लोगों ने ख़ुशी से दीये जलाये। इसी दिन की ख़ुशी में आज भी श्री हरमंदिर
साहिब में दिवाली का त्यौहार बहुत धूम-धाम के साथ मनाया जाता है।
इस दिन को बंदी छोड़ दिवस के नाम से भी जाना जाता है। 


1. आज ही के दिन आदिकाल से माँ कमला और माँ कलिका तथा गणेश जी की आदि तांत्रिक पूजा होती आ रही है।
2. आज ही के दिन समुद्रमंथन के पश्चात लक्ष्मी व धन्वंतरि प्रकट हुए।
3. आज ही के दिन भगवान राम दुष्ट रावण का वध कर अयोध्या पधारे थे।
4. आज ही के दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था।
5. आज ही के दिन सिद्धार्थ कपिलवस्तु गौतम बुद्ध बनकर लौटे l
6. आज ही के दिन भगवान महावीर स्वामी को निर्वाण प्राप्त हुए।
7. आज ही के दिन भगवान विष्णु ने दैत्य राज हिरण्यकश्यप का वध किया था।
8. आज ही के दिन गवालियर से गुरु हरगोविंद जी अपने साथ 52 हिन्दू राजाओं को मुग़ल राजा जाहंगीर की कैद से मुक्त करा वापस लाये थे।
9. आज ही के दिन से नेपाल का नया साल शुरू होता है।
10. स्वामी रामतीर्थ एवं स्वामी दयानंद ने आज ही के दिन निर्वाण को प्राप्त हुए।
11. मुस्लिम होने के बावजूद मुग़ल राजा अकबर, जहांगीर, बहादुर शाह जफ़र भी बड़ी धूम धाम से दिवाली का उत्सव मानते थे।
12. ऑर्थोडॉक्स भारतीय ईसाई भी आज अपने गिरिजाघरों में रौशनी करते है।
Diwali is the main festival of Hinduism. Festival of lights diwali karthik
It is celebrated on Amavasya. Diwali as Deepawali
Is also known. It is believed that Lakshmi ji visits this night adorned with lamps.
She goes out and shares happiness to her devotees. To celebrate Diwali
The main story behind (About Diwali in Hindi) from Lord Shri Ram in the form of Vishnu
Is attached.

The story behind Chhoti Diwali.
According to legends, there was a demon named Narakasura who lived in Pragjyotishpur.
Was the king of the kingdom. He defeated Indra in battle and listened to Mother Goddess.
The earrings were snatched away. Not only this, he has 16 thousand gods and goddesses
Kidnapping daughters and keeping them captive in their religion
Was. Seeing Narakasura's malice towards the Christians, Satyabhama asked Krishna
It was requested that they should be given an opportunity to kill Narakasura.
It is also believed that Narakasura was cursed that he died of an iron
Will be the hand. Satyabhama to fight in a chariot run by Krishna
Went for In that battle, Satyabhama defeated and killed Narakasura.
And got rid of all the girls.
This day is called Naraka Chaturdashi. Short diwali is also celebrated on this day
is. The reason for this is that Narakasura's mother Bhudevi announced that her
The day of the son's death is not as a mourning but as a festival
To be remembered

Story behind Deepawali festival (Story of Deepawali in Hindi)
Ayodhya residents in joy of ending the exile of their beloved King Shri Ram
Had celebrated the festival of Kartik Amavasya by lighting ghee. Then only
Every year, the festival of Deepawali is celebrated. Vishnu's description of this festival
There have been many Puranas as well as other Puranas.


Lakshmi Puja on Deepawali (Deepawali Pooja Vidhi Hindi)
In most of the houses, worship of Lakshmi-Ganesha on Deepavali (Laxmi Puja on
Diwali). According to Hindu belief, Lakshmi on the new moon night
Zee travels on earth and blesses people with glory. Of diwali
There is no mention of worshiping Ganesha on this day, but without his worship every
Pooja is considered incomplete. Hence Vighnaharta Shri Ganesh with Lakshmi ji
Ji is also worshiped.

Deepdan in Hindi
On the day of Deepawali, Deepdan has special significance. According to Narad Puran this
Day, auspiciousness in temple, house, river, garden, tree, cowshed and market
is believed.
It is believed that on this day, if someone worships Goddess Lakshmi devoutly
So, there is never a abode of poverty in his house. Horns of cows on this day
Adi is colored and lighted by giving them grass and grain.

Deepawali festival presents a unique sixth of Indian civilization. Sure today
The noise of Mata Lakshmi's Aarti has reduced in the noise of firecrackers but the basic spirit behind it remains even today.

Just like Hindu and Jainism have their own beliefs about Diwali.
In Sikhism too, to celebrate Diwali has its own separate belief.
Here is the prevailing belief in Sikhism, you will read about it.
The sixth Guru in Sikhism, Guru Hargobind Sahib Ji, the Mughal emperor at that time
Jahangir took Guru ji captive in the fort of Gwalior. Because guru
Yes, he was a Guru, he started doing Kirtan both times even in jail.
Guru ji was in jail and at such a time, how would his devotees sit in peace. To redeem Guru ji, a group of Sikhs offered Ardas to Shri Aakal Takht Sahib Ji, Baba Budha Ji
Leads to the fort of Gwalior in the vanguard. When this fort of Gwalior
When I reached, they were not even allowed to meet Guruji, as a result of which
Sikhs became even more angry.

After this, Sai Mia Mirji talked to Jahangir to get Guruji released, in which he was also successful.
But Guru Ji refused to be released from the fort alone because the Guru
Yes, there are other kings who want to get rid of prison
Jahangir agreed to Guru ji but he said that he only
Only kings can be rescued as much as they can capture them. Jahangir imprisoned
Was asked to reduce the number of people released. The Guru also agreed.
Guru Ji prepared a special kind of clothes for himself, which all the kings
Could catch. At the time of release, 52 of 52 kings only hold Guru ji
Kar was released.
The day Guru ji was released was the new moon day of Kartik month i.e.
Diwali day. Guru ji was released and reached Amritsar. Master's coming back
All the people lit lamps in their house and in Sri Harmandir Sahib
People also lit lamps with joy. Shri Harmandir is still in happiness on this day
The festival of Diwali in Sahib is celebrated with great pomp and show.

This day is also known as Bandi Chod Day.

1. From today onwards, Mother Tantric worship of Mother Kamala and Mother Kalika and Ganesh is being done.

2. On this day, after Samudramanthan, Lakshmi and Dhanvantari appeared.

3. On this day, Lord Rama killed the evil Ravana and came to Ayodhya.

4. On this day, Lord Krishna killed the demon Narakasura.

5. On this day, Siddharth Kapilvastu returned as Gautam Buddha.

6. On this day Lord Mahavir Swami attained nirvana.

7. On this day, Lord Vishnu killed the demon king Hiranyakashyap.

8. On this day, Guru Hargobind Ji from Gwalior had brought back 52 Hindu kings with him from Mughal King Jahangir's captivity.

9. Nepal's new year begins from this day itself.

10. Swami Ramatirtha and Swami Dayanand attained Nirvana on this day.

11. Despite being Muslim, Mughal kings Akbar, Jahangir, Bahadur Shah Zafar also celebrated Diwali with great pomp.


12. Orthodox Indian Christians also light up in their churches today.

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