रावण और कुंभकरण ने लिए थे तीन जन्म-Ravana and Kumbhakaran took three births - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Tuesday, 28 April 2020

रावण और कुंभकरण ने लिए थे तीन जन्म-Ravana and Kumbhakaran took three births

रावण और कुंभकरण ने लिए थे तीन जन्म,


इस दुनिया में रावण या कुंभकरण नाम का कभी कोई दूसरा नहीं हुआ। राजाधिराज लंकाधिपति महाराज रावण को 'दशानन' भी कहते हैं। कहा जाता है कि रावण लंका का तमिल राजा था। रावण एक कुशल राजनीतिज्ञ, सेनापति और वास्तुकला का मर्मज्ञ होने के साथ-साथ ब्रह्मज्ञानी व बहुविद्याओं का जानकार था। उसे 'मायावी' इसलिए कहा जाता था क्योंकि वह इन्द्रजाल, तंत्र, सम्मोहन और तरह-तरह के जादू जानता था। उसके पास एक ऐसा विमान भी था, जो अन्य किसी के पास नहीं था। इस सभी के कारण सभी उससे भयभीत रहते थे। 


कौन था रावण व कुंभकरण

मान्यता के अनुसार रावण  अपने पूर्व जन्म में विष्णु के द्वारपाल थे। एक पौराणिक कथा के मुताबिक एक बार भगवान विष्णु के दर्शन के लिए सनक, सनंदन आदि ऋषि विष्णुलोक पधारे, परंतु भगवान विष्णु के द्वारपाल जय और विजय ने उन्हें द्वार पर ही रोककर अंदर जाने से मना कर दिया। उनका कहना था कि अभी भगवान के विश्राम का समय है।  
इस बात पर ऋषियों ने क्रोध में आकर जय व विजय को शाप दे दिया कि 'जाओ तुम राक्षस हो जाओ।' बाद में जय और विजय ने ऋषियों से अपने अपराध के लिए क्षमा मांगी। भगवान विष्णु ने भी ऋषियों से क्षमा करने को कहा। तब ऋषियों ने कहा कि हमारा शाप खाली नहीं जा सकता। हां, इसमें यह परिवर्तन हो सकता है कि तुम हमेशा के लिए राक्षस नहीं रहोगे, लेकिन 3 जन्मों तक तो तुम्हें राक्षस योनि में रहना ही होगा और उसके बाद तुम पुन: इस पद पर प्रतिष्ठित हो सकोगे। लेकिन इसके साथ एक और शर्त यह है कि भगवान विष्णु या उनके किसी अवतारी-स्वरूप के हाथों तुम्हारा मरना अनिवार्य होगा।  वहीं कुछ जानकारों का कहना है इस दौरान ऋषियों ने यह भी कहा यदि तुम अपने जन्मों के दौरान विष्णु भक्त बने तो तुम्हें पांच जन्म लेने होंगे,वहीं यदि तुम विष्णु विरोधी बने तो तुम तीन जन्मों के बाद ही अपना स्थान वापस पा सकोगे।
इस शाप के चलते भगवान विष्णु के इन द्वारपालों ने सतयुग में अपने पहले जन्म में हिरण्याक्ष (विजय)व हिरण्यकशिपु(जय) राक्षसों के रूप में जन्म लिया। हिरण्याक्ष राक्षस बहुत शक्तिशाली था। उसके कारण पृथ्वी पाताल-लोक में डूब गई थी। 
पृथ्वी को जल से बाहर निकालने के लिए भगवान विष्णु को वराह अवतार धारण करना पड़ा। इस अवतार में उन्होंने धरती पर से जल को हटाने के अथक कार्य किया। उनके इस कार्य में बार-बार हिरण्याक्ष विघ्न डालता था, अत: अंत में श्रीविष्णु ने हिरण्याक्ष का वध कर दिया। उसके बाद धरती पुन: मनुष्यों के रहने लायक स्थान बन गई।  
हिरण्याक्ष का भाई हिरण्यकशिपु भी ताकतवर राक्षस था और उसने तप करके ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया था। वह जानता था कि इस वरदान के चलते मुझे कोई न आकाश में मार सकता है और न पाताल में। न दिन में और न रात में। न कोई देव, न राक्षस और न मनुष्य मार सकता है तो फिर चिंता किस बात की? यही सोचकर उसने खुद को ईश्वर घोषित कर दिया था।  
भगवान विष्णु द्वारा अपने भाई हिरण्याक्ष का वध करने के कारण वह विष्णु विरोधी हो गया, लेकिन जब उसे पता चला कि उसका पुत्र प्रहलाद विष्णुभक्त है तो उसने उसे मरवाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन वह अपने पुत्र को नहीं मार सका। अंत में उसने एक खंभे में लात मारकर प्रहलाद से पूछा- 'यदि तेरा भगवान सभी जगह है तो क्या इस खंभे में भी है?'   खंभे में लात मारते ही खंभे से भगवान विष्णु नृसिंह रूप में प्रकट हुए, जो न देव थे और न राक्षस और न मनुष्य। 
वे अद्र्धमानव और अद्र्धपशु थे। उन्होंने संध्याकाल में हिरण्यकशिपु को अपनी जंघा पर बिठाकर उसका वध कर दिया।  वध होने के बाद ये दोनों भाई त्रेतायुग में रावण(जय) और कुंभकर्ण (विजय) के रूप में पैदा हुए और फिर श्रीविष्णु अवतार भगवान श्रीराम के हाथों मारे गए। अंत में वे तीसरे जन्म में द्वापर युग में दंतवक्त्र (वहीं कुछ लोग इसे कंस बताते हैं(जय)) व शिशुपाल(विजय)  नाम के अनाचारी के रूप में पैदा हुए। 
इन दोनों का भी वध भगवान श्रीकृष्ण के हाथों हुआ।




