दुर्गा स्तुति बारहवां अध्याय (Shri Durga Stuti Twelve adhyaya) - ॐ जय माता दी ॐ

Latest:

Translate

Search This Blog

“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Tuesday, 21 April 2020

दुर्गा स्तुति बारहवां अध्याय (Shri Durga Stuti Twelve adhyaya)

दुर्गा स्तुति बारहवां अध्याय (Shri Durga Stuti Twelve  adhyaya)

द्वादश अध्याय में है माँ का आशीर्वाद
सुनो राजा तुम मन लगा देवी देव संवाद ॥

महालक्ष्मी बोली तभी करे जो मेरा ध्यान
निशदिन मेरे नामों का जो करता है गान ॥

बाधायें उसकी सभी करती हूं मैं दूर
उसके ग्रह सुख सम्पति भरती हूं भरपूर ॥

अष्टमी नवमी चतुर्दर्शी करके एकाग्रचित
मन कर्म वाणी से करे पाठ जो मेरा नित ॥

उसके पाप व् पापों से उत्पन्न हुए क्लेश
दुःख दरिद्रता सभी मैं करती दूर हमेश ॥

प्रियजनों से होगा ना उसका कभी वियोग
उसके हर एक काम में दूँगी मैं सहयोग ॥

शत्रुडाकूराजा और शस्त्र से बच जाये
जल में वह डूबे नहीं न ही अग्नि जलाए ॥

भक्ति पूर्वक पाठ जो पढ़े या सुने सुनाये
महामारी बीमारी का कष्ट ना कोई आये ॥

जिस घर में होता रहे मेरे पाठ का जाप
उस घर की रक्षा करूं मिटे सभी संताप ॥

ज्ञान चाहे अज्ञान से जपे जो मेरा नाम
हो प्रसन्न उस जीव के करूं मैं पूरे काम ॥

नवरात्रों में जो पढ़े पाठ मेरा मन लाये
बिना यत्न किये सभी मनवांछित फल पाए ॥

पुत्र पौत्र धन धाम से करूं उसे सम्पन्न
सरल भाषा का पाठ जो पढ़े लगा कर मन ॥

बुरे स्वप्न ग्रह दशा से दूँगी उसे बचा
पढ़ेगा दुर्गा पाठ जो श्रद्धा प्रेम बढ़ा ॥

भूत प्रेत पिशाचिनी उसके निकट ना आये
अपने दृढ़ विश्वास से पाठ जो मेरा गाए ॥

निर्जन वन सिंह व्याघ से जान बचाऊं आन
राज्य आज्ञा से भी ना होने दूं नुक्सान ॥

भंवर से भी बाहर करूं लम्बी भुजा पसार
'भक्तजो दुर्गा पाठ पढ़ करेगा प्रेम पुकार ॥

संसारी विपत्तियां देती हूं मैं टाल
जिसको दुर्गा पाठ का रहता सदा ख्याल ॥

मैं ही रिद्धि -सिद्धि हूं महाकाली विकराल
मैं ही भगवती चंडिका शक्ति शिवा विशाल ॥

भैरो हनुमत मुख्य गण हैं मेरे बलवान
दुर्गा पाठी पे सदा करते कृपा महान ॥

इतना कह कर देवी तो हो गई अंतरध्यान
सभी देवता प्रेम से करने लगे गुणगान ॥

पूजन करे भवानी का मुहं मांगा फल पाए
'भक्तजो दुर्गा पाठ को नित श्रद्धा से गाए ॥

वरदाती का हर समय खुला रहे भंडार
इच्छित फल पाए 'भक्तजो भी करे पुकार ॥

इक्कीस दिन इस पाठ को कर ले नियम बनाये
हो विश्वास अटल तो वाकया सिद्ध हो जाये ॥

पन्द्रह दिन इस पाठ में लग जाये जो ध्यान
आने वाली बात को आप ही जाए जान ॥

नौ दिन श्रद्धा से करे नव दुर्गा का पाठ
नवनिधि सुख सम्पति रहे वो शाही ठाठ ॥

सात दिनों के पाठ से बलबुद्धि बढ़ जाये
तीन दिनों का पाठ ही सारे पाप मिटाए ॥

मंगल के दिन माता के मन्दिर करे ध्यान
'भक्तजैसी मन भावना वैसा हो कल्याण ॥

शुद्धि और सच्चाई हो मन में कपट ना आये
तज कर सभी अभिमान न किसी का मन कलपाये ॥

सब का कल्याण जो मांगेगा दिन रैन
काल कर्म को परख कर करे कष्ट को सहन ॥

रखे दर्शन के लिए निस दिन प्यासे नैन
भाग्यशाली इस पाठ से पाए सच्चा चैन ॥

द्वादश यह अध्याय है मुक्ति का दातार
'भक्तजीव हो निडर उतरे भव से पार ॥

॥जय माँ जगदम्बे॥

No comments:

Post a comment