Pavagadh Shaktipeeth, Gujarat-पावागढ़ शक्तिपीठ, गुजरात - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Wednesday, 29 April 2020

Pavagadh Shaktipeeth, Gujarat-पावागढ़ शक्तिपीठ, गुजरात



पंखिड़ा तू उड़ी ने जजे पावागढ़ रे...।
म्हारी महाकाली ने जई ने किजो गरबो रमे रे...।

शक्ति के उपासकों के लिए वेबदुनिया इस बार लेकर आया है गुजरात की ऊंची पहाड़ी पर बसा पावागढ़ मंदिर। काली माता का यह प्रसिद्ध मंदिर मां के शक्तिपीठों में से एक है। शक्तिपीठ उन पूजा स्थलों को कहा जाता है, जहां सती मां के अंग गिरे थे।



पुराणों के अनुसार पिता दक्ष के यज्ञ में अपमानित हुई सती ने योगबल द्वारा अपने प्राण त्याग दिए थे। सती की मृत्यु से व्यथित शिवशंकर उनके मृत शरीर को लेकर तांडव करते हुए ब्रह्मांड में भटकते रहे। इस समय मां के अंग जहां-जहां गिरे वहीं शक्तिपीठ बन गए। माना जाता है कि पावागढ़ में मां के वक्षस्थल गिरे थे।

जगतजननी के स्तन गिरने के कारण इस जगह को बेहद पूजनीय और पवित्र माना जाता है। यहां की एक खास बात यह भी है कि यहां दक्षिण मुखी काली मां की मूर्ति है, जिसकी दक्षिण रीति अर्थात तांत्रिक पूजा की जाती है।

इस पहाड़ी को गुरु विश्वामित्र से भी जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि गुरु विश्वामित्र ने यहां काली मां की तपस्या की थी। यह भी माना जाता है कि काली मां की मूर्ति को विश्वामित्र ने ही प्रतिष्ठित किया था। यहां बहने वाली नदी का नामाकरण भी उन्हीं के नाम पर ‘विश्वामित्री’ किया गया है।

इसी तरह पावागढ़ के नाम के पीछे भी एक कहानी है। कहा जाता है कि इस दुर्गम पर्वत पर चढ़ाई लगभग असंभव काम था। चारों तरफ खाइयों से घिरे होने के कारण यहां हवा का वेग भी चहुंतरफा था, इसलिए इसे पावागढ़ अर्थात ऐसी जगह कहा गया जहां पवन का वास हो। 

यह मंदिर गुजरात की प्राचीन राजधानी चंपारण के पास स्थित है, जो वडोदरा शहर से लगभग 50 किलोमीटर दूर है। पावागढ़ मंदिर ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। काफी ऊंचाई पर बने इस दुर्गम मंदिर की चढ़ाई बेहद कठिन है। अब सरकार ने यहां रोप-वे सुविधा उपलब्ध करवा दी है, जिसके जरिये आप पहाड़ी तक आसानी से पहुंच सकते हैं। यह सुविधा माछी से शुरू होती है। यहां से रोप-वे लेकर श्रद्धालु पावागढ़ पहाड़ी के ऊपरी हिस्से तक पहुंचते हैं। रोप-वे से उतरने के बाद आपको लगभग 250 सीढ़ियां चढ़ना होंगी, तब जाकर आप मंदिर के मुख्य द्वार तक पहुंचेंगे। 

नवरात्र के समय इस मंदिर में श्रद्धालुओं की खासी भीड़ उमड़ती है। लोगों की यहां गहरी आस्था है। उनका मानना है कि यहां दर्शन करने के बाद मां उनकी हर मुराद पूरी कर देती है।



कैसे जाएं- 
वायुमार्ग : यहां से सबसे नजदीक अहमदाबाद का एयरपोर्ट है, जिसकी यहां से दूरी लगभग 190 किलोमीटर और वडोदरा से 50 किलोमीटर है।
रेलमार्ग: यहां का नजदीकी बड़ा रेलवे स्टेशन वडोदरा में है जो कि दिल्ली और अहमदाबाद से सीधी रेल लाइनों से जुड़ा हुआ है। वडोदरा पहुंचने के बाद सड़क यातायात के सुलभ साधन उपलब्ध हैं।
सड़क मार्ग: प्रदेश सरकार और निजी कंपनियों की कई लक्जरी बसें और टैक्सी सेवा गुजरात के अनेक शहरों से यहां के लिए संचालित की जाती है।





For the worshipers of Shakti, Webdunia has brought this time the Pavagadh temple situated on the high hill of Gujarat. This famous temple of Kali Mata is one of the Shaktipeeths of Mother. Shaktipeeth is said to be the places of worship where Sati Maa's limbs fell.

According to the Puranas, Sati, who was humiliated in the Yajna of Father Daksha, gave up his life by the power of yoga. Shiva Shankar, distressed by Sati's death, wandered into the universe, disregarding his dead body. At this time, wherever the parts of the mother fell, they became Shaktipeeth. It is believed that the mother's chest fell in Pavagadh.

This place is considered very revered and sacred due to Jagatjanani's breast fall. There is also a special thing here that there is an idol of Dakshin Mukhi Kali Maa, which is worshiped in the South ie Tantric worship.

This hill is also associated with Guru Vishwamitra. It is said that Guru Vishwamitra did penance of Kali Maa here. It is also believed that the idol of Kali Maa was revered by Vishwamitra. The river flowing here has also been named 'Vishwamitri' after him.

Similarly, there is a story behind the name of Pavagadh. It is said that climbing this inaccessible mountain was an almost impossible task. Due to being surrounded by trenches all around, the velocity of wind was also different, so it was called Pavagadh i.e. the place where the wind resides.

The temple is located near the ancient capital of Gujarat, Champaran, which is about 50 km from Vadodara city. The Pavagadh temple is situated on a high hilltop. The climb of this inaccessible temple built at a very high altitude is extremely difficult. Now the government has provided rope-way facility here, through which you can easily reach the hill. This facility starts from Machhi. From here, devotees reach the upper part of the Pavagadh hill by taking a ropeway. After descending from the ropeway, you have to climb about 250 steps, then you will reach the main gate of the temple.

A large crowd of devotees throng this temple during Navratri. People have deep faith here. They believe that after visiting here, the mother fulfills their every wish.



how to go-
Airways: The nearest airport is Ahmedabad Airport, which is about 190 kilometers from here and 50 kilometers from Vadodara.
Railroad: The nearest major railway station here is in Vadodara which is connected by direct rail lines to Delhi and Ahmedabad. After reaching Vadodara, accessible means of road traffic are available.

By Road: Many luxury buses and taxi services of the state government and private companies are operated from many cities of Gujarat.

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