Good Friday-गुड फ्राइडे - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Sunday, 26 April 2020

Good Friday-गुड फ्राइडे

गुड फ्राइडे के दिन ईसाई धर्म के अनुयायी गिरजाघर जाकर प्रभु यीशु को याद करते हैं। गुड फ्राइडे को ईसा मसीह ने धरती पर बढ़ रहे पाप के लिए बलिदान देकर निःस्वार्थ प्रेम की पराकाष्ठा का उदाहरण प्रस्तुत किया। इस दिन ईसा मसीह ने उत्पीड़न और यातनाएं सहते हुए मानवता के लिए अपने प्राण त्याग दिए।

क्या है गुड फ्राइडे
ईसाई धर्म ग्रंथों के अनुसार जिस दिन ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया व मसीह ने प्राण त्यागे थे उस दिन शुक्रवार का दिन था और इसी की याद में गुड फ्राइडे मनाया जाता है। अपनी मौत के तीन दिन बाद ईसा मसीह पुन: जीवित हो उठे और उस दिन रविवार था। इस दिन को ईस्टर सण्डे कहते हैं। गुड फ्राइडे को होली फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे या ग्रेट फ्राइडे भी कहा जाता है।
ईसाई लोगों के लिए गुड फ्राइडे का विशेष महत्व रखता है। इस दिन ईसा ने सलीब पर अपने प्राण त्यागे थे। यद्यपि वे निर्दोष थे तथापि उन्हें दंडस्वरूप सलीब पर लटका दिया गया। उन्होंने सजा देने वालों पर दोषारोपण नहीं किया बल्कि यह की कि ‘हे ईश्वर इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं।    

क्यों हुई ईसा मसीह की हत्या
यीशु युवा हुए तो घूम-घूमकर लोगों को मानवता और शांति का संदेश देने लगे। उन्होंने धर्म के नाम पर अंधविश्वास फैलाने वाले लोगों को मानव जाति का शत्रु बताया। उनके संदेशों से परेशान होकर धर्मपंडितों ने उन्हें धर्म की अवमानना का आरोप लगाकर उन्हें मृत्यु-दंड दे दिया। दो हजार वर्ष पूर्व ईसा मसीह को इसलिए मृत्युदंड दिया गया क्योंकि ईसा मसीह अन्याय और घोर विलासिता तथा अज्ञानता का अंधकार दूर करने के लिए लोगों को शिक्षा दे रहे थे।
उस समय यहूदियों के कट्टरपन्थी रब्बियों (धर्मगुरुओं) ने ईसा का भारी विरोध किया। उन्हें ईसा में मसीहा जैसा कुछ विशेष नहीं लगा। उन्हें अपने कर्मकाण्डों से प्रेम था। स्वयं को ईश्वरपुत्र बताना उनके लिये भारी पाप था। इसलिए उन्होंने उस समय के रोमन गवर्नर पिलातुस को इसकी शिकायत कर। रोमनों को हमेशा यहूदी क्रान्ति का डर रहता था, इसलिए कट्टरपन्थियों को प्रसन्न करने के लिये पिलातुस ने ईसा को क्रूस (सलीब) पर मृत्युदण्ड क्रूर दंड दिया।

यीशु को कई तरह की यातनाएं दी गईं। यीशु के सिर पर कांटों का ताज रखा गया। इसके बाद यीशु क्रूस(सलीब) को अपने कंधे पर उठाकर गोल गोथा नामक जगह ले गए। जहां उन्हें सलीब पर चढ़ा दिया गया। जिस दिन यीशु को सूली पर चढ़ाया गया, वह शुक्रवार का दिन था। यीशु ने ऊंची आवाज में परमेश्वर को पुकारा- 'हे पिता मैं अपनी आत्मा को तेरे हाथों सौंपता हूं।' ऐसे शब्दों कहने के पश्चात् उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए।

ईसा परिवर्तन के पक्षधर थे। उन्होंने मानव प्रेम की सीमा नहीं बांधी वरन अपने बलिदान से उसे आत्मकेंद्रित एवं स्वार्थ से परे बताया।

गुड फ्राइडे के दिन क्या किया जाता है
गुड फ्राइडे के दिन ईसाई धर्म के अनुयायी गिरजाघर जाकर प्रभु यीशु को याद करते हैं।  श्रद्धालु प्रभु यीशु द्वारा तीन घंटे तक क्रॉस पर भोगी गई पीड़ा को याद करते हैं। रात के समय कहीं-कहीं काले वस्त्र पहनकर श्रद्धालु यीशु की छवि लेकर मातम मनाते हुए पद-यात्रा निकालते हैं।

गुड फ्राइडे प्रायश्चित्त और प्रार्थना का दिन है अतः इस दिन गिरजाघरों में घंटियां नहीं बजाई जातीं बल्कि उसके स्थान पर लकड़ी के खटखटे से आवाज की जाती है। लोग ईसा मसीह के प्रतीक क्रॉस का चुंबन कर भगवान को याद करते हैं। गुड फ्राइडे पर विश्व भर के ईसाई चर्च में सामाजिक कार्यो को बढ़ावा देने के लिए चंंदा व दान देते हैं।

On Good Friday, followers of Christianity visit the church and remember the Lord Jesus. On Good Friday, Jesus Christ exemplified the culmination of selfless love by sacrificing for the growing sin on earth. On this day, Jesus endured his life for humanity enduring persecution and torture.

What is good friday
According to Christian scriptures, Friday was the day when Jesus was crucified and Christ died, and Good Friday is celebrated in remembrance of this. Three days after his death Jesus Christ resurrected and Sunday was that day. This day is called Easter Sunday. Good Friday is also known as Holy Friday, Black Friday or Great Friday.
Good Friday has special significance for Christians. On this day Jesus sacrificed his life on the cross. Although he was innocent, he was hanged on the cross. He did not blame those who punished but rather, "O God, forgive them, because they do not know what they are doing."

Why was Jesus murdered
When Jesus was young, he wandered around and gave the message of humanity and peace to the people. He called people who spread superstition in the name of religion an enemy of mankind. Distraught with his messages, the piety sentenced him to death by accusing him of contempt of religion. Two thousand years ago, Jesus was sentenced to death because Jesus was teaching people to remove the darkness of injustice and gross luxury and ignorance.
At that time, rabbinic rabbis (religious leaders) of the Jews strongly opposed Jesus. He did not find anything special in Christ like the Messiah. He loved his rituals. It was a huge sin for him to call himself the god. So he complained to the then Roman governor Pilate. The Romans always feared the Jewish Revolution, so to please the hardliners, Pilate gave Jesus cruel punishment on the cross (Saleh).

Jesus was tortured in many ways. A crown of thorns was placed on Jesus' head. After this, Jesus lifted the cross (Saleeb) on his shoulder and took it to a place called Gol Gotha. Where he was crucified. The day Jesus was crucified was Friday. Jesus called out to God in a loud voice - 'Father, I entrust my soul to your hands.' He gave up his life after uttering such words.

Jesus was in favor of change. He did not tie the limits of human love, but by his sacrifice he described him as autistic and beyond selfishness.

What is done on good friday
On Good Friday, followers of Christianity visit the church and remember the Lord Jesus. The devotees remember the suffering suffered by the Lord Jesus on the cross for three hours. Wearing black clothes at night time, the devotees take the footsteps, celebrating mourning by taking the image of Jesus.
Good Friday is a day of atonement and prayer, so bells are not played in the churches on this day, but instead a wooden knock is made. People remember God by kissing the cross symbolizing Jesus Christ. On Good Friday, Christians around the world donate to charity to promote social work in the church.

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