Laxman of Kali Yuga-कलियुग का लक्ष्मण - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Tuesday, 28 April 2020

Laxman of Kali Yuga-कलियुग का लक्ष्मण



" भैया, परसों नये मकान पे हवन है। छुट्टी (इतवार) का दिन है। आप सभी को आना है, मैं गाड़ी भेज दूँगा।" छोटे भाई लक्ष्मण ने बड़े भाई भरत से मोबाईल पर बात करते हुए कहा।
" क्या छोटे, किराये के किसी दूसरे मकान में शिफ्ट हो रहे हो ?"
" नहीं भैया, ये अपना मकान है, किराये का नहीं ।"
" अपना मकान", भरपूर आश्चर्य के साथ भरत के मुँह से निकला।
"छोटे तूने बताया भी नहीं कि तूने अपना मकान ले लिया है।"
" बस भैया ", कहते हुए लक्ष्मण ने फोन काट दिया।
" अपना मकान" , " बस भैया " ये शब्द भरत के दिमाग़ में हथौड़े की तरह बज रहे थे।
भरत और लक्ष्मण दो सगे भाई और उन दोनों में उम्र का अंतर था करीब पन्द्रह साल। लक्ष्मण जब करीब सात साल का था तभी उनके माँ-बाप की एक दुर्घटना में मौत हो गयी। अब लक्ष्मण के पालन-पोषण की सारी जिम्मेदारी भरत पर थी। इस चक्कर में उसने जल्द ही शादी कर ली कि जिससे लक्ष्मण की देख-रेख ठीक से हो जाये।
प्राईवेट कम्पनी में क्लर्क का काम करते भरत की तनख़्वाह का बड़ा हिस्सा दो कमरे के किराये के मकान और लक्ष्मण की पढ़ाई व रहन-सहन में खर्च हो जाता। इस चक्कर में शादी के कई साल बाद तक भी भरत ने बच्चे पैदा नहीं किये। जितना बड़ा परिवार उतना ज्यादा खर्चा।
पढ़ाई पूरी होते ही लक्ष्मण की नौकरी एक अच्छी कम्पनी में लग गयी और फिर जल्द शादी भी हो गयी। बड़े भाई के साथ रहने की जगह कम पड़ने के कारण उसने एक दूसरा किराये का मकान ले लिया। वैसे भी अब भरत के पास भी दो बच्चे थे, लड़की बड़ी और लड़का छोटा।
मकान लेने की बात जब भरत ने अपनी बीबी को बताई तो उसकी आँखों में आँसू आ गये। वो बोली, " देवर जी के लिये हमने क्या नहीं किया। कभी अपने बच्चों को बढ़िया नहीं पहनाया। कभी घर में महँगी सब्जी या महँगे फल नहीं आये। दुःख इस बात का नहीं कि उन्होंने अपना मकान ले लिया, दुःख इस बात का है कि ये बात उन्होंने हम से छिपा के रखी।"
इतवार की सुबह लक्ष्मण द्वारा भेजी गाड़ी, भरत के परिवार को लेकर एक सुन्दर से मकान के आगे खड़ी हो गयी। मकान को देखकर भरत के मन में एक हूक सी उठी। मकान बाहर से जितना सुन्दर था अन्दर उससे भी ज्यादा सुन्दर। हर तरह की सुख-सुविधा का पूरा इन्तजाम। उस मकान के दो एक जैसे हिस्से देखकर भरत ने मन ही मन कहा, " देखो छोटे को अपने दोनों लड़कों की कितनी चिन्ता है। दोनों के लिये अभी से एक जैसे दो हिस्से (portion) तैयार कराये हैं। पूरा मकान सवा-डेढ़ करोड़ रूपयों से कम नहीं होगा। और एक मैं हूँ, जिसके पास जवान बेटी की शादी के लिये लाख-दो लाख रूपयों का इन्तजाम भी नहीं है।"
मकान देखते समय भरत की आँखों में आँसू थे जिन्हें उन्होंने बड़ी मुश्किल से बाहर आने से रोका।
तभी पण्डित जी ने आवाज लगाई, " हवन का समय हो रहा है, मकान के स्वामी हवन के लिये अग्नि-कुण्ड के सामने बैठें।"
लक्ष्मण के दोस्तों ने कहा, " पण्डित जी तुम्हें बुला रहे हैं।"
यह सुन लक्ष्मण बोले, " इस मकान का स्वामी मैं अकेला नहीं, मेरे बड़े भाई भरत भी हैं। आज मैं जो भी हूँ सिर्फ और सिर्फ इनकी बदौलत। इस मकान के दो हिस्से हैं, एक उनका और एक मेरा।"
हवन कुण्ड के सामने बैठते समय लक्ष्मण ने भरत के कान में फुसफुसाते हुए कहा, " भैया, बिटिया की शादी की चिन्ता बिल्कुल न करना। उसकी शादी हम दोनों मिलकर करेंगे ।"
पूरे हवन के दौरान भरत अपनी आँखों से बहते पानी को पोंछ रहे थे, जबकि हवन की अग्नि में धुँए का नामोनिशान न था ।
*भरत जैसे आज भी*
*मिल जाते हैं इन्सान*
*पर लक्ष्मण जैसे बिरले ही*
*मिलते इस जहान

Laxman of Kali Yuga

"Brother, day after tomorrow there is havan on the new house. It's a holiday (Sunday) day. You all have to come, I will send the car." Younger brother Laxman said talking to elder brother Bharat on mobile.
"Are you shifting to a small, rented house?"
"No brother, this is your house, not a rent."
"Apna Ghar", came out of Bharata's mouth with sheer surprise.
"Little did you say that you have taken your house."
Laxman disconnected the phone, saying "bus brother".
The words "Apna Makan", "Bas Bhaiya" were ringing in Bharat's mind like a hammer.
Bharat and Lakshman were two real brothers and the age difference between them was about fifteen years. When Laxman was about seven years old, his parents died in an accident. Now Bharata had all the responsibility for the maintenance of Lakshmana. In this affair, he got married soon so that Laxman could be looked after properly.
While working as a clerk in a private company, a large part of India's salary would have been spent in a two-room rented house and Lakshman's education and living. In this affair, even after many years of marriage, Bharat did not produce children. The larger the family, the more the cost.
On completion of studies, Laxman got a job in a good company and then got married soon. Due to shortage of living space with elder brother, he took a second rented house. Anyway, now Bharata also had two children, a girl elder and a boy younger.
When Bharat told his wife about taking the house, she was in tears. She said, "What have we not done for Devar ji. Never dressed my children well. Never have expensive vegetables or expensive fruits come into the house. Sadness is not that they took their house, sadness is that They kept this thing hidden from us. "
On Sunday morning, the car sent by Lakshman, with Bharata's family, stood in front of a beautiful house. Seeing the house, a hook arose in Bharata's mind. The house was more beautiful on the outside than it was beautiful inside. Complete arrangement of all kinds of comforts. Seeing the two identical parts of the house, Bharat said in his heart, "Look how much Chote is concerned about his two boys. We have already prepared two equal parts for both of them. The whole house is worth Rs 125 crore It will not be less than that. And I am the one who does not even have the arrangement of lakhs or two lakhs for the marriage of a young daughter. "
While looking at the house, Bharat had tears in his eyes which he prevented from coming out with great difficulty.
Then Pandit ji said, "It is time for Havan, the lord of the house should sit in front of the fire pit for Havan."
Laxman's friends said, "Panditji is calling you."
Hearing this, Lakshman said, "I am not alone the owner of this house, my elder brother Bharat is also. Whoever I am today only and only because of him. There are two parts of this house, one is his and one is mine."
While sitting in front of the Havan Kund, Lakshmana whispered in Bharata's ear, "Brother, don't worry about the daughter's wedding at all. We will get married together."
Throughout the Havan, Bharata was wiping the water flowing from his eyes, while the fire of the Havan had no sign of smoke.
* Like Bharat even today *
* Humans get *
* But rarely like Laxman *
* See you this world *

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