Sri Guru Arjun Ji Prakash Parv History-श्री गुरु अर्जुन जी प्रकाश पर्व इतिहास - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Sunday, 26 April 2020

Sri Guru Arjun Ji Prakash Parv History-श्री गुरु अर्जुन जी प्रकाश पर्व इतिहास

सिख धर्म को आगे बढ़ाने में गुरु अर्जुन देव जी का योगदान बेहद अहम है। सिख धर्म के पांचवें गुरु अर्जुन देव जी ने ही सबसे पहले अमृतसर में स्वर्ण मंदिर की नींव रखी। साथ ही उन्होंने गुरुद्वारों में चार दरवाजों की भी रूपरेख तय की। इसके पीछे तर्क था, 'मेरा विश्वास हर जाति और धर्म के शख्स में है। भले ही वे किसी भी दिशा से आये हों और कहीं भी अपना सिर झुकाते हों।'

गुरु अर्जुन देव जी ने सभी सिखों को अपनी कमाई का एक दहाई भी दान देने का निर्देश दिया था। गुरु अर्जुन देव जी का सबसे बड़ा योगदान ये था कि उन्होंने सभी पहले के गुरुओं की लिखी हुई बातों को एक साथ संजोया जिसे आज हम 'गुरु ग्रंथ साहिब' कहते हैं। यह सिख धर्म से जुड़ा सबसे पवित्र ग्रंथ है। इस ग्रंथ के बाद कुछ शरारती तत्वों ने उनके खिलाफ शिकायत की। इसके बाद मुगल शासक जहांगीर के आदेश पर उन्हें शहीद कर दिया गया।

जानिए गुरु अर्जुन देव जी से जुड़ी कुछ रोचक बातें
- अर्जुन देव जी का जन्म 15 अप्रैल 1563 को गोइंदवाल साहिब में हुआ था। उनके पिता गुरू रामदास और माता बीवी भानी जी थीं। गुरु अर्जुन देव जी के नाना गुरू अमरदास सिखों के तीसरे और पिता गुरू रामदास चौथे गुरू थे। 1581 में अर्जुन देव जी को पांचवे गुरु के तौर पर नियुक्त किया गया।

- गुरु अर्जुन देव जी का विवाह जालंधर के कृष्णचंद की बेटी माता गंगा जी के साथ हुआ। यह साल 1579 था और तब अर्जुन देव जी की उम्र केवल 16 साल थी। इनके पुत्र का नाम हरगोविंद सिंह था। हरगोविंद सिंह जी आगे चलकर सिखों के छठे गुरू बने।

-  अर्जुन देव जी ने साल 1588 में अमृतसर तालाब के मध्य हरमिंदर साहिब नाम से गुरुद्वारे की नींव रखवाई। इसे ही हम आज स्वर्ण मंदिर या गोल्डन टेंपल के नाम से जानते हैं। इसके नक्शे को खुद गुरु अर्जुन देव जी ने तैयार किया था।

'गुरु ग्रंथ साहिब' को लेकर जब गुरु अर्जुन देव जी के खिलाफ लामबंद हुए असमाजिक तत्व
पवित्र 'गुरु ग्रंथ साहिब' के तहत पिछले गुरुओं की बातों का संकलन 1603 में शुरु हुआ और 1604 में जाकर खत्म हुआ। इसके बाद प्रथम प्रकाश पर्व आयोजित किया गया। बाद में कुछ शरारती तत्व ने गुरु ग्रंथ साहिब के संपादन को लेकर मुगल शासक अकबर बादशाह के खिलाफ शिकायत की। कहा गया कि इस ग्रंथ में इस्लाम के खिलाफ लिखा गया है। हालांकि, जब अकबर ने असलियत जानी और उसे गुरुवाणी की महानता के बारे में पता चला तो उसने 51 मोहरें भेट करते हुए खेद प्रकट किया।

इसके बाद जहांगीर सत्ता पर काबिज हुआ। जहांगीर के आदेश पर 1606 में शहीद कर दिया गया। उस समय के 'यासा व सियासत' के कानून के अनुसार किसी व्यक्ति का रक्त धरती पर गिराये बिना उसे शहीद कर दिया जाता था।

गुरु अर्जुन देव जी को गर्म तवे पर बैठाया गया और उनके शरीर पर गर्म-गर्म रेत डाली गई। गुरु जी का शरीर जब बुरी तरह जल गया तो उन्हें रावी नदी में ठंडे पानी में नहाने के लिए भेजा गया। वहीं, गुरु जी का पवित्र शरीर विलुप्त हो गया। इसी जगह पर आज गुरुद्वारा डेरा साहिब है। यह जगह अब पाकिस्तान में है। गुरु अर्जुन देव जी सिख धर्म के पहले शहीद थे। 

The contribution of Guru Arjun Dev ji is very important in advancing Sikhism. Arjun Dev Ji, the fifth Guru of Sikhism, laid the foundation of the Golden Temple in Amritsar for the first time. In addition, he also designed four gates in the gurdwaras. The reasoning behind this was, 'I believe in the person of every caste and religion. Even if they come from any direction and bow their head anywhere. '

Guru Arjun Dev Ji instructed all Sikhs to donate one-ten of their earnings. The biggest contribution of Guru Arjun Dev ji was that he collected together the writings of all earlier Gurus, which we today call 'Guru Granth Sahib'. It is the most sacred book associated with Sikhism. After this treatise some mischievous elements complained against him. He was then martyred on the orders of the Mughal ruler Jahangir.

Know some interesting things related to Guru Arjun Dev Ji
- Arjun Dev ji was born on 15 April 1563 in Goindwal Sahib. His father was Guru Ramdas and mother Biwi Bhani. Guru Amardas, the grandfather of Guru Arjun Dev Ji, was the third Guru of Sikhs and Guru Ramdas the fourth Guru. In 1581, Arjun Dev Ji was appointed as the fifth Guru.

- Guru Arjun Dev Ji was married to Mata Ganga Ji, daughter of Krishnchand of Jalandhar. This year was 1579 and then Arjun Dev ji was only 16 years old. His son's name was Hargovind Singh. Hargovind Singh later became the sixth Guru of the Sikhs.

- Arjun Dev Ji laid the foundation of a gurudwara in the year 1588 in the name of Harminder Sahib in the middle of Amritsar pond. We know this today as the Golden Temple or Golden Temple. Its map was prepared by Guru Arjun Dev Ji himself.

When anti-social elements rallied against Guru Arjun Dev ji for 'Guru Granth Sahib'
The compilation of the talks of the previous Gurus under the holy 'Guru Granth Sahib' started in 1603 and ended in 1604. After this, the first festival of light was organized. Later some mischievous elements complained against the Mughal ruler Akbar Badshah for editing the Guru Granth Sahib. It is said that this book has been written against Islam. However, when Akbar learned the reality and came to know about Guruvani's greatness, he regretted it by sending 51 pieces.

After this, Jahangir came to power. Martyred in 1606 on Jahangir's orders. According to the law of 'Yasa and politics' of that time, a person was martyred without spilling blood on the earth.

Guru Arjun Dev Ji was seated on a hot pan and hot sand was poured over his body. When Guru Ji's body burned badly, he was sent to bathe in the Ravi river in cold water. At the same time, Guru Ji's sacred body became extinct. Today is the Gurudwara Dera Sahib at this place. This place is now in Pakistan. Guru Arjun Dev Ji was the first martyr of Sikhism.

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