इस मंदिर का चरणामृत पीने से दूर होता है किसी भी सांप का विष(Nagni Mata Temple, Himcal Pardesh) - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Tuesday, 28 April 2020

इस मंदिर का चरणामृत पीने से दूर होता है किसी भी सांप का विष(Nagni Mata Temple, Himcal Pardesh)





हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में एक 'नागणी माता' का मंदिर है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इंसान को चाहे कितने भी जहरीले सांप ने क्यों न काटा हो इस मंदिर से निकलने वाली जलधारा को पीने से वह सही हो जाता है। सांप के काटने का इलाज होने के नाते भक्तों के बीच यह मंदिर काफी प्रसिद्ध है। लोग काफी दूर-दूर से यहां अपना इलाज कराने आते है।

 
यह नागणी माता का मंदिर पठानकोट-मनाली सड़क पर नूरपुर से आठ किलोमीटर देर भड़वार गांव के साथ लगता एक छोटा सा गांव है जो आज केवल 'नागणी माता' के नाम से ही प्रसिद्व है। यहां नागणी माता का एक भव्य मंदिर है। यहां एक पवित्र जलधारी निकलती है। बताया जाता है कि सदियों से सांप के काटे जाने पर इस देवस्थल में प्रस्फुटित जलधारा के पानी पीने से उपचार होता है। कितने भी जहरीले सांप का काटा हो यदि जीवित मंदिर तक पहुंचा जाए तो वह कदापि नहीं मरता। यह सारा चमत्कार नागणी मां की निकलने वाली जलधारा के पानी का माना जाता है जिसे पीने से इंसान स्वस्थ हो जाता है।

 
सांप द्वारा काटा गया कोई भी व्यक्ति नागणी के मंदिर से तब तक वापिस नहीं जा सकता जब तक कि पुजारी आज्ञा प्रदान न करे। इसमें से कुछ एक रोगी अपने आप को ठीक समझ कर पुजारी के बिना आज्ञा से घर चले जाते हैं परन्तु उन्हें घर पहुंचने से पहले ही सांप के जहर का असर दिखाई देने लगता है और शरीर में सूजन आने लगती है। रोगी के ठीक होने से आमतौर पर महीना या दो महीनें भी लगते है। कुछ तो एक सप्ताह से भी कम समय में ठीक होकर अपने घर चले जाते हैं।

 
मंदिर कमेटी के अध्यक्ष बलवीर सेन ने नागणी मंदिर ज्ञानरथ नाम की एक किताब लिखी है जिसमें उन्होंने नागणी माता को देवी सुरसा कहा गया है जिसका उल्लेख तुलसीदास ने रामायण में किया है, जिसके अनुसार सुरसा को सर्पों की माता बताया गया है। इस मंदिर में हर शनिवार और मंगलवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है। सावन के महीने में यहां हर साल मेला लगता है। 

इस मंदिर का चरणामृत पीने से दूर होता है किसी भी सांप का विष(Nagni Mata Temple, Himcal Pardesh)

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में एक 'नागणी माता' का मंदिर है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इंसान को चाहे कितने भी जहरीले सांप ने क्यों न काटा हो इस मंदिर से निकलने वाली जलधारा को पीने से वह सही हो जाता है। सांप के काटने का इलाज होने के नाते भक्तों के बीच यह मंदिर काफी प्रसिद्ध है। लोग काफी दूर-दूर से यहां अपना इलाज कराने आते है।




यह नागणी माता का मंदिर पठानकोट-मनाली सड़क पर नूरपुर से आठ किलोमीटर देर भड़वार गांव के साथ लगता एक छोटा सा गांव है जो आज केवल 'नागणी माता' के नाम से ही प्रसिद्व है। यहां नागणी माता का एक भव्य मंदिर है। यहां एक पवित्र जलधारी निकलती है। बताया जाता है कि सदियों से सांप के काटे जाने पर इस देवस्थल में प्रस्फुटित जलधारा के पानी पीने से उपचार होता है। कितने भी जहरीले सांप का काटा हो यदि जीवित मंदिर तक पहुंचा जाए तो वह कदापि नहीं मरता। यह सारा चमत्कार नागणी मां की निकलने वाली जलधारा के पानी का माना जाता है जिसे पीने से इंसान स्वस्थ हो जाता है।




सांप द्वारा काटा गया कोई भी व्यक्ति नागणी के मंदिर से तब तक वापिस नहीं जा सकता जब तक कि पुजारी आज्ञा प्रदान न करे। इसमें से कुछ एक रोगी अपने आप को ठीक समझ कर पुजारी के बिना आज्ञा से घर चले जाते हैं परन्तु उन्हें घर पहुंचने से पहले ही सांप के जहर का असर दिखाई देने लगता है और शरीर में सूजन आने लगती है। रोगी के ठीक होने से आमतौर पर महीना या दो महीनें भी लगते है। कुछ तो एक सप्ताह से भी कम समय में ठीक होकर अपने घर चले जाते हैं।




मंदिर कमेटी के अध्यक्ष बलवीर सेन ने नागणी मंदिर ज्ञानरथ नाम की एक किताब लिखी है जिसमें उन्होंने नागणी माता को देवी सुरसा कहा गया है जिसका उल्लेख तुलसीदास ने रामायण में किया है, जिसके अनुसार सुरसा को सर्पों की माता बताया गया है। इस मंदिर में हर शनिवार और मंगलवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है। सावन के महीने में यहां हर साल मेला लगता है। 

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