Story of Sheetla Mata-शीतला माता की कहानी - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Tuesday, 28 April 2020

Story of Sheetla Mata-शीतला माता की कहानी

शीतला माता की कहानी :-


यह कथा बहुत पुरानी है। एक बार शीतला माता ने सोचा कि चलो आज देखु कि धरती पर मेरी पूजा कौन करता है, कौन मुझे मानता है। यही सोचकर शीतला माता धरती पर राजस्थान के डुंगरी गाँव में आई और देखा कि इस गाँव में मेरा मंदिर भी नही है, ना मेरी पुजा है।

माता शीतला गाँव कि गलियो में घूम रही थी, तभी एक मकान के ऊपर से किसी ने चावल का उबला पानी (मांड) निचे फेका। वह उबलता पानी शीतला माता के ऊपर गिरा जिससे शीतला माता के शरीर में (छाले) फफोले पड गये। शीतला माता के पुरे शरीर में जलन होने लगी।

शीतला माता गाँव में इधर उधर भाग भाग के चिल्लाने लगी अरे में जल गई, मेरा शरीर तप रहा है, जल रहा हे। कोई मेरी मदद करो। लेकिन उस गाँव में किसी ने शीतला माता कि मदद नही करी। वही अपने घर के बहार एक कुम्हारन (महिला) बेठी थी। उस कुम्हारन ने देखा कि अरे यह बूढी माई तो बहुत जल गई है। इसके पुरे शरीर में तपन है। इसके पुरे शरीर में (छाले) फफोले पड़ गये है। यह तपन सहन नही कर पा रही है।

तब उस कुम्हारन ने कहा है माँ तू यहाँ आकार बैठ जा, मैं तेरे शरीर के ऊपर ठंडा पानी डालती हूँ। कुम्हारन ने उस बूढी माई पर खुब ठंडा पानी डाला और बोली है माँ मेरे घर में रात कि बनी हुई राबड़ी रखी है थोड़ा दही भी है। तू दही-राबड़ी खा लें। जब बूढी माई ने ठंडी (जुवार) के आटे कि राबड़ी और दही खाया तो उसके शरीर को ठंडक मिली।

तब उस कुम्हारन ने कहा आ माँ बेठ जा तेरे सिर के बाल बिखरे हे ला में तेरी चोटी गुथ देती हु और कुम्हारन माई कि चोटी गूथने हेतु (कंगी) कागसी बालो में करती रही। अचानक कुम्हारन कि नजर उस बुडी माई के सिर के पिछे पड़ी तो कुम्हारन ने देखा कि एक आँख वालो के अंदर छुपी हैं। यह देखकर वह कुम्हारन डर के मारे घबराकर भागने लगी तभी उसबूढी माई ने कहा रुक जा बेटी तु डर मत। मैं कोई भुत प्रेत नही हूँ। मैं शीतला देवी हूँ। मैं तो इस घरती पर देखने आई थी कि मुझे कौन मानता है। कौन मेरी पुजा करता है। इतना कह माता चारभुजा वाली हीरे जवाहरात के आभूषण पहने सिर पर स्वर्णमुकुट धारण किये अपने असली रुप में प्रगट हो गई।

माता के दर्शन कर कुम्हारन सोचने लगी कि अब में गरीब इस माता को कहा बिठाऊ। तब माता बोली है बेटी तु किस सोच मे पड गई। तब उस कुम्हारन ने हाथ जोड़कर आँखो में आसु बहते हुए कहा- है माँ मेरे घर में तो चारो तरफ दरिद्रता है बिखरी हुई हे में आपको कहा बिठाऊ। मेरे घर में ना तो चौकी है, ना बैठने का आसन। तब शीतला माता प्रसन्न होकर उस कुम्हारन के घर पर खड़े हुए गधे पर बैठ कर एक हाथ में झाड़ू दूसरे हाथ में डलिया लेकर उस कुम्हारन के घर कि दरिद्रता को झाड़कर डलिया में भरकर फेक दिया और उस कुम्हारन से कहा है बेटी में तेरी सच्ची भक्ति से प्रसन्न हु अब तुझे जो भी चाहिये मुझसे वरदान मांग ले।

