Sakat Chauth Vrat Katha संकट चौथ व्रत - ॐ जय माता दी ॐ

Latest:

Translate

Search This Blog

“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Tuesday, 21 April 2020

Sakat Chauth Vrat Katha संकट चौथ व्रत

Sakat Chauth Vrat Katha


संतान की कुशलता की कामना व लंबी आयु हेतु भगवान गणेश और माता पार्वती की विधिवत पूजा अर्चना करनी चाहिए, व्रत का आरंभ तारों की छांव में करना चाहिए व्रतधारी को पूरा दिन अन्न, जल ग्रहण किए बिना मंदिरों में पूजा अर्चना करनी चाहिए और बच्चों की दीर्घायु के लिए कामना करनी चाहिए. इसके बाद संध्या समय पूजा की तैयारी के लिए गुड़, तिल, गन्ने और मूली को उपयोग करना चाहिए. व्रत में यह सामग्री विशेष महत्व रखती है, देर शाम चंद्रोदय के समय व्रतधारी को तिल, गुड़ आदि का अ‌र्घ्य देकर भगवान चंद्र देव से व्रत की सफलता की कामना करनी चाहिए. माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का व्रत लोक प्रचलित भाषा में इसे सकट चौथ कहा जाता है. इस दिन संकट हरण गणेशजी तथा चंद्रमा का पूजन किया जाता है, यह व्रत संकटों तथा दुखों को दूर करने वाला तथा सभी इच्छाएं व मनोकामनाएं पूरी करने वाला है. इस दिन स्त्रियां निर्जल व्रत करती हैं गणेशजी की पूजा की जाती है और कथा सुनने के बाद चंद्रमा को अर्ध्य देकर ही व्रत खोला जाता है|
विधि : 

संकट चौथ व्रत
किसी नगर में एक कुम्भार रहता था । एक बार उसने बर्तन बनाकर आंवा लगाया तो आंवा पक ही नहीं । हारकर वह राजा के पास जाकर प्रार्थना करने लगा । राजा ने राजपंडित को बुलाकर कारण पूछा तो राल्पन्दित ने कहा की हर बार आंवा लगते समय बच्चे की बलि देने से आंवा पक जाएगा । राजा का आदेश हो गया । बलि आरम्भ हुई । जिस परिवार की बारी होती वह परिवार अपने बच्चो में से एक बच्चा बलि के लिए भेज देता । इसी तरह कुछ दिनों बाद सकट के दिन एक बुडिया के लड़के की बारी आयी । बुडिया के लिए वाही जीवन का सहारा था । राजा आज्ञा कुछ नहीं देखती । दुखी बुडिया सोच रही थी की मेरा तो एक ही बीटा है ,वह भी सकट के दिन मुझसे जुदा हो जाएगा । बुडिया ने लड़के को सकट की सुपारी और दूब का बीड़ा देकर कहा "भगवान का नाम लेकर आंवा में बैठ जाना । सकट माता रक्षा करेंगी । " बालक आंवा में बिठा दिया गया और बुडिया सकत माता के सामने बैठकर पूजा करने लगी । पहले तो आंवा पकने में कई दिन लग जाते थे,पर इस बार सकत माता की कृपा से एक ही रात में आंवा पाक गया था । सवेरे कुम्भार ने देखा तो हैरान रह गया । आंवा पाक गया था । बुडिया का बेटा एवं अन्य बालक भी जीवित एंव सुरक्षित थे । नगर वासियों ने सकत की महिमा स्वीकार की तथा लड़के को भी धन्य माना । सकत माता की कृपा से नगर के अन्य बालक भी जी उठे ।

No comments:

Post a comment