Shani Dev Jayanti-शनि देव जयंती - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Sunday, 26 April 2020

Shani Dev Jayanti-शनि देव जयंती

क्या महत्व है कैसे करें शनिदेव की पूजा
जयंती माह की अमावस्या को शनि जयंती के रूप में मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन शनिदेव की पूजा करने से सभी शनि के कोप का भाजन बनने से बचा जा सकता है यदि पहले से ही कोई शनि के प्रकोप को झेल रहा है तो उसके लिए भी यह दिन बहुत ही कल्याणकारी हो सकता है। आइये जानते हैं कि शनिदेव की पूजा कैसे की जाती है और इसका क्या महत्व है?



कौन हैं शनिदेव
शनिदेव भगवान सूर्य और छाया (अगस्त) के पुत्र हैं। इन्हें क्रूर ग्रह माना जाता है जो कि इन पत्नी के शाप के कारण मिला है। शनि के अधिदेवता प्रजापति ब्रह्मा और प्रत्यधिदेवता यम हैं। इनका वर्ण कृष्ण है और ये गिद्ध की सवारी करते हैं। फलित ज्योतिष के अनुसार शनि को अशुभ माना जाता है व 9 योजनाओं में शनि का स्थान सातवां है। ये एक राशि में तीस महीने तक रहते हैं और मकर और कुंभ राशि के स्वामी माने जाते हैं। शनि की महादशा 19 वर्ष तक रहती है। शनि की गुरू और शक्ति पृथ्वी से 95 वें गुणा ज्यादा मानी जाती है। माना जाता है इसी तरह गुरुत्व बल के कारण हमारे अच्छे और ब्योरे विचार चुंबकीय शक्ति से शनि के पास पंहुचते हैं जिनकी कृत्य अनुसार परिणाम भी जल्द मिलता है। मूल रूप से शनिदेव बहुत ही न्यायप्रिय राजा हैं। यदि आप किसी से धो-धड़ी नहीं करते, किसी के साथ अन्याय नहीं करते, किसी पर कोई जुल्म अत्याचार नहीं करते, कहने तात्पर्य यदि आप ब्योरेतों में संलक्षित नहीं हैं तो आपको शनि से घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि शनिदेव भले ही करने वाले हैं। कोई पीड़ित नहीं देता है।



शनिदेव की पूजा करें
शनिदेव की पूजा विधि - शनिदेव की पूजा भी बाकि देवी-देवताओं की पूजा की तरह सामान्य ही होती है। प्रात: काल उठकर शुचादि से निवृत होकर स्नानादि से शुद्ध हों। फिर लकड़ी के एक पाट पर काले वस्त्र बिछाकर उस पर शनिदेव की प्रतिमा या तस्वीर या फिर एक सुपारी रखकर उसे दोनों ओर शुद्ध घी व तेल का दीपक जलाकर धूप जलाएं। शनिदेवता के इस प्रतीक स्वरूप को पंचगव्य, पंचामृत, इत्र आदि से स्नान करवाएँ। इसके बाद अबीर, गुलाल, सिंदूर, कुमकुम व काजल लगाकर तिल या काले फूल अर्पित करें। तत्पश्चात इमरती व तेल में तली वस्तुओं का नैवेद्य अपर्ण करें। इसके बाद श्री फल सहित अन्य फल भी अर्पित करें। पंचोपचार पूजन के बाद शनि मंत्र का कम से कम एक माला जप भी करना चाहिए। माला जप के पश्चात शनि चालीसा का पाठ करें व तत्पश्चात शनि महाराज की आरती भी उतारनी चाहिए।

What is the importance of how to worship Shani Dev
Amavasya of Jayanti month is celebrated as Shani Jayanti. It is believed that worshiping Shani Dev on this day can prevent all Saturn's wrath from becoming a hymn. If someone is already facing the wrath of Shani, then this day can be very beneficial for him. Let us know how Shani Dev is worshiped and what is its significance?



Who is Shani Dev
Shanidev is the son of Lord Surya and Chhaya (August). They are considered to be cruel planets which are found due to curse of these wife. Shani's overlord is Prajapati Brahma and Pratidhdevata Yama. His varna is Krishna and he rides the vulture. According to the resulting astrology, Saturn is considered inauspicious and Saturn is seventh in 9 schemes. They live for thirty months in a zodiac and are considered the lord of Capricorn and Aquarius. The Mahadasha of Shani lasts for 19 years. Saturn's guru and power are considered to be 95 times more than the Earth. It is believed that due to the force of gravity, our good and detailed thoughts reach Saturn by magnetic force, according to whose actions results are also soon. Originally, Shanidev is a very just king. If you do not cheat someone, do injustice to anyone, do not persecute anyone, it means that if you are not involved in details then there is no need to panic with Saturn because Shani Dev Huh. No victim gives.



Worship shanidev
The method of worship of Shani Dev - The worship of Shani Dev is also as common as the worship of other deities. Wake up in the morning and be purified of bathing after being retired from purification. Then put black cloth on a wooden board and place a statue or picture of Shani Dev on it or a betel nut and light it on both sides by lighting a lamp of pure ghee and oil. Get this symbol of Shani Devata bathed with Panchagavya, Panchamrit, perfume etc. After this, apply sesame or black flowers by applying Abir, Gulal, Sindoor, Kumkum and Kajal. After that, you should do the exploration of the things fried in oil and oil. After this, offer other fruits including Mr. Fruit. At least one garland of Shani Mantra should also be chanted after Panchopchar worship. After chanting the garland, recite Shani Chalisa and then the Aarti of Shani Maharaj should also be performed.

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