तब कुम्हारन ने हाथ जोड़ कर कहा है माता मेरी इक्छा है अब आप इसी (डुंगरी) गाँव मे स्थापित होकर यही रहो और जिस प्रकार आपने आपने मेरे घर कि दरिद्रता को अपनी झाड़ू से साफ़ कर दूर किया ऐसे ही आपको जो भी होली के बाद कि सप्तमी को भक्ति भाव से पुजा कर आपको ठंडा जल, दही व बासी ठंडा भोजन चढ़ाये उसके घर कि दरिद्रता को साफ़ करना और आपकी पुजा करने वाली नारि जाति (महिला) का अखंड सुहाग रखना। उसकी गोद हमेशा भरी रखना। साथ ही जो पुरुष शीतला सप्तमी को नाई के यहा बाल ना कटवाये धोबी को पकड़े धुलने ना दे और पुरुष भी आप पर ठंडा जल चढ़कर, नरियल फूल चढ़ाकर परिवार सहित ठंडा बासी भोजन करे उसके काम धंधे व्यापार में कभी दरिद्रता ना आये।

तब माता बोली तथाअस्तु है बेटी जो तुने वरदान मांगे में सब तुझे देती हु । है बेटी तुझे आर्शिवाद देती हूँ कि मेरी पुजा का मुख्य अधिकार इस धरती पर सिर्फ कुम्हार जाति का ही होगा। तभी उसी दिन से डुंगरी गाँव में शीतला माता स्थापित हो गई और उस गाँव का नाम हो गया शील कि डुंगरी। शील कि डुंगरी भारत का एक मात्र मुख्य मंदिर है। शीतला सप्तमी वहाँ बहुत विशाल मेला भरता है। इस कथा को पड़ने से घर कि
दरिद्रता का नाश होने के साथ सभी मनोकामना पुरी होती है।

Story of Sheetla Mata: -


This story is very old. Once, Sheetla Mata thought that let's see who worships me on earth, who believes in me. Thinking of this, Sheetla Mata came to earth in Dungri village of Rajasthan and saw that there is not even a temple in this village, nor is my worship.

Mata Shitala was roaming in the galio of the village, when someone threw boiled rice (mand) at the top of a house. The boiling water fell on Sheetla Mata, causing blisters (blisters) in Sheetla Mata's body. Sheetla Mata's entire body started burning.

In the village of Sheetla Mata, there shouted away from here and there, in the village, my body is burning, burning, burning. somebody help me. But nobody in that village helped Sheetla Mata. She was a kumharan (woman) daughter outside her home. The potter saw that this old lady is very burnt. There is heat in its entire body. Blisters (blisters) have occurred all over its body. She is unable to bear this heat.

Then the potter said, "Mother, sit here, I pour cold water over your body." The potter poured cold water on the old lady and said, "Mother has kept a rabri made of night in my house. There is also a little curd." You should eat curd and rabri. When old Mai ate cold (juwar) flour that rabri and curd, her body got cold.

Then the potter said, “Mother, sit on your hair and spread your braid in LA, and the kumharan Mai’s braid (kangi) is used in Kagasi hairs to knead. Suddenly, the potter's eyes fell on the back of that Buddy Mai's head, and the potter saw that one eye was hidden inside. Seeing this, the potter started running in fear due to fear, then her old mother said, "Stop, daughter, don't be afraid." I am not a ghost I am Shitala Devi. I had come to this house to see who believed me. Who worships me Saying this, Mata appeared in her true form wearing a golden crown on her head wearing diamond jewels with four-breasted jewels.

After seeing the mother, the potter started thinking that now the poor said this mother. Then mother said, what daughter have you thought about? Then that potter with folded hands, flowing tears in the eyes, said, "Mother, there is poverty in my house scattered around me and you are told to sit." There is neither an outpost nor a seat in my house. Then Mother of Sheetla was pleased and sitting on the donkey standing at the potter's house, took the broom in one hand and threw the poles in the house of the potter and threw it into the basket and told the potter with your true devotion in the daughter. Happy, now whatever you want, ask me for a boon.

Then Kumharan folded his hands and said, "Mother is my wish, now you stay here in this (Dungri) village and stay the same, and the way you cleared away the impoverishment of my house with your broom, just like you did after Holi." Offer cold water, curd and stale cold food to the Saptami and worship it with devotion, clearing the poverty of her house and keeping the unbroken beauty of the Nari caste (woman) who worship you. Always keep his lap full. Also, the man who does not let Shitala Saptami get his hair cut from the hairdresser is washed away, and the men should also offer cold stale food, including cold water, cereal flowers, and family, and their family business should never be impoverished.

Then the mother said, and there is a daughter, who gives you everything in the boon. Daughter, I thank you that only the potter caste will have the right to my worship on this earth. Then from the same day, Sheetla Mata was established in Dungri village and the name of that village became Sheel Ki Dungri. Sheel Ki Dungri is the only main temple in India. Sheetla Saptami fills a huge fair there. Home of this story
With impoverishment, all wishes are fulfilled.

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