Sage Markandeya receives the boon of immortality by Mahadev.-ऋषि मार्कंडेय को प्राप्त हुआ महादेव द्वारा अमर होने का वरदान - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Tuesday, 28 April 2020

Sage Markandeya receives the boon of immortality by Mahadev.-ऋषि मार्कंडेय को प्राप्त हुआ महादेव द्वारा अमर होने का वरदान

ऋषि मार्कंडेय को प्राप्त हुआ महादेव द्वारा अमर होने का वरदान

*महामृत्युंजय मंत्र *

*शिवजी के अनन्य भक्त मृकण्ड ऋषि संतानहीन होने के कारण दुखी थे. विधाता ने उन्हें संतान योग नहीं दिया था.*

*मृकण्ड ने सोचा कि महादेव संसार के सारे विधान बदल सकते हैं. इसलिए क्यों न भोलेनाथ को प्रसन्नकर यह विधान बदलवाया जाए.*

*मृकण्ड ने घोर तप किया. भोलेनाथ मृकण्ड के तप का कारण जानते थे इसलिए उन्होंने शीघ्र दर्शन न दिया लेकिन भक्त की भक्ति के आगे भोले झुक ही जाते हैं.*

*महादेव प्रसन्न हुए. उन्होंने ऋषि को कहा कि मैं विधान को* बदलकर तुम्हें पुत्र का वरदान दे रहा हूं लेकिन इस वरदान के साथ हर्ष के साथ विषाद भी होगा.

*भोलेनाथ के वरदान से मृकण्ड को पुत्र हुआ जिसका नाम मार्कण्डेय पड़ा. ज्योतिषियों ने मृकण्ड को बताया कि यह विलक्ष्ण बालक अल्पायु है. इसकी उम्र केवल 12 वर्ष है.*

*ऋषि का हर्ष विषाद में बदल गया. मृकण्ड ने अपनी पत्नी को आश्वत किया- जिस ईश्वर की कृपा से संतान हुई है वही भोले इसकी रक्षा करेंगे. भाग्य को बदल देना उनके लिए सरल कार्य है.*

*मार्कण्डेय बड़े होने लगे तो पिता ने उन्हें शिवमंत्र की दीक्षा दी. मार्कण्डेय की माता बालक के उम्र बढ़ने से चिंतित रहती थी. उन्होंने मार्कण्डेय को अल्पायु होने की बात बता दी.*

*मार्कण्डेय ने निश्चय किया कि माता-पिता के सुख के लिए उसी सदाशिव भगवान से दीर्घायु होने का वरदान लेंगे जिन्होंने जीवन दिया है. बारह वर्ष पूरे होने को आए थे.*

*मार्कण्डेय ने शिवजी की आराधना के लिए महामृत्युंजय मंत्र की रचना की और शिव मंदिर में बैठकर इसका अखंड जाप करने लगे.*

*“ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।*
*उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥”*

समय पूरा होने पर यमदूत उन्हें लेने आए. यमदूतों ने देखा कि बालक महाकाल की आराधना कर रहा है तो उन्होंने थोड़ी देर प्रतीक्षा की. मार्केण्डेय ने अखंड जप का संकल्प लिया था.

यमदूतों का मार्केण्डेय को छूने का साहस न हुआ और लौट गए. उन्होंने यमराज को बताया कि वे बालक तक पहुंचने का साहस नहीं कर पाए.

*इस पर यमराज ने कहा कि मृकण्ड के पुत्र को मैं स्वयं लेकर आऊंगा. यमराज मार्कण्डेय के पास पहुंच गए.*

बालक मार्कण्डेय ने यमराज को देखा तो जोर-जोर से महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग से लिपट गया.

*यमराज ने बालक को शिवलिंग से खींचकर ले जाने की चेष्टा की तभी जोरदार हुंकार से मंदिर कांपने लगा. एक प्रचण्ड प्रकाश से यमराज की आंखें चुंधिया गईं.*

शिवलिंग से स्वयं महाकाल प्रकट हो गए. उन्होंने हाथों में त्रिशूल लेकर यमराज को सावधान किया और पूछा तुमने मेरी साधना में लीन भक्त को खींचने का साहस कैसे किया?

