Story of Rameshwaram Jyotirlinga रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग की कहानी (one of dham of char dham/चार धाम में से एक) - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Thursday, 23 April 2020

Story of Rameshwaram Jyotirlinga रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग की कहानी (one of dham of char dham/चार धाम में से एक)

रामेश्वरम् के विख्यात मंदिर की स्थापना के बारें में यह रोचक कहानी कही जाती है। सीताजी को छुड़ाने के लिए राम ने लंका पर चढ़ाई की थी। उन्होने लड़ाई के बिना सीताजी को छुड़वाने का बहुत प्रयत्न किया, पर जब राम सफलता न मिली तो विवश होकर उन्होने युद्ध किया। इस युद्ध में रावण और उसके सब साथी राक्षस मारे गये। रावण भी मारा गया; और अन्ततः सीताजी को मुक्त कराकर श्रीराम वापस लौटे। इस युद्ध हेतु राम को वानर सेना सहित सागर पार करना था, जो अत्यधिक कठिन कार्य था।
रावण भी साधारण राक्षस नहीं था। वह पुलस्त्य महर्षि का नाती था। चारों वेदों का जाननेवाला था और था शिवजी का बड़ा भक्त। इस कारण राम को उसे मारने के बाद बड़ा खेद हुआ। ब्रह्मा-हत्या का पाप उन्हें लग गया। इस पाप को धोने के लिए उन्होने रामेश्वरम् में शिवलिंग की स्थापना करने का निश्चय किया। यह निश्चय करने के बाद श्रीराम ने हनुमान को आज्ञा दी कि काशी जाकर वहां से एक शिवलिंग ले आओ। हनुमान पवन-सुत थे। बड़े वेग से आकाश मार्ग से चल पड़े। लेकिन शिवलिंग की स्थापना की नियत घड़ी पास आ गई। हनुमान का कहीं पता न था। जब सीताजी ने देखा कि हनुमान के लौटने मे देर हो रही है, तो उन्होने समुद्र के किनारे के रेत को मुट्ठी में बांधकर एक शिवलिंग बना दिया। यह देखकर राम बहुत प्रसन्न हुए और नियम समय पर इसी शिवलिंग की स्थापना कर दी। छोटे आकार का सही शिवलिंग रामनाथ कहलाता है।

 ओर श्रीलंका को जाता है
बाद में हनुमान के आने पर पहले छोटे प्रतिष्ठित छोटे शिवलिंग के पास ही राम ने काले पत्थर के उस बड़े शिवलिंग को स्थापित कर दिया। ये दोनों शिवलिंग इस तीर्थ के मुख्य मंदिर में आज भी पूजित हैं। यही मुख्य शिवलिंग ज्योतिर्लिंग है।




सेतु का पौराणिक संदर्भ
पूरे भारत, दक्षिण पूर्व एशिया और पूर्व एशिया के कई देशों में हर साल दशहरे पर और राम के जीवन पर आधारित सभी तरह के नृत्य-नाटकों में सेतु बंधन का वर्णान किया जाता है। राम के बनाए इस पुल का वर्णन रामायण में तो है ही, महाभारत में भी श्री राम के नल सेतु का जिक्र आया है। कालीदास की रघुवंश में सेतु का वर्णन है। अनेक पुराणों में भी श्रीरामसेतु का विवरण आता है। एन्साइक्लोपीडिया ब्रिटेनिका में इसे एडम्स ब्रिज के साथ-साथ राम सेतु कहा गया है। नासा और भारतीय सेटेलाइट से लिए गए चित्रों में धनुषकोडि से जाफना तक जो एक पतली सी द्वीपों की रेखा दिखती है, उसे ही आज रामसेतु के नाम से जाना जाता है। इसी पुल को बाद में एडम्स ब्रिज का नाम मिला। यह सेतु तब पांच दिनों में ही बन गया था। इसकी लंबाई १०० योजन व चौड़ाई १० योजन थी। इसे बनाने में उच्च तकनीक का प्रयोग किया गया था।

This interesting story is told about the establishment of the famous temple of Rameshwaram. Rama marched to Lanka to rescue Sita. He tried very hard to get Sita ji rescued without fighting, but when Ram did not succeed, he was forced to fight. In this war, Ravana and all his fellow demons were killed. Ravana was also killed; And finally after returning Sita, Shri Ram returned. For this war, Ram had to cross the ocean with the army of monkeys, which was a very difficult task.
Ravana was also not an ordinary demon. He was the grandson of Pulastya Maharishi. Was a knowledgeer of the four Vedas and was a great devotee of Shiva. For this reason Rama was very sorry after killing him. He incurred the sin of killing Brahma. To wash away this sin, he decided to establish a Shivling at Rameshwaram. After deciding this, Shriram ordered Hanuman to go to Kashi and bring a Shivling from there. Hanuman was Pawan Sut. Walked through the sky with great speed. But the fixed watch of Shivling was established. Hanuman did not know anywhere. When Sitaji saw that it was getting late for Hanuman's return, he tied the sand of the sea shore in a fist and made it a Shivling. Ram was very happy to see this and established this Shivling at the time of rule. The small size of the right Shivalinga is called Ramnath.


 And goes to Sri Lanka
Later on Hanuman's arrival, Rama installed that big Shivling of black stone near the first small iconic Shivling. Both these Shivling are worshiped in the main temple of this shrine even today. This is the main Shivling Jyotirlinga.

Mythological reference to bridge
Setu Bandhan is recited in all countries of India, South East Asia and East Asia on Dussehra and in all kinds of dance-dramas based on the life of Rama. The description of this bridge built by Ram is mentioned in the Ramayana, even in Mahabharata, there is a mention of Shri Rama's tap bridge. Kalidasa's Raghuvansha describes the bridge. The description of Sri Ram Sethu is also found in many Puranas. In the Encyclopडियाdia Britannica, it has been called the Ram Bridge along the Adams Bridge. A thin island line from Dhanushkodi to Jaffna in pictures taken from NASA and Indian satellites is known today as Ram Sethu. This bridge later got the name of Adams Bridge. This bridge was built within five days. Its length was 100 plan and width was 10 plan. High technology was used to make it.

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