Story related to Dhanteras-धनतेरस से जुड़ी कथा - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Sunday, 26 April 2020

Story related to Dhanteras-धनतेरस से जुड़ी कथा

शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान धनवंतरी का जन्म हुआ था। इसलिए इसे धनतेरस के त्योहार के रुप में मनाया जाता है। धनवंतरी अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है। लेकिन धनतेरस से जुड़ी कई कथाएं हैं जिनसे पता चलता है कि दीपावली से पहले धनतेरस क्यों मनाया जाता है और धनतेरस का हमारे जीवन में क्या महत्व है। इन कथा कथाओं से यह भी आप जान जाएंगे कि धनतेरस को धन तेरह गुणा करने वाला क्यों कहा जाता है।

इसलिए दीपावली से दो दिन पहले मनाते हैं धनतेरस
शास्त्रों के अनुसार धनतेरस के दिन ही भगवान धनवंतरी हाथों में स्वर्ण कलश लेकर सागर मंथन से उत्पन्न हुए। धनवंतरी ने कलश में भरे हुए अमृत से देवताओं को अमर बना दिया। धनवंतरी के उत्पन्न होने के दो दिनों बाद देवी लक्ष्मी प्रकट हुई। इसलिए दीपावली से दो दिन पहले धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान धनवंतरी देवताओं के वैद्य हैं। इनकी भक्ति और पूजा से आरोग्य सुख यानी स्वास्थ्य लाभ मिलता है। मान्यता है कि भगवान धनवंतरी विष्णु के अंशावतार हैं। संसार में चिकित्सा विज्ञान के विस्तार और प्रसार के लिए ही भगवान विष्णु ने धनवंतरी का अवतार लिया था।

जब धनतेरस पर हुआ धन तेरह गुणा

धनतेरस से जुड़ी एक दूसरी कथा है कि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन देवताओं के कार्य में बाधा डालने के कारण भगवान विष्णु ने असुरों के गुरू शुक्राचार्य की एक आंख फोड़ दी थी। कथा के अनुसार, देवताओं को राजा बलि के भय से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और राजा बलि के यज्ञ स्थल पर पहुंच गये। शुक्राचार्य ने वामन रूप में भी भगवान विष्णु को पहचान लिया और राजा बलि से आग्रह किया कि वामन कुछ भी मांगे उन्हें इंकार कर देना। वामन साक्षात भगवान विष्णु हैं। वो देवताओं की सहायता के लिए तुमसे सब कुछ छीनने आये हैं। बलि ने शुक्राचार्य की बात नहीं मानी। वामन भगवान द्वारा मांगी गयी तीन पग भूमि, दान करने के लिए कमण्डल से जल लेकर संकल्प लेने लगे। बलि को दान करने से रोकने के लिए शुक्राचार्य राजा बलि के कमण्डल में लघु रूप धारण करके प्रवेश कर गये। इससे कमण्डल से जल निकलने का मार्ग बंद हो गया। वामन भगवान शुक्रचार्य की चाल को समझ गये। भगवान वामन ने अपने हाथ में रखे हुए कुशा को कमण्डल में ऐसे रखा कि शुक्राचार्य की एक आंख फूट गयी। शुक्राचार्य छटपटाकर कमण्डल से निकल आये। बलि ने संकल्प लेकर तीन पग भूमि दान कर दिया। इसके बाद भगवान वामन ने अपने एक पैर से संपूर्ण पृथ्वी को नाप लिया और दूसरे पग से अंतरिक्ष को। तीसरा पग रखने के लिए कोई स्थान नहीं होने पर बलि ने अपना सिर वामन भगवान के चरणों में रख दिया। बलि दान में अपना सब कुछ गंवा बैठा। इस तरह बलि के भय से देवताओं को मुक्ति मिली और बलि ने जो धन-संपत्ति देवताओं से छीन ली थी उससे कई गुणा धन-संपत्ति देवताओं को मिल गयी। इस उपलक्ष्य में भी धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। 


According to the scriptures, Lord Dhanvantari was born on this day. Hence it is celebrated as the festival of Dhanteras. Dhanvantari appeared with nectar urn, so it is a tradition to buy utensils on this day. But there are many stories related to Dhanteras which shows why Dhanteras is celebrated before Diwali and what is the importance of Dhanteras in our life. From these fables, you will also know why Dhanteras is said to be a multiplier of thirteen wealth.

That's why Dhanteras is celebrated two days before Deepawali
According to the scriptures, on the day of Dhanteras, Lord Dhanvantari was born by churning the ocean with a golden urn in his hands. Dhanvantari made the gods immortal with the nectar filled in the urn. Goddess Lakshmi appeared two days after Dhanvantari was born. Hence, the festival of Dhanteras is celebrated two days before Deepawali. According to the scriptures, Lord Dhanvantari is the physician of the gods. Their devotion and worship give them health benefits. It is believed that Lord Dhanvantari is the part of Vishnu. Lord Vishnu incarnated Dhanvantari for the expansion and spread of medical science in the world.

When the wealth on Dhanteras was thirteen times

There is another story related to Dhanteras that Lord Vishnu broke an eye of Shukracharya, the guru of Asuras, because of hindering the work of the gods on the day of Kartik Krishna Trayodashi. According to the legend, Lord Vishnu took the Vamana avatar to relieve the gods from the fear of King Bali and reached the sacrificial fire of King Bali. Shukracharya also recognized Lord Vishnu as Vamana and urged King Bali to deny him anything that Vaman asked for. Vamana is the true God Vishnu. They have come to take away everything from you to help the gods. Bali did not listen to Shukracharya. Vamana started taking pledges by taking water from the lotus to donate three pagas of land sought by God. Shukracharya entered into the sacrifice of King Bali in a miniature form to prevent him from donating the sacrifice. Due to this, the road of drainage from the Kamandal was closed. Vamana understood the tricks of Lord Shukracharya. Lord Vamana kept Kusha in his hand in a circle so that one eye of Shukracharya got burst. Shukracharya came out of the corridor by flickering. Bali sacrificed three pagas of land. After this, Lord Vamana measured the entire earth with one foot and space with the second step. Having no place to keep the third step, Bali laid his head at the feet of the Lord Vamana. He lost everything in sacrifice. In this way, the Gods were freed from the fear of sacrifice and the wealth that the sacrifice had taken away from the gods was multiplied by the gods. The festival of Dhanteras is also celebrated on this occasion.

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