Gadiaghat Mata Temple In this temple of Mata, unbroken flame burns with river water-गड़ियाघाट माता मंदिर माता के इस मंदिर में नदी के पानी से जलती है अखंड ज्योत - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Tuesday, 28 April 2020

Gadiaghat Mata Temple In this temple of Mata, unbroken flame burns with river water-गड़ियाघाट माता मंदिर माता के इस मंदिर में नदी के पानी से जलती है अखंड ज्योत

गड़ियाघाट माता मंदिर – 

मध्यप्रदेश के गड़ियाघाट माताजी के मंदिर को अनोखी घटना के लिए जाना जाता है। कालीसिंध नदी के किनारे बने इस मंदिर में दीपक जलाने के लिए घी या तेल की जरूरत नहीं होती बल्कि, वह पानी से जलता है। इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। पिछले 5 सालों से इस मंदिर में पानी से दीपक जलाए जा रहे हैं।

गड़ियाघाट वाली माताजी (Gadiyaghat Mata Temple)के नाम से मशहूर यह मंदिर कालीसिंध नदी के किनारे आगर-मालवा के नलखेड़ा गांव से करीब 15 किमी दूर गाड़िया गांव के पास स्थित है।

मंदिर में पूजा-अर्चना करने वाले पुजारी सिद्धूसिंह जी बताते हैं कि, पहले यहां हमेशा तेल का दीपक जला करता था, लेकिन करीब पांच साल पहले उन्हें माता ने सपने में दर्शन देकर पानी से दीपक जलाने के लिए कहा।



सुबह उठकर जब उन्होंने पास बह रही कालीसिंध नदी से पानी भरा और उसे दीए में डाला। दीए में रखी रुई के पास जैसे ही जलती हुई माचिस ले जाई गई, वैसे ही ज्योत जलने लगी।

ऐसा हाेने पर पुजारी खुद भी घबरा गए और करीब दो महीने तक उन्होंने इस बारे में किसी को कुछ नहीं बताया।

बाद में उन्होंने इस बारे में कुछ ग्रामीणों को बताया तो उन्होंने भी पहले यकीन नहीं किया, लेकिन जब उन्होंने भी दीए में पानी डालकर ज्योति जलाई तो ज्योति जल उठी।



उसके बाद इस चमत्कार के बारे में पूरे गांव में चर्चा फैल गई। तबसे आज तक इस मंदिर में कालीसिंध नदी के पानी से ही दीपक जलाया जाता है।

बताया जाता है कि जब दीपक में पानी डाला जाता है, तो वह चिपचिपे तरल पदार्थ में बदल जाता है और दीपक जल उठता है।

पानी से जलने वाला ये दीपक बरसात के मौसम में नहीं जलता है। क्योंकि बरसात के मौसम में कालीसिंध नदी का वाटर लेवल बढ़ने से यह मंदिर पानी में डूब जाता है, जिससे यहां पूजा करना संभव नहीं होता।

इसके बाद सितंबर-अक्टूबर में आने वाली शारदीय नवरात्रि के पहले दिन यानी घटस्थापना के साथ दोबारा ज्योत जला दी जाती है, जो अगले साल बारीश के मौसम तक लगातार जलती रहती है।


Gadiaghat Mata Temple - In this temple of Mata, unbroken flame burns with river water

The temple of Gadiaghat Mataji of Madhya Pradesh is known for its unique event. This temple, built on the banks of the river Kalisindh, does not require ghee or oil to light a lamp; instead, it burns with water. People come from far and wide to see it. For the last 5 years, lamps in this temple are being lit with water.

This temple, popularly known as Gadiyaghat Mata Temple, is located near the village of Gadiya, about 15 km from Nalkheda village of Agar-Malwa, on the banks of the river Kalisindh.

Siddhusinhji, the priest who worshiped in the temple, tells that, earlier here always used to burn oil lamps, but about five years ago, he was asked by his mother to light a lamp with water.



When he got up in the morning, he watered the nearby Kalisindh river and poured it into the lamp. Jyot started to burn as soon as the burning match was taken near the cotton in the lamp.

On doing this, the priests themselves got scared and for two months they did not tell anyone anything about it.

Later, when he told some villagers about this, he too did not believe at first, but when he also lit the flame by pouring water in the lamp, the flame lit up.



After that discussion about this miracle spread throughout the village. Since then, lamps in this temple are lit by the water of the Kalisindh River.

It is said that when water is poured into the lamp, it turns into viscous fluid and the lamp burns up.

This lamp that burns with water does not burn during the rainy season. Because the water level of the Kalisindh river rises during the rainy season, this temple is submerged in water, due to which it is not possible to worship here.

After this, Jyot is burnt again with Ghatasthapana on the first day of Sharadiya Navaratri in September-October, which keeps on burning continuously till the next year.

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