यहाँ पर वराह और नृसिंह अवतार का सयुंक्त रूप विराजित है माँ लक्ष्मी के साथ-Here the combined form of Varaha and Narsingh avatar is entwined with Mother Lakshmi. - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Tuesday, 28 April 2020

यहाँ पर वराह और नृसिंह अवतार का सयुंक्त रूप विराजित है माँ लक्ष्मी के साथ-Here the combined form of Varaha and Narsingh avatar is entwined with Mother Lakshmi.




आंध्रपदेश के विशाखापट्टनम से महज 16 किमी दूर सिंहाचल पर्वत पर स्थित है सिंहाचलम मंदिर। इस मंदिर भगवान नृसिंह का घर कहा जाता है। इस मंदिर की विशेषता यह है की यहाँ पर यहाँ पर भगवान् विष्णु के वराह और नृसिंह अवतार का सयुंक्त रूप है जो की माँ लक्ष्मी के साथ विराजित है। इस मंदिर की एक अन्य खासियत यह है कि यहां भगवान नृसिंह की मूर्ति पर पूरे समय चंदन का लेप होता है। केवल अक्षय तृतीया को ही एक दिन के लिए ये लेप मूर्ति से हटाया जाता है, उसी दिन लोग असली मूर्ति के दर्शन कर पाते हैं।

सिंहाचलम मंदिर
होली का त्योहार सतयुग में भक्त प्रहलाद से जुड़ा है। कहानी है कि हिरण्यकशिपु के बेटे प्रहलाद को विष्णु भक्त होने के कारण पिता ने यातनाएं दी थीं। बुआ होलिका ने उसे गोद में बैठाकर जलाने की कोशिश की लेकिन खुद जल गई। उसी प्रहलाद को हिरण्यकशिपु से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लिया था। वैसे तो भारत में भगवान नृसिंह के कई मंदिर हैं लेकिन विशाखापट्टनम में सिंहाचलम मंदिर है, इसे भगवान नृसिंह का घर कहा जाता है।
 

वराह और नृसिंह अवतार का सयुंक्त रूप
मान्यता है कि इस मंदिर को हिरण्यकशिपु के भगवान नृसिंह के हाथों मारे जाने के बाद प्रहलाद ने बनवाया था। लेकिन वो मंदिर सदियों बाद धरती में समा गया। सिंहाचलम देवस्थान की अधिकारिक वेबसाइट के अनुसार इस मंदिर को प्रहलाद के बाद पुरुरवा नाम के राजा ने फिर से स्थापित किया था। पुरुरवा ने धरती में समाए मंदिर से भगवान नृसिंह की मूर्ति निकालकर उसे फिर से यहां स्थापित किया और उसे चंदन के लेप से ढ़ंक दिया। तभी से यहां इसी तरह पूजा की परंपरा है, साल में केवल वैशाख मास के तीसरे दिन अक्षय तृतीया पर ये लेप प्रतिमा से हटाया जाता है। इस दिन यहां सबसे बड़ा उत्सव मनाया जाता है।

वराह और नृसिंह अवतार का सयुंक्त रूप (मंदिर की मुख्य प्रतिमा)
 
सिंहाचलम मंदिर की कथा | Simhachalam Temple Story In Hindi
माना जाता है राजा पुरुरवा एक बार अपनी पत्नी उर्वशी के साथ वायु मार्ग से भ्रमण कर रहे थे। यात्रा के दौरान उनका विमान किसी नैसर्गिक शक्ति से प्रभावित होकर दक्षिण के सिंहाचल क्षेत्र में जा पहुँचा। उन्होंने देखा कि प्रभु की प्रतिमा धरती के गर्भ में समाहित है। उन्होंने इस प्रतिमा को निकाला और उस पर जमी धूल साफ की। इस दौरान एक आकाशवाणी हुई कि इस प्रतिमा को साफ करने के बजाय इसे चंदन के लेप से ढाँककर रखा जाए। इस आकाशवाणी में उन्हें यह भी आदेश मिला कि इस प्रतिमा के शरीर से साल में केवल एक बार, वैशाख माह के तीसरे दिन चंदन का यह लेप हटाया जाएगा और वास्तविक प्रतिमा के दर्शन प्राप्त हो सकेंगे। आकाशवाणी का अनुसरण करते हुए इस प्रतिमा पर चंदन का लेप किया गया और साल में केवल एक बार ही इस प्रतिमा से लेप हटाया जाता है।