*यमराज महाकाल के प्रचंड रूप से कांपने लगे. उन्होंने कहा- प्रभु मैं आप का सेवक हूं. आपने ही जीवों से प्राण हरने का निष्ठुर कार्य मुझे सौंपा है.*

*भगवान चंद्रशेखर का क्रोध कुछ शांत हुआ तो बोले- मैं अपने भक्त की स्तुति से प्रसन्न हूं और मैंने इसे दीर्घायु होने का वरदान दिया है. तुम इसे नहीं ले जा सकते.*

*यम ने कहा- प्रभु आपकी आज्ञा सर्वोपरि है. मैं आपके भक्त मार्कण्डेय द्वारा रचित महामृत्युंजय का पाठ करने वाले को त्रास नहीं दूंगा.*

*महाकाल की कृपा से मार्केण्डेय दीर्घायु हो गए. उवके द्वारा रचित महामृत्युंजय मंत्र काल को भी परास्त करता है

*जय महाकाल*

Sage Markandeya receives the boon of immortality by Mahadev.

*Mahamrityunjaya Mantra *

* The devotees of Lord Shiva were sad because of being childless. The creator did not give him progeny yoga. *

* Mrkand thought that Mahadev can change all the laws of the world. Therefore, why not please Bholenath and get this legislation changed.

* The mrkand did severe penance. Bholenath knew the reason for the tenacity of the deity, so he did not give a quick darshan, but the naive people bow down before the devotion of the devotee.

* Mahadev was pleased. He told the sage that I am giving you the boon of a son by changing the law *, but with this boon there will be grief and joy.

* With the boon of Bholenath, Mrkand got a son named Markandeya. Astrologers told Mrkand that this unique child is young. Its age is only 12 years. *

* The joy of the sage turned into sadness. Mrkund assured his wife - The God whose grace has given birth to the innocent will protect it. Changing fortune is a simple task for them.

When Markandeya started growing up, father gave him the initiation of Shiv Mantra. Markandeya's mother was worried about the child's aging. He told Markandeya to be young. *

* Markandeya decided that for the happiness of parents, he would take the boon of longevity from the same God who gave life. He had come to complete twelve years.

* Markandeya composed the Mahamrityunjaya Mantra to worship Shiva and sat in the Shiva temple and chanted it unbroken. *

* "ॐ Trimbakan Jajmeh fragrance confirmation Vardhanamam. *
* Urvarukmiv Bandhananamoanamrutakal Maumrhata॥ "*

When the time was over, the Yamdoots came to pick them up. The Yamdoots saw that the child was worshiping Mahakal, so he waited for a while. Markandeya had taken a pledge of unbroken chanting.

The Yamdoots did not have the courage to touch Markandeya and returned. He told Yamraj that he could not dare to reach the child.

On this, Yamraj said that I will bring the son of Mrkund himself. Yamraj reached Markandeya. *

When the boy Markandeya saw Yamaraja, he chanted Mahamrityunjaya mantra loudly and clung to the Shivling.

* Yamraj tried to drag the child from Shivling and then the temple started trembling with a loud shout. Yamraj's eyes were lit with a strong light. *

Mahakal himself appeared with Shivling. He cautioned Yamaraj with a trident in his hands and asked how did you dare to pull the devotee absorbed in my practice?

* Yamraj started trembling with the great form of Mahakal. He said- Lord I am your servant. You have given me the ruthless task of killing the living beings. *

* When the anger of Lord Chandrasekhar calmed down, he said - I am happy with the praise of my devotee and I have given it the boon of longevity. You can not take it. *

* Yama said- Lord your command is paramount. I will not give tragedy to the reciter of Mahamrityunjaya composed by your devotee Markandeya. *

* By the grace of Mahakal, Markandeya became longevity. Mahamrityunjaya Mantra composed by Uvke also defeats Kaal

*Jai Mahakaal*

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