There was never another name named Ravana or Kumbhakaran in this world. Rajadhiraja Lankadhipati Maharaj Ravana is also called ‘Dashaanan’. It is said that Ravana was the Tamil king of Lanka. Ravana was a skilled politician, commander and penetrator of architecture, as well as a knowledge of theology and polytheism. He was called 'elusive' because he knew Indrajal, Tantra, hypnosis and all kinds of magic. He also had an aircraft that was not owned by anyone else. Because of all this, everyone was afraid of him.

Who was Ravana and Aquarius

According to belief, Ravana was the gatekeeper of Vishnu in his former birth. According to a legend, once the sage Vishnulok came to see the craze, Sanandan, etc. to see Lord Vishnu, but Jai and Vijay, the gatekeepers of Lord Vishnu, stopped him at the door and refused to go inside. He said that it is time for the Lord to rest.



On this, the sages got angry and cursed Jai and Vijay that 'Go you are demons'. Jai and Vijay later apologize to the sages for their crime. Lord Vishnu also asked the sages to forgive. Then the sages said that our curse cannot be emptied. Yes, there can be a change in it that you will not remain a demon forever, but you will have to remain in the demon's vagina for 3 births and after that you will be able to be reputed on this post again. But another condition with this is that it will be mandatory for you to die at the hands of Lord Vishnu or any of his avatar-forms. At the same time some experts say that during this time the sages also said that if you become a Vishnu devotee during your births, then you will have to take five births, while if you become anti-Vishnu, then you will be able to regain your place only after three births.
Due to this curse, these gatekeepers of Lord Vishnu were born as demons Hiranyaksha (Vijay) and Hiranyakashipu (Jai) in their first birth in Satyuga. Hiranyaksha demon was very powerful. Due to that, the earth was drowned in hell.



Lord Vishnu had to wear the Varaha avatar to get the earth out of the water. In this incarnation, he worked tirelessly to remove water from the earth. In his work, Hiranyaksha used to interrupt again and again, in the end Srivishnu killed Hiranyaksha. After that, the earth again became a habitable place for humans.
Hiranyaksha's brother Hiranyakashipu was also a powerful demon, and he meditated and received a boon from Brahma. He knew that due to this boon, no one can kill me in the sky nor in hell. Neither in day nor at night. Neither a god, nor a demon, nor a human being can kill, so what is the concern? Thinking this, he had declared himself to be God.
Due to the killing of his brother Hiranyaksha by Lord Vishnu, he became anti-Vishnu, but when he came to know that his son Prahlada was Vishnubhakta he left no stone unturned to kill him, but he could not kill his son. Finally he kicked in a pillar and asked Prahlada - 'If your God is everywhere, is it also in this pillar?' As soon as the pillar was kicked, Lord Vishnu appeared in the form of Narasimha, who was neither a god nor a demon nor a human being.



He was half-hearted and half-hearted. He killed Hiranyakashipu by putting him on his thigh in the evening. After the slaughter, these two brothers were born in Tretayuga as Ravana (Jai) and Kumbhakarna (Vijay) and were then killed at the hands of Lord Vishnu, the incarnation of Srivishnu. Finally, in the third birth, he was born in the Dwapara Yuga as Dantavaktra (while some people call it Kansa (Jai)) and Anachriya named Shishupala (Vijay).



Both of these were also slaughtered by Lord Krishna.

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