Love Kush was born at this place, Amritsar-इस स्थान पर हुआ था लव कुश का जन्म, अमृतसर - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Tuesday, 28 April 2020

Love Kush was born at this place, Amritsar-इस स्थान पर हुआ था लव कुश का जन्म, अमृतसर





उत्तरी भारत में पंजाब राज्य में अमृतसर से 11 किमी दूर अमृतसर-चोगावा रोड पर प्राचीन व ऐतिहासिक धार्मिक स्थल 'श्री राम तीर्थ मंदिर' स्थित है। यह मंदिर भगवान् राम को समर्पित है। न केवल इस मंदिर का, अपितु इस पावन स्थली का भी इतिहास रामायण काल से जुड़ा है।
यहाँ महर्षि वाल्मीकि का आश्रम और एक कुटी (झोपड़ी) स्थित है। ऐसी मान्यता है कि श्री राम द्वारा माता सीता का परित्याग करने के पश्चात् ऋषि वाल्मीकि ने उन्हें इसी स्थान पर अपने आश्रम में आश्रय दिया था। तब माता सीता ने यहाँ इस कुटी में ही निवास किया था, इसी कारण इसे माता सीता की आश्रयी स्थली भी कहा जाता है। यहीं पर लव और कुश का जन्म हुआ था। महर्षि वाल्मीकि ने रामायण की रचना भी यहीं की थी। इसी आश्रम में उन्होंने लव और कुश को शस्त्र चलाने की शिक्षा भी दी थी। जब श्री राम ने अश्वमेध यज्ञ के लिए घोड़ा छोड़ा था, तब इसी स्थान पर लव-कुश ने उस घोड़े को पकड़ा था और श्री राम के साथ युद्ध भी किया था।

The ancient and historic religious site 'Sri Ram Teertha Temple' is located on the Amritsar-Chogawa road, 11 km from Amritsar in the state of Punjab in northern India. This temple is dedicated to Lord Rama. Not only this temple, but also the history of this sacred place is associated with the Ramayana period.

Maharishi Valmiki's ashram and a kuti (hut) are located here. It is believed that sage Valmiki sheltered him in his ashram at this place after Sri Rama abandoned mother Sita. Mata Sita then resided here in this hut, that is why it is also called as the sheltered site of Mata Sita. It was here that Luv and Kush were born. Maharishi Valmiki also composed the Ramayana here. In this ashram, he also taught Luv and Kush to run weapons. When Sri Rama left the horse for the Ashwamedha Yagna, it was at this place that Luv-Kush caught the horse and also fought with Shri Rama.


इस मंदिर के समीप ही एक सरोवर है, जिसे बहुत पावन माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस सरोवर को हनुमान जी ने खोदकर बनाया था। इस सरोवर की परिधि 3 किमी है और इसके आस-पास अनेक मंदिर बने हुए हैं। दूर-दूर से श्रद्धालु और साधु-संत यहाँ स्नान करने आते हैं। सरोवर के चारों ओर 30 फुट चौड़ा पथ बना हुआ है, सरोवर में स्नान करने के पश्चात् भक्त इस सरोवर की परिक्रमा करते हैं। यहाँ एक प्राचीन बावली भी है, माना जाता है कि सीता माता यहाँ स्नान किया करती थीं। इसे 'माता सीता दी बावली' कहा जाता है। इस बावली में स्नान कर निःसंतान महिलाएं संतान प्राप्ति की प्रार्थना करती हैं।
मंदिर के समीप ही प्राचीन श्री रामचंद्र मंदिर, जगन्नाथपुरी मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर, राम, लक्ष्मण, सीता मंदिर, महर्षि वाल्मीकि जी का धूना, सीता जी की कुटिया, श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, सीता राम-मिलाप मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल स्थित हैं, जो रामायण की याद दिलाते हैं। बेघर लोग इस मंदिर में आकर ईंटों के छोटे-छोटे घर बनाकर मन्नत मांगते हैं कि हमें अपने घर की प्राप्ति हो।
 
  

There is a lake near this temple, which is considered very holy. It is believed that this lake was built by Hanuman ji. The periphery of this lake is 3 km and many temples are built around it. Devotees and saints from far and wide come to bathe here. A 30-foot wide path is built around the lake, after bathing in the lake, devotees revolve around this lake. There is also an ancient Baoli here, it is believed that Sita Mata used to bathe here. It is called 'Mata Sita Di Baoli'. In this baoli, bathless women pray for childless children.
Major shrines are located near the temple like ancient Shri Ramchandra temple, Jagannathpuri temple, Radha-Krishna temple, Ram, Laxman, Sita temple, Maharishi Valmiki ji's dhuna, Sita ji's hut, Shri Lakshmi Narayan temple, Sita Ram-Milap temple Are, which remind of Ramayana. Homeless people come to this temple and build a small house of bricks and ask for a vow that we should get our house.

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