रूह को कंपाने वाली है श्रीखंड महादेव यात्रा, अमरनाथ से भी ज्यादा कठिन-Shrikhand Mahadev Yatra is going to shake the soul, more difficult than Amarnath - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Tuesday, 28 April 2020

रूह को कंपाने वाली है श्रीखंड महादेव यात्रा, अमरनाथ से भी ज्यादा कठिन-Shrikhand Mahadev Yatra is going to shake the soul, more difficult than Amarnath

रूह को कंपाने वाली है श्रीखंड महादेव यात्रा, अमरनाथ से भी ज्यादा कठिन


क्या है पौराणिक महत्व
श्री खंड महादेव की पौराणिक मान्यता है कि भस्मासुर राक्षस ने अपनी तपस्या से शिव से वरदान मांगा था कि वह जिस पर भी अपना हाथ रखेगा तो वह भस्म होगा। राक्षसी भाव होने के कारण उसने माता पार्वती से शादी करने की ठान ली इसलिए भस्मापुर ने शिव के ऊपर हाथ रखकर उसे भस्म करने की योजना बनाई लेकिन भगवान विष्णु ने उसकी मंशा को नष्ट किया। विष्णु ने माता पार्वती का रूप धारण किया और भस्मासुर को अपने साथ नृत्य करने के लिए राजी किया। नृत्य के दौरान भस्मासुर ने अपने सिर पर ही हाथ रख लिया और भस्म हो गया। आज भी वहां की मिट्टी व पानी दूर से लाल दिखाई देते हैं।


15-30 जुलाई तक इस साल यात्रा
श्रीखंड महादेव पहुंचने के लिए शिमला जिला के रामपुर से कुल्लू जिला के निरमंड होकर बागीपुल और जाओं तक गाड़ियों और बसों में पहुंचना पड़ता है। जहां से आगे करीब तीस किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी होती है। इस बार श्रीखंड महादेव की यात्रा इस वर्ष 15 से 30 जुलाई तक है। यात्रा को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है। निरमंड में आयोजित श्रीखंड महादेव यात्रा ट्रस्ट की बैठक में यात्रा के सभी आवश्यक प्रबंधों की समीक्षा की गई। ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं कुल्लू के उपायुक्त यूनुस की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में आनी के विधायक खूब राम आनंद ने भी विशेष रूप से भाग लिया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उपायुक्त यूनुस ने बताया कि इस अत्यंत कठिन धार्मिक यात्रा को श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह सुरक्षित व सुलभ बनाने के लिए विशेष प्रबंध किए जाएंगे। आम श्रद्धालुओं के लिए यात्रा शुरू करने से पहले एक विशेष टीम को श्रीखंड रवाना किया जाएगा। यह टीम पूरे मार्ग का निरीक्षण करेगी और आवश्यक प्रबंधों के लिए अपने सुझाव देगी।

Shrikhand Mahadev Yatra is going to shake the soul, more difficult than Amarnath


What is mythological importance
The mythical belief of Shri Khand Mahadev is that Bhasmasura demon, with his penance, sought a boon from Shiva that whomever he laid his hands on would be consumed. Being demonic, she decided to marry Mata Parvati, so Bhasmapur planned to devour her by putting her hands on Shiva but Lord Vishnu destroyed his intentions. Vishnu took the form of Mata Parvati and persuaded Bhasmasura to dance with her. During the dance, Bhasmasura placed his hands on his head and was consumed. Even today the soil and water there appear red from a distance.


This year travel from 15-30 July
To reach Shrikhand Mahadev, one has to reach trains and buses from Rampur in Shimla district to Bagipul and Jaan via Nirmand in Kullu district. From where the distance has to be traveled about thirty kilometers ahead. This time the visit of Shrikhand Mahadev is from 15 to 30 July this year. Preparations have started for the journey. All the necessary arrangements for the yatra were reviewed in the meeting of Shrikhand Mahadev Yatra Trust held at Nirmand. In this meeting chaired by the trust chairman and Deputy Commissioner of Kullu Yunus, Ani MLA Khoob Ram Anand also attended specially and gave necessary guidelines to the officials. Deputy Commissioner Yunus said that special arrangements will be made to make this extremely difficult religious journey completely safe and accessible for the devotees. A special team will be sent to Srikhand before starting the journey for the common devotees. This team will inspect the entire route and provide suggestions for necessary arrangements.

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