श्री दुर्गा स्तुति Shri Durga Stuti - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Tuesday, 21 April 2020

श्री दुर्गा स्तुति Shri Durga Stuti


मिट्टी का तन हुआ पवित्र , गंगा के स्नान से ,
अंत-करण हो जाये पवित्र , जगदम्बे के ध्यान से

सर्वे मंगल मांगल्ये,शिवे सर्वार्थ साधिके
 शरण्ये त्रम्बके गौरी,नारायणी नमोस्तुते


शक्ति-शक्ति दो मुझे,करूँ तुम्हारा ध्यान,
पाठ निर्विघ्न हो तेरा,मेरा हो कल्याण
 हृदय सिंहासन पर आ बेठो मेरी मात,
सुनो विनय म्म दीन की,जग-जननी-वरदात
सुन्दर दीपक घी भरा करूँ आज तैयार,
ज्ञान उजाला माँ करो,मेटो मोह अन्धकार
चन्द्र सूर्य की रौशनी चमके चमन अखंड,
सब में व्यापक तेज है ज्वाला का प्रचंड.
ज्वाला जग जननी मेरी,रक्षा करो हमेश
दूर करो माँ अम्बिके मेरे सभी कलेश
श्रधा और विश्वास से तेरी ज्योत जगाऊँ,
तेरा ही है आश्रा,तेरे ही गुण गाऊँ
तेरी अधभुत गाथा को पढूं में निश्चय धार,
साक्षात् दर्शन करूँ,तेरे जगत आधार
मन चंचल ते पाठ के समय जो ओगुन होए ,
दाती अपनी दया से ध्यान न देना कोए.
मैं अंजन मलिन-मन न जानू कोई रीत,
अट-पट वाणी को ही माँ ,समझो मेरी प्रीत
चमन के ओगुन बहुत है,करना नहीं ध्यान,
सिंहवाहिनी माँ अम्बिके,करो मेरा कल्याण
धन्य-धन्य माँ अम्बिके,शक्ति शिवा विशाल ,
अंग-अंग में रम रही ,दाती दीन दयाल

जय माता दी
 
माँ दुर्गा वंदना

भगवती भगवन की भक्ति करो परवान तुम

अम्बे कर दो अमर जिसपे हो जाओ मेहरबान तुम


काली काल के पंजे से तुम ही बचाना आ कर

गौरी माँ गोदी में बिठाना अपना बालक जानकर

चिंतपूर्णी माँ चिंता मेरी दूर तुम करती रहो

लक्ष्मी लाखो भंडारे मेरे तुम भरती रहो माँ


नैना देवी माँ नैनो की शक्ति को देना तुम बढ़ा माँ

वैष्णो माँ विषय विकारो से भी लेना तुम बचा माँ

मंगला मंगल सदा करना भवन दरबार में माँ

चंडिका माँ चढ़ती रहे मेरी कला इस संसार में


माँ भद्रकाली भद्र जनो से मिलाना तुम सदा

ज्वाला माँ मेरी ईर्ष्या मिटाना ये करना कृपा

चामुंडा माँ चमन पे अपनी दया दृस्टि करो

माता मान इज्जत व् सुख सम्पति से भंडार भरो जय माता दी 
 

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