Sri Guru Ram Das Ji Prakash Parv History-श्री गुरु राम दास जी प्रकाश पर्व इतिहास- - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Sunday, 26 April 2020

Sri Guru Ram Das Ji Prakash Parv History-श्री गुरु राम दास जी प्रकाश पर्व इतिहास-

गुरु रामदास सिखों के चौथे गुरु थे और उनका जन्म 9 अक्टूबर 1534 में हुआ था. उन्होंने अपने समय में कई ऐसे काम किए जिससे सिखों का मार्गदर्शन हुआ और इस प्रथा को कैसे आगे बढ़ाना है का भी पता चला. आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं गुरु रामदास जी के बारे में ओत उनके द्वारा किए गए प्रमुख कार्यों को.

गुरु रामदास का जन्म 9 अक्टूबर, 1534 ई. को हुआ था और वे सिखों के चौथे गुरु थे. इन्होंने अमृतसर नामक शहर की स्थापना की थी और इन्हीं के जन्मदिवस पर प्रकाश पर्व या गुरुपर्व मनाया जाता है. क्या आप जनते हैं कि अमृतसर पहले रामदासपुर के नाम से जाना जाता था. आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते है गुरु रामदास और उनके द्वारा किए गए कार्यों के बारे में.

गुरु रामदास जी को गुरु का पद किसने दिया?

गुरु रामदास जी के बचपन का नाम जेठा था. इनका जन्म 9 अक्टूबर, 1534 को चूना मंडी जो अब लाहोर में है, हुआ था. इनके पिता हरिदास और माता अनूप देवी जी थी. गुरु रामदास जी का विवाह गुरु अमरदास जी की पुत्री बीबी बानो से हुआ था. जेठा जी की भक्ति भाव को देखकर गुरु अमरदास ने 1 सितम्बर 1574 को गुरु की उपाधि दी और उनका नाम बदलकर गुरु रामदास रखा. यानी रामदास जी ने सिख धर्म के सबसे प्रमुख पद गुरु को 1 सितम्बर, 1574 ई. में प्राप्त किया था और इस पद पर वे 1 सितम्बर, 1581 ई. तक बने रहे थे. उन्होंने 1577 ई. में 'अम्रत सरोवर' नामक एक नये नगर की स्थापना की थी, जो आगे चलकर अमृतसर के नाम से प्रसिद्ध हुआ.


गुरु रामदास जी के कार्य

- गुरु रामदास जी ने सिख धर्म के लोगो के विवाह के लिए आनंद कारज 4 फेरे (लावा) की रचना की और सिक्खों को उनका पालन और गुरुमत मर्यादा के बारे में बताया. यानी गुरु रामदास जी ने सिक्ख धर्म के लिए एक नयी विवाह प्रणाली को प्रचलित किया.

- गुरु रामदास जी ने अपने गुरुओं के द्वारा दी गई लंगर प्रथा को आगे बढ़ाया.

- उन्होंने पवित्र सरोवर 'सतोषसर' की खुदाई भी आरंभ करवाई थी.

- इन्हीं के समय में लोगों से 'गुरु' के लिए चंदा या दान लेना शुरू हुआ था. इतने अच्छे स्वभाव के व्यक्ति होने के कारण सम्राट अकबर भी उनका सम्मान करता था.

- क्या आप जानते हैं कि सम्राट अशोक ने गुरु रामदास जी के कहने पर एक वर्ष तक पंजाब में लगान नहीं लिया था.

- उनके गीतों में से लावन एक गीत है जिसे सिख विवाह समारोह के दौरान गाया जाता है.

- गुरु हरमंदिर साहिब यानी 'स्वर्ण मंदिर' की नींव भी इनके कार्यकाल में रखी गई थी.


