Ujjain Mahakumbh one of four mahakhumbh-उज्जैन महाकुंभ चार में से एक महाकुंभ - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Thursday, 23 April 2020

Ujjain Mahakumbh one of four mahakhumbh-उज्जैन महाकुंभ चार में से एक महाकुंभ


कुंभ की कथा: दरअसल, अमृत पर अधिकार को लेकर देवता और दानवों के बीच लगातार बारह दिन तक युद्ध हुआ था। जो मनुष्यों के बारह वर्ष के समