Hinglaj Shaktipeeth हिंगलाज शक्तिपीठ - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Wednesday, 22 April 2020

Hinglaj Shaktipeeth हिंगलाज शक्तिपीठ

Hinglaj Shaktipeeth | Hinglaj Shaktipeeth 



Hingul or Hinglaj Shaktipeeth is considered one of the 51 Shaktipeeths. This Shaktipeeth is located about 120 kilometers from Karachi, the capital of Sindh state, in a province called Balochistan, Pakistan. According to a folk tale, the first Kuldevi of the Charans was Hinglaj Mata. His residence was in Balochistan province of Pakistan.

According to the Puranas in Hinduism, wherever the body parts or ornaments of the goddess Sati fell, there they became Shaktipeeth. These Shaktipeeths are called very holy shrines, which are spread throughout the Indian subcontinent. These Shaktipeeths are very important from a religious point of view. Devipurana describes 51 Shaktipeeths.

mythology
Hingul or Hinglaj Shaktipeeth is one of the 51 Shaktipeeths. According to religious texts, parts of Goddess Sati fell at all these places. According to the legend, King Daksha, father-in-law of Lord Shiva, had organized a yajna, in which King Daksha did not send invitations to Lord Shiva and Mother Sati, because King Daksha did not consider Lord Shiva as his equal. Mother Sati found it very bad. She reached the yagna without calling. There was a lot of insult to Lord Shiva at the Yagna site which Mata Sati could not bear and she jumped into the Havan Kund there. Lord Shankar came to know about this, after which he reached there and took out the body of Mata Sati from Havan Kund and started doing Tandava, which caused upheaval in the entire universe. To save the entire universe from this crisis, Lord Vishnu divided the body of Mata Sati into 51 parts from his Sudarshan Chakra, the organ where it fell became the Shakti Peetha.

In the Hingul or Hinglaj Shaktipeeth, the "Brahmarandhra" (upper part of the head or cranium) of Mata Sati was dropped. Here Mata Sati is known as ‘Kottari’ and Lord Shiva as ‘Bhimalochan’

हिंगुल या हिंगलाज शक्तिपीठ को 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। यह शक्तिपीठ पाकिस्तान के बलूचिस्तान नामक प्रांत में सिंध राज्य की राजधानी कराची से लगभग 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। एक लोक कथा के अनुसार चारणों की पहली कुलदेवी हिंगलाज माता थी। उनका निवास पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में था।

हिन्दू धर्म में पुराणों के अनुसार जहाँ-जहाँ देवी सती के शरीर के अंग या आभूषण गिरे, वहाँ-वहाँ उनके शक्तिपीठ बन गये। ये शक्तिपीठ बहुत ही पावन तीर्थ कहलाये, जो पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैले हुए हैं। ये शक्तिपीठ धार्मिक दृष्टि से बहुत ही महत्त्वपूर्ण हैं। देवीपुराण में 51 शक्तिपीठों का वर्णन किया गया है।

पौराणिक कथा
हिंगुल या हिंगलाज शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठों में से एक है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इन सभी स्थानों पर देवी सती के अंग गिरे थे। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव के ससुर राजा दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें राजा दक्ष ने भगवान शिव और माता सती को निमंत्रण नहीं भेजा था क्योंकि राजा दक्ष भगवान शिव को अपने बराबर का नहीं समझते थे। यह बात माता सती को काफी बुरी लगी। वह बिना बुलाए यज्ञ में पहुंच गयीं। यज्ञ स्‍थल पर भगवान शिव का काफी अपमान किया गया जिसे माता सती सहन नहीं कर पायीं और वह वहीं हवन कुण्ड में कुद गयीं। भगवान शंकर को ये बात पता चली, जिसके बाद वे वहाँ पर पहुँच गए और माता सती के शरीर को हवनकुण्ड से निकालकर तांडव करने लगे, जिसके कारण सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में उथल-पुथल मच गई। सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को इस संकट से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने माता सती के शरीर को अपने सुदर्शन चक्र से 51 भागों में बाँट दिया, जो अंग जहाँ पर गिरा वह शक्ति पीठ बन गया।

हिंगुल या हिंगलाज शक्तिपीठ में माता सती का “ब्रह्मरंध्र” (सिर का ऊपरी हिस्सा या कपाल) गिरा था। यहाँ माता सती को ‘कोट्टरी’ और भगवान शिव को ‘भीमलोचन’ के रूप में जाना जाता है।.

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