- इन्होंने ही स्वर्ण मंदिर के चारों और की दिशा में द्वार बनवाए थे. क्या आप इन द्वारों के अर्थ के बारे में जानते हैं? इन द्वारों का अर्थ है कि यह मंदिर हर धर्म, जाति, लिंग के व्यक्ति के लिए खुला है और कोई भी यहां कभी भी किसी भी वक्त आ जा सकता है.

- गुरु रामदास जी ने धार्मिक यात्रा के प्रचलन को बढ़ावा दिया था.

- क्या आप जानते हैं कि गुरु रामदास जी ने अपने कार्यकाल के दौरान 30 रागों में 638 भजनों का लेखन किया था.

- 31 अष्टपदी और 8 वारां हैं जो श्री गुरु ग्रंथ साहिब में अंकित हैं.

- गुरु रामदास जी ने अपने सबसे छोटे बेटे अर्जन देव को पाँचवें नानक की उपाधि सौंपी. यानी इनके बाद गुरु की गद्दी वंश - परंपरा में चलने लगी.

- 1 सितम्बर, 1581 को गुरु रामदास जी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था.

ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि गुरु रामदास एक महान गुरु थे जिनके जन्मदिवस पर प्रकाश पर्व या गुरुपर्व मनाया जाता है.
Guru Ramdas was the fourth teacher of the teachings and was born on 9 October 1534. He did many such works in his time that guided the Sikhs and also learned how to carry on this practice. Let us study through this article about Guru Ramdas ji and the major works done by him.

Guru Ramdas was born on 9 October, 1534 AD. And was the fourth Guru of the Sikhs. He founded the city in Amritsar and celebrated Prakash Parva or Guruparva on his birthday. Do you know that Amritsar was earlier known as Ramdaspur. Let us study through this article about Guru Ramdas and his work.

Who gave Guru Ramdas ji the post of Guru?

The name of Guru Ramdas ji's childhood was Jetha. He was born on October 9, 1534 in Lime Mandi, now in Lahore. His father was Haridas and mother Anup Devi. Guru Ramdas Ji was married to Bibi Bano, daughter of Guru Amardas Ji. Seeing the devotion of Jetha ji, Guru Amardas gave the title of Guru on 1 September 1574 and changed his name to Guru Ramdas. That is, Ramdas ji taught the most important post of the Guru on 1 September 1574 AD. And he received this post in 1 September 1581 AD. Stayed till He founded 1577 AD. A new city named 'Amrat Sarovar' was established in the city, which later became famous as Amritsar.


Works of Guru Ramdas ji

- Guru Ramdas Ji composed the Anand Karaj 4 Phere (Lava) for the marriage of the people of religion and told the coins about their observance and Gurmat Maryada. That is, Guru Ramdas Ji introduced a new marriage system for Sikhism.

- Guru Ramdas Ji carried forward the langar practice given by his gurus.

- He also started the excellence of the holy lake 'Satoshars'.

At the same time people started receiving donations or donations for 'Guru'. Being a very good-natured person, Abhi Akbar also respected him.

Do you know that Emperor Ashoka did not take rent in Punjab for a year at the behest of Guru Ramdas ji.

- Among his songs, Lavan is a song which gets married during the teaching ceremony.

- The foundation of Guru Harmandir Sahib i.e. 'Golden Temple' was also laid.


- Was he building gates in the direction of the Golden Temple. Do you know the meaning of these gates? These gates mean that this temple is open to anyone of all religions, caste, gender and anyone can come here anytime.

- Guru Ramdas Ji promoted the practice of religious travel.

Do you know that Guru Ramdas ji during his tenure wrote 638 hymns in 30 ragas.

- There are 31 Ashtapadi and 8 Varanas which are in Sri Guru Granth Sahib.

- Guru Ramdas Ji handed over the title of fifth Nanak to his youngest son Arjun Dev. That is, after him, the throne of Guru started walking in the lineage tradition.

- On September 1, 1581, Guru Ramdas ji said goodbye to this world.

It would not be wrong to say that Guru Ramdas was a great Guru whose birthday is celebrated as Prakash Parva or Guruparva.

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