दुर्गा स्तुति सातवा अध्याय (Shri Durga Stuti Seven adhyaya) - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Tuesday, 21 April 2020

दुर्गा स्तुति सातवा अध्याय (Shri Durga Stuti Seven adhyaya)

दुर्गा स्तुति सातवा अध्याय (Shri Durga Stuti Seven adhyaya)

चंड मुण्ड चतुरंगणी सैना को ले साथ |
अस्त्र शस्त्र ले देवी से चले करने दो हाथ |

गये हिमालय पर जभी दर्शन सब ने पाए |
सिंह चढ़ी मां अम्बिका खड़ी वहां मुस्कराए |

लिये तीर तलवार दैत्य माता पे धाए |
दुष्टों ने शस्त्र देवी पे कई बरसाए |

क्रोध से अम्बा कई आंखो में भरी जो लाली |
निकली दुर्गा के मुख से तब ही महाकाली |

खाल लपेटी चीते की गल मुंडन माला |
लिए हाथ में खप्पर और इक खड़ग विशाला |

लपलप करती लाल जुबां मुंह से थी निकली |
अति भयानक रूप से फिरती थी महांकाली |

अटटहास कर गर्जी तब दैत्यों में धाई |
मार धाड़ करके कीनी असुरों की सफाई |

पकड़ पकड़ बलवान दैत्य सब मुह में डाले |
पांवों नीचे पीस दिए लाखों मतवाले |

रुण्डों की माला में काली सीस परोये |
कइयों ने तो प्राण ही डर के मारे खोये |

चंड मुण्ड यह नाश देख आगे बढ़ आये |
महांकाली ने तब अपने कई रंग दीखाये |

खड़ग से ही कई असुरों के टुकड़े कर दिने |
खप्पर भर भर लगी दैत्यों का पीने |

दोहा:- चंड मुण्ड का खड़ग से लीना सीस उतार |
आ गई पास भवानी के मार एक किलकार |

कहा काली ने दुर्गा से किये दैत्य संहार |
शुम्भ निशुम्भ को अपने ही हाथों देना मार |

तब अम्बे कहने लागी सुन काली मम बात |
आज से चामुण्डा तेरा नाम हुआ विख्यात |

चंड मुण्ड को मार कर आई हो तुम आप |
आज से घर घर होवेगा नाम तेरे का जाप |

जो श्रद्धा विश्वास से सप्तम पढ़े अध्याय |
महांकाली की क्रपा से संकट सब मिट जाय |

नव दुर्गा का पाठ यह 'चमन' करे कल्याण |पढ़ने वाला पाएगा मुंह मांगा वरदान |

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