Shangchul Mahadev Temple-शंगचुल महादेव मंदिर - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Wednesday, 29 April 2020

Shangchul Mahadev Temple-शंगचुल महादेव मंदिर

 शंगचुल महादेव मंदिर– घर से भागे प्रेमियों को मिलता है यहां आश्रय




Sangchul Mahadev Temple, Kullu – हिमाचल प्रदेश जितना अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण जाना जाता है उतना ही यहां की परंपराओं के कारण भी। आज हम आपको बता रहा है कुल्लू के शांघड़ गांव के देवता शंगचूल महादेव के बारे में जो घर से भागे प्रेमी जोड़ों को शरण देते हैं।
शांघड़ गांव कुल्लू की सेंज वैली में है।
पांडव कालीन शांघड़ गांव में कई ऐतिहासिक धरोहरें हैं। इन्ही में से एक हैं यहां का शंगचुल महादेव मंदिर।
यहां डलहौजी के खज्जियार की तरह ग्रास फील्ड है।
शंगचूल महादेव की सीमा में किसी भी जाति के प्रेमी युगल अगर पहुंच जाते हैं तो फिर जब तक वह इस मंदिर की सीमा रहते हैं उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

शंगचुल देवता का मंदिर
यहां तक की प्रेमी युगल के परिजन भी उससे कुछ नहीं कह सकते। शंगचुल महादेव मंदिर का सीमा क्षेत्र करीब 100 बीघा का मैदान है। जैसे ही इस सीमा में कोई प्रेमी युगल पहुंचता है वैसे ही उसे देवता की शरण में आया हुआ मान लिया जाता है।
 
यह मंदिर जल गया था इसका निर्माण दोबारा किया गया है
अपनी विरासत के नियमों का पालन कर रहे इस गांव में पुलिस के आने पर भी प्रतिबंध है। इसके साथ ही यहां शराब, सिगरेट और चमड़े का सामान लेकर आना भी मना है। न कोई हथियार लेकर यहां प्रवेश कर सकता है और न ही किसी प्रकार का लड़ाई झगड़ा तथा ऊंची आवाज में बात नहीं कर सकता है। यहां देवता का ही फैसला मान्य होता है।
शंगचुल देवता की प्रतिमा
यहां भागकर आए प्रेमी युगल के मामले निपट ही नहीं जाते तब तक मंदिर के पंडित प्रेमी युगलों की खातिरदारी करते हैं।
 

शंगचुल देवता का एरिया
गांव में ऐसा कहा जाता है कि अज्ञातवास के समय पांडव यहां कुछ समय के लिए रूके थे। कौरव उनका पीछा करते हुए यहां आ गए। तब शंगचूल महादेव ने कौरवों को रोका और कहा कि यह मेरा क्षेत्र है और जो भी मेरी शरण में आएगा उसका कोई कुछ बिगाड़ सकता। महादेव के डर से कौरव वापस लौट गए।

यह 100 बीघा में फैला है
तब से लेकर आज तक जब भी कोई समाज का ठुकराया हुआ शख्स या प्रेमी जोड़ा यहां शरण लेने के लिए पहुंचता है, महादेव उसकी देखरेख करते हैं।


Shangchul Mahadev Temple - Lovers runaway get shelter here

Sangchul Mahadev Temple, Kullu - Himachal Pradesh is known for its natural beauty as much as the traditions here. Today we are telling you about Shangul Mahadev, the deity of Shangad village of Kullu, who gives shelter to lovers who have run away from home.

Shangad village is in Senj Valley of Kullu.

There are many historical heritage in Pandav Kalin Shangad village. One of these is the Shangchul Mahadev Temple here.

Here is a grass field like the Khajjiyar of Dalhousie.
If the lovers of any caste reach the border of Shangul Mahadev, then nothing can spoil them as long as they remain within the boundary of this temple.


Shangchul Devta Temple

Even the family members of the loving couple cannot say anything to him. The boundary area of ​​the Shangchul Mahadev Temple is about 100 bighas of ground. As soon as a lover couple reaches this border, they are considered to come under the shelter of the deity.


This temple was burnt, its construction has been rebuilt

Police is also banned in this village following the rules of its heritage. Also, bringing liquor, cigarettes and leather goods is also forbidden here. Neither one can enter here with a weapon nor can fight any kind of fight and talk in a loud voice. Here the decision of the deity is valid.

Idol of god

The lovers of the temple take care of the lovers until the cases of the lovers who came here are settled.



Shangchul Devta's Area

In the village, it is said that the Pandavas stayed here for some time at the time of the unknown. The Kauravas came here chasing them. Then Shangchul Mahadev stopped the Kauravas and said that this is my territory and anyone who comes to my shelter can spoil anything. Fearing Mahadev, the Kauravas returned.


It is spread over 100 bighas

Since then, whenever a rejected person or lover of the society arrives here to seek shelter, Mahadev supervises it.

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