बरमानी, बरमानी मंदिर, माँ ब्रह्माणी देवी मंदिर (Maa Brahmani Temple) - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Tuesday, 28 April 2020

बरमानी, बरमानी मंदिर, माँ ब्रह्माणी देवी मंदिर (Maa Brahmani Temple)



इटावा, फिरोजाबाद, आगरा, भिण्ड, ग्वालियर, मैनपुरी, औरैया जनपद एवं अन्य आस-पास के क्षेत्र की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है यह सिद्धपीठ माँ ब्रह्माणी देवी मंदिर, यह जगह/मंदिर/ क्षेत्र स्वयं में ही बरमानी नाम से ही प्रसिद्ध है। मंदिर के गर्भग्रह का निर्माण बीसा यंत्र के साथ स्वयं आदि शिल्पी विश्वकर्मा जी ने द्वादश/12 द्वार तथा नौ ग्रहों की स्थापना के साथ निर्मित किया था। मंदिर क्षेत्र के आस-पास नौ कुएँ भी स्थापित हैं।

ऐसी मान्यता है कि यमुना नदी के पार्श्व में जसवंतनगर के बीहड़ों के बीच स्थित यह मंदिर आदिकालीन शक्ति पूजा का स्मरण कराता है। मंदिर की स्थापना के संबंध में विभिन्न मत हैं।

प्रचलित कहानी के अनुसार: महाराजा भदावर माता ब्रह्माणी को म्यांमार / बर्मा देश से एक शर्त पर लेकर आये थे। शर्त ये थी जिस जगह तुमने पीछे मुड़कर देखा में वही रुक जाऊंगी इसी जगह पर आकर राजा को एक आवाज सुनाई दी तो राजा ने पीछे मुड़कर देखा तो माता की मूर्ती ने विशाल रूप धारण कर लिया, और शर्त के अनुसार मंदिर का निर्माण महाराजा भदावर ने करवाया था। भदावर के राजा द्वारा मंदिर की स्थापना लगभग सन् 1500 के आस-पास हुई थी। आज भी भदावर क्षेत्र का शाही परिवार माता को अपनी कुल देवी मानता है, तथा समय-समय पर पूजा अर्चना करने आता रहिता है।

हिंदू कैलेंडर के अनुसार वर्ष में 3 बार चैत्र, अषाढ़, तथा अश्विन/क्वार के महीनों में मंदिर पर हर्षोल्लास एवं शांति के साथ विशाल मेले का आयोजन होता है। मुख्यतया चैत्र नवरात्रि में यहां अधिक भीड़ होती है। मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं माता के दर्शन करने आते हैं। माता ब्रह्माणी की कृपा से हज़ारों की संख्या में झंडा/नेजा चढ़ाए जाते हैं। पुलिस प्रशासन भी मेले की सुरक्षा हेतु सी सी टीवी कैमरे तथा अतिरिक्त सुरक्षा बल की मदद से पूरे मेले पर नजर रखता हैं।

वर्तमान में, मंदिर प्रांगण के साथ भगवान शिव तथा श्री हनुमंत लाल का मंदिर भी स्थापित है। भक्त माता के दर्शन हेतु विभिन्न प्रकार से माँ की पूजा-अर्चना करते हैं। कई बार लेट-लेट कर, तो कई बार किलोमीटर दूर पैदल चलकर देवी माँ को प्रसन्न करते हैं।

Barmani, Barmani Temple, Maa Brahmani Temple

It is the largest center of faith of Etawah, Firozabad, Agra, Bhind, Gwalior, Mainpuri, Auraiya district and other surrounding areas. This Siddhpeeth Maa Brahmani Devi Temple, this place / temple / area itself is famous by the name Barmani. . The temple's garbhagriha was constructed by Adi Shilpi Vishwakarma ji with the installation of Dwadash / 12 gates and nine planets with a Bisa Yantra. Nine wells are also located around the temple area.

It is believed that this temple situated amidst the ravines of Jaswantnagar on the banks of river Yamuna, commemorates the ancient Shakti Puja. There are various views regarding the establishment of the temple.

According to the prevailing story: Maharaja Bhadawar brought Mata Brahmani from the Myanmar / Burma country on one condition. The condition was that in the place you looked back, you will stop at the same place and you heard a voice coming to the king, then when the king looked back, the idol of the mother took a huge form, and according to the condition the temple was built by Maharaja Bhadavar. Had it done. The temple was founded around 1500 AD by the king of Bhadavar. Even today, the royal family of Bhadavar region considers mother as its total goddess, and comes to offer prayers from time to time.

According to the Hindu calendar, a huge fair is held 3 times a year in the months of Chaitra, Ashadh, and Ashwin / Quar with joy and peace at the temple. Mainly in Chaitra Navratri, it is more crowded. Lakhs of devotees come to see the mother in the fair. Thousands of flags / nejas are offered by the grace of Goddess Brahma. The police administration also monitors the entire fair with the help of CC TV cameras and additional security force to protect the fair.

At present, the temple of Lord Shiva and Shree Hanumant Lal is also established along with the temple courtyard. Devotees worship the mother in various ways to see the mother. Sometimes lately, and sometimes walking kilometers away, she pleases the Mother Goddess.

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