दुर्गा स्तुति चौथा अध्याय (Shri Durga Stuti forth adhyaya) - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Tuesday, 21 April 2020

दुर्गा स्तुति चौथा अध्याय (Shri Durga Stuti forth adhyaya)

दुर्गा स्तुति चौथा अध्याय (Shri Durga Stuti forth adhyaya)

आदिशक्ति ने जब किया महिषासुर का नास |
सभी देवता आ गये तब माता के पास |

मुख प्रसन्न से माता के चरणों में सीस झुकाये |
करने लगे स्तुति मीठे बैन सुनायें |

हम तेरे ही गुण गातें हैं, चरणों मैं सीस झुकाते हैं |
तेरे जे कार मनाते हैं, जै जै अम्बे जै जगदम्बें |

जै दुर्गा आदि भवानी की, जै जै शक्ति महरानी की |
जै अभयदान वरदानी की , जै अष्टभुजी कल्याणी की |

तुम महा तेज शक्तिशाली |
तुम ही हो अदभुत बलवाली |
तू रण चण्डी तू महाकाली |

तुम दूसरों की हो रखवाली-हम तेरे ही गुण गाते हैं |

तुम दुर्गा बन कर तारती हों |
चण्डी बन दुष्ट संहारती हों |
कलि रण में ललकारती हों |

शक्ति तुम बिगड़ी संवारती हो-हम तेरे ही गुण गाते हैं |

हर दिल में वास तुम्हारा हैं |
तेरा ही जगत पसारा हैं |
तुमने ही अपनी शक्ति सें |

बलवान दैत्य को मारा है-हम तेरे ही गुण गाते हैं |
ब्रह्म विष्णु महोदेव बड़े |
तेरे दर पर कर जोड़ खड़ें |
वर पाने को चरणों में पड़ें |
शक्ति पा जा दैत्यों से लड़े-हम तेरे ही गुण गातें हैं |

हर विधा का है ज्ञान तुझें |
अपनी शक्ति पर मान तुझें |
हर इक की है पहचान तुझें |

हर दास का माता ध्यान तुझे-हम तेरे ही गुण गाते हैं |

ब्रह्म जब दर पर आते हैं |
वेदों का पाठ सुनते हैं |
विष्णु जी चंवर झुलाते है |

शिव शम्भु नाद बजाते है-हम तेरे ही गुण गाते हैं |

तू भद्रकाली है कहलाई |
तू पारवती बन कर आई |
दुनियां के पालन करने को |

तू आदि शक्ति है महामाई-हम तेरे ही गुण गाते है |

भूखों को अन्न खिलाये तू |
भक्तों के कष्ट मिटाये तू |
तू दयावान दाती मेरी |

हर मन की आस पुजाये तू-हम तेरे ही गुण गाते है |

निर्धन के तू भण्डार भरे |
तू पतितों का उद्धार करें |
तू अपनी भक्ति दे करके |

भव सागर से भी पर करे-हम तेरे ही गुण गाते है |

है त्रिलोकी में वास तेरा |
हर जीव है मैय्या दास तेरा |
गुणगाता जमीं आकाश तेरा |

हमको भी है विशवास तेरा-हम तेरे ही गुण गाते है |

दुनियां के कष्ट मिटा माता |
हर एक की आस पूजा माता |
हम और नहीं कुछ चाहते हैं |

बस अपना दस बना माता-हम तेरे ही गुण गाते है |

तू दया करे तो मान भी हो |
दुनिया की कुछ पहचान भी हो |
भक्ति से पैदा ज्ञान भी हो |

तू कृपा करे कल्याण भी हो-हम तेरे ही गुण गाते है |

देवों ने प्रेम पुकार करी |
मां अम्बे झट प्रसन्न हुई |
तब मधुर वाणी से कहने लगी |
मांगो वरदान जो मन भए |
देवों ने कहा तब हर्षाये |
जब भी हम प्रेम से याद करें |

मां देना दर्शन दिखलाये-हम तेरे ही गुण गाते है |

तब भद्रकाली यह बोल उठी |
तुम करोगे याद मुझे जब ही |
मैं संकट दूर करूं तब ही |
इतना कह अंतरध्यान हुई |
तब 'चमन' ख़ुशी हो सब ने कहा |

जय जगतारणी भवाणी मां-हम तेरे ही गुण गाते है |

वेदों ने पार न पाया है |
कैसी शक्ति महामाया है |
लिखते लिखते यह दुर्गा पाठ |
मेरा भी मन हर्षाया है |
नादान 'चमन' पे दया करो |
शारदा माता सिर हाथ धरो |
जो पाठ प्रेम से पढ़ जाये |
मुंह मांगा माता वर पाये |
सुख सम्पति उसके घर आये |
हर समय तुम्हारे गुण गाये |
उसके दुःख दर्द मिटा देना |

दर्शन अपना दिखला देना-हम तेरे ही गुण गाते है |

जैकार स्तोत्र यह पढ़े जो मन चित लाये |
भगवती माता उसके सब देगी कष्ट मिटाए |
माता के मन्दिर में जा सात बार पढ़े जोए |
शक्ति के वरदान से सिद्ध कामना होए |

'चमन' निरन्तर जो पढ़े पाठ एक ही बार |
सदा भवानी सुख दे भरती रहे भण्डार |
इस स्तोत्र को प्रेम से जो भी पढ़े सुनाए |
हर संकट में भगवती होवे आन सहाए |

मान इज्जत सुख सम्पति मिले 'चमन' भरपूर |
दुर्गा पाठी से कभी रहे न मैय्या दूर | जगदम्बे महाकालिका चण्डी आदि भवानी |

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