प्रतिमा के लेप के लिए तैयार होता चंदन पेस्ट
सिंहाचलम मंदिर का महत्व | Importance Of Simhachalam Temple
आंध्रप्रदेश के विशाखापट्‍टनम में स्थित यह मंदिर विश्व के प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है। यह समुद्री तट से 800 फुट ऊँचा है और उत्तरी विशाखापट्‍टनम से 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मंदिर पहुँचने का मार्ग अनन्नास, आम आदि फलों के पेड़ों से सजा हुआ है। मार्ग में राहगीरों के विश्राम के लिए हजारों की संख्या में बड़े पत्थर इन पेड़ों की छाया में स्थापित हैं। मंदिर तक चढ़ने के लिए सीढ़ी का मार्ग है, जिसमें बीच-बीच में तोरण बने हुए हैं।
शनिवार और रविवार के दिन इस मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। साथ ही यहाँ दर्शन करने के लिए सबसे उपयुक्त समय अप्रैल से जून तक का होता है। यहाँ पर मनाए जाने वाले मुख्य पर्व हैं वार्षिक कल्याणम (चैत्र शुद्ध एकादशी) तथा चंदन यात्रा (वैशाख माह का तीसरा दिन)।
ऐसे पहुंचे इस मंदिर तक…
  • स्थल मार्ग -विशाखापट्‍टनम हैदराबाद से 650 और विजयवाड़ा से 350 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस स्थान के लिए नियमित रूप से हैदराबाद, विजयवाड़ा, भुवनेश्वर, चेन्नई और तिरुपति से बस सेवा उपलब्ध है।
  • रेल मार्ग -विशाखापट्‍टनम चेन्नई-कोलकाता रेल लाइन का मुख्य स्टेशन माना जाता है। साथ ही यह नई दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद से भी सीधे जुड़ा हुआ है।
  • वायु मार्ग-यह स्थान हैदराबाद, चेन्नई, कोलकता, नई दिल्ली और भुवनेश्वर से वायु मार्ग द्वारा सीधे जुड़ा हुआ है। इंडियन एयरलाइन्स की फ्लाइट इस स्थान के लिए सप्ताह में पाँच दिन चेन्नई, नई दिल्ली और कोलकाता से उपलब्ध है।

Here the combined form of Varaha and Narsingh avatar is entwined with Mother Lakshmi.

Simhachalam Temple is located on the Sinhachal mountain, just 16 km from Visakhapatnam in Andhra Pradesh. This temple is called the house of Lord Narasimha. The specialty of this temple is that there is a combined form of Varaha and Narasimha avatar of Lord Vishnu here, who is enthroned with Mother Lakshmi. Another specialty of this temple is that the idol of Lord Narsingh is covered with sandalwood all the time. Only Akshaya Tritiya is removed from the idol for one day, on the same day people are able to see the real idol.


Sinhachalam Temple

Holi festival is associated with devotee Prahlada in Satyuga. The story is that Hiranyakashipu's son Prahlada was tortured by his father as a Vishnu devotee. Aunt Holika tried to burn her by sitting on her lap but herself got burnt. Lord Vishnu incarnated Narsingh to save the same Prahlada from Hiranyakashipu. Although there are many temples of Lord Narsimha in India, but there is Simhachalam Temple in Visakhapatnam, it is called the house of Lord Narsimha.

 

The combined form of Varaha and Narsingh avatar

It is believed that this temple was built by Prahlada after Hiranyakashipu was killed by Lord Narsingh. But that temple permeated the earth after centuries. According to the official website of Sinhachalam Devasthan, this temple was re-established by a king named Pururava after Prahlada. Pururava removed the idol of Lord Narasimha from the temple that was embedded in the earth and installed it again here and covered it with sandal paste. Since then there is a similar tradition of worship here, only on the third day of the month of Vaishakh, on the Akshaya Tritiya, this paste is removed from the statue. The biggest festival is celebrated here on this day.


Combined form of Varaha and Narsingh avatar (main statue of the temple)

 
Story of Sinhachalam Temple | Simhachalam Temple Story In Hindi

It is believed that King Pururava was once traveling by air with his wife Urvashi. During the journey, his aircraft was affected by some natural power and reached the Sinhachal region of the south. He saw that the image of the Lord is contained in the womb of the earth. He took out this statue and cleaned the dust accumulated on it. During this time, there was an All India Radio that instead of cleaning this statue, it should be covered with sandal paste. In this Akashvani, he also received orders that this sandalwood paste will be removed from the body of this statue only once a year, on the third day of the month of Vaishakh and the real statue can be received. Following the All India Radio, sandalwood paste was applied to this statue and only once a year is the paste removed from this statue.


Sandalwood paste prepared for the statue's coating

Importance of Sinhachalam Temple | Importance Of Simhachalam Temple

Located in Visakhapatnam, Andhra Pradesh, this temple is considered one of the oldest temples in the world. It is 800 feet high off the coast and is located 16 kilometers from North Visakhapatnam. The path to reach the temple is decorated with pineapple, mango etc. fruit trees. Thousands of large stones are installed in the shade of these trees for the passers-by to rest. There is a ladder path to climb to the temple, in which the pylons are made in between.

Thousands of devotees visit this temple on Saturday and Sunday. Also, the best time to visit here is from April to June. The main festivals celebrated here are the annual Kalyanam (Chaitra Shuddha Ekadashi) and the Chandan Yatra (third day of Vaishakh month).

Reached this temple like this…

Land route - Visakhapatnam is located 650 km from Hyderabad and 350 km from Vijayawada. Regular bus services are available from Hyderabad, Vijayawada, Bhubaneswar, Chennai and Tirupati to this place.
Rail route - Visakhapatnam is considered to be the main station of the Chennai-Kolkata rail line. It is also directly connected to New Delhi, Chennai, Kolkata and Hyderabad.
By Air: This place is directly connected by air to Hyderabad, Chennai, Kolkata, New Delhi and Bhubaneswar. Indian Airlines flights are available from Chennai, New Delhi and Kolkata five days a week to this destination.

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