History of Chandimandir , Chandigarh चंडीमंदिर , चंडीगढ़ का इतिहास - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Wednesday, 22 April 2020

History of Chandimandir , Chandigarh चंडीमंदिर , चंडीगढ़ का इतिहास

जानिए चंडीमंदिर से चंडीगढ़ शहर बनने का इतिहास

माता चंडी का यह मंदिर 5000 साल से भी पुराना मंदिर है! यहाँ माता चंडी जी महिषासुर का संहार कर के उनके ऊपर खड़ी है ! कहा जाता है की एक साधु जंगल में तपस्या करा करते थे! यहाँ भगवती का प्रगट स्थान देखकर माता की सेवा में लग गए ! तपस्या और पूजा करने लग गए ! और घास, मिट्टी, पत्थर से माता का छोटा मंदिर बना दिया. तभी से यहाँ लोग माथा टेकने लगे और उनकी मनोकामना पूरी होने लगी ! समय बीतने पर 12 साल के बनवास के समय पांडवो ने घूमते हुए देखा यहाँ चंडी माता का प्रगटवास है ! तो अर्जुन ने यहाँ माता की तपस्या की ओर माता ने उसको खुश होकर तलवार व जीत का वरदान दिया ओर यही से वे कुरुक्षेत्र गए और उनकी जीत हुई! समय बीतने पर ये जगह मनीमाजरा की रिहासत में आ गयी ! समय बीतने पर भारत के पहले राष्ट्पति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और श्रीमान करडू और सी पी एन सिंह जी बिहार के राजा और पंजाब के गवर्नर थे! ओर वे 1953 में यहाँ आये ओर उन्होंने मंदिर का इतिहास जाना ओर पंडित जी बोला की हम चण्डीमाता के नाम पर एक गाँव बसाना चाहते है. तभी माता के नाम पर चंडीगढ़ गाँव बना. इस तरह काली माता के नाम पर कालका, पांच पांडवो के नाम पंचपुरी से पंचपुरा जो की अब पिंजौर के नाम से जाना जाता है !





Know the history of Chandigarh city from browsing temple


This temple of Mata Mandir is more than 5000 years old! Here the parents kill Mahishasura and stand on him! It is said that a monk used to do penance in the forest! Seeing the manifestation of Bhagwati here, she started serving Goddess! Went to penance and worship And the small temple of Mother was built with grass, mud, stone. Only from here people started bowing their foreheads and their wish was fulfilled! As time passed, at the time of 12 years of exile, Pandavas wandered and saw the manifestation of the parents. So Arjuna, towards the penance of the parents here, pleased the mother and gave him a boon of talent and victory and from that he went to Kurukshetra and he won! With the passage of time, this place came under the release of Manimajra! As time passed the first President of India, Dr. Rajendra Prasad and Mr. Kardu and CPN Singh ji were the King of Bihar and the Governor of Punjab! And he came here in 1953 and he learned the history of the temple and Panditji said that we want to establish a village in the name of Chandimata. Chandigarh village was formed only in the name of mother. In this way, Kalka in the name of Kali Mata, Panchpura from Panchpuri to the name of five Pandavas, which is now known as Sankataur!

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