जानिए चूड़धार पर्वत के इतिहास, जुड़ी मान्यताएं तथा पर्यटन की संभावनाओं के बारे में-Know about the history of Churdhar mountain, associated beliefs and tourism prospects - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Tuesday, 28 April 2020

जानिए चूड़धार पर्वत के इतिहास, जुड़ी मान्यताएं तथा पर्यटन की संभावनाओं के बारे में-Know about the history of Churdhar mountain, associated beliefs and tourism prospects



चूड़धार पर्वत हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित है। चूड़धार पर्वत समुद्र तल से 11965 फीट(3647 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है । यह पर्वत सिरमौर जिले और बाहय हिमालय(Outer Himalayas) की सबसे ऊंची चोटी है।


सिरमौर ,चौपाल ,शिमला, सोलन उत्तराखंड के कुछ सीमावर्ती इलाकों के लोग इस पर्वत में धार्मिक आस्था रखते हैं। चूड़धार को श्री शिरगुल महाराज का स्थान माना जाता है। यहां शिरगुल महाराज का मंदिर भी स्थित है। शिरगुल महाराज सिरमौर व चौपाल के देवता है।
 चूड़धार कैसे पहुंचा जाए ?
चूड़धार पर्वत तक पहुंचने के दो रास्ते हैं।
मुख्य रास्ता नौराधार से होकर जाता है तथा यहां से चूड़धार 14 किलोमीटर है। दूसरा रास्ता सराहन चौपाल से होकर गुजरता है। यहां से चूड़धार 6 किलोमीटर है।
मंदिर से जुड़ी मान्यता

इस मंदिर के बनने के पीछे एक पुराणिक कहानी जुड़ी है‌। मान्यता है कि एक बार चूरू नाम का शिव भक्त, अपने पुत्र के साथ इस मंदिर में दर्शन के लिए आया था । उसी समय अचानक बड़े-बड़े पत्थरो के बीच से एक बहुत बड़ा सांप बाहर आ गया । चूरु और उसके बेटे को मारने के लिए सांप उनकी तरफ दौड़ा। उन्होंने अपने प्राणों की रक्षा के लिए भगवान शिव से प्रार्थना की। भगवान शिव के चमत्कार से विशालकाय पत्थरो का एक हिस्सा उस सांप पर जा गिरा,जिससे वह सांप वही मर गया और चूरु तथा उसके पुत्र के प्राण बच गए। कहा जाता है की उसके बाद से ही यहां का नाम चूड़धार पड़ा और लोगों की श्रद्धा इस मंदिर में और अधिक बढ़ गई और यहां के लिए धार्मिक यात्राएं शुरू हुई। एक बहुत बड़ी चट्टान को चूरु का पत्थर भी कहा जाता है जिससे धार्मिक आस्था जुड़ी है‌।
यह भी कहा जाता है कि चूड़धार पर्वत के साथ लगते क्षेत्र मे हनुमान जी को संजीवनी बूटी मिली थी। सर्दियों और बरसात के मौसम में यहां जमकर बर्फबारी होती है। यह चोटी वर्ष के ज्यादातर समय बर्फ से ढकी रहती है।

चूड़धार पर्वत का उल्लेख जॉन केय द्वारा पुस्तक, द ग्रेट आर्क में किया गया है, जिसमें इसे ‘द चूर‘ कहा गया है। इस चोटी से ही जॉर्ज एवरेस्ट ने 1834 के आसपास हिमालय पर्वतों के कई खगोलीय आंकड़े जमा किए। उस समय वह भारत के सर्वेक्षक जनरल थे। मालूम हो कि माउंट एवरेस्ट को अपना नाम जॉर्ज एवरेस्ट से ही मिला है
पर्यटन की संभावनाएं

हर साल गर्मियों के दिनों में चूड़धार की यात्रा शुरू हो जाती है। यह चोटी ट्रैकिंग के लिए बेहद ही उपयुक्त है । परंतु यह चोटी दुर्गम तथा कम प्रचलित होने के कारण बाहरी पर्वतारोहियों के बीच में उतनी महत्वपूर्ण जगह नहीं बना पाई है। धीरे-धीरे बदलाव आना शुरू हो गया है क्योंकि यहां ट्रैकिंग की अपार संभावनाएं हैं।



Chudhar Parvat is located in Sirmaur district of Himachal Pradesh. The Churdhar mountain is situated at an elevation of 11965 feet (3647 m) above sea level. This mountain is the highest peak of Sirmaur district and Outer Himalayas.

People from Sirmour, Chaupal, Shimla, Solan and some border areas of Uttarakhand have religious faith in this mountain. Chudhar is considered to be the place of Shri Shirgul Maharaj. The temple of Shirgul Maharaj is also located here. Shirgul Maharaj is the deity of Sirmour and Chaupal.

 How to reach Chudhar?

There are two ways to reach Chudhar mountain.
The main road passes through Nauradhar and Chudhar is 14 kilometers from here. The second route passes through Sarahan Chaupal. Chaudhar is 6 kilometers from here.

Temple affiliation



There is a Puranic story behind the construction of this temple. It is believed that once a Shiva devotee named Churu came with his son to visit this temple. At the same time, suddenly a huge snake came out from among the big stones. The snake ran towards them to kill Churu and his son. He prayed to Lord Shiva to protect his life. Due to the miracle of Lord Shiva, a part of the giant stone fell on the snake, from which that snake died and the life of Churu and his son were saved. It is said that since then, the name here was called Chudhar and the reverence of the people grew more in this temple and religious journeys started here. A very large rock is also called the stone of Churu to which religious belief is attached.

It is also said that Hanuman ji got Sanjeevani herb in the area adjoining Chudhar mountain. It receives heavy snowfall during the winter and rainy seasons. This peak is covered with snow for most of the year.



The Churdhar mountain is mentioned by John Kaye in the book, The Great Arch, in which it is called 'The Chur'. From this peak itself, George Everest collected many astronomical figures of the Himalayan mountains around 1834. At that time he was the Surveyor General of India. It is known that Mount Everest got its name from George Everest itself.

Tourism prospects



Every year, the journey to Churdhar starts during summer. It is very suitable for peak tracking. But this peak, due to being inaccessible and less prevalent, has not been able to make such an important place among outdoor climbers. Changes have started coming in gradually as there is immense scope of tracking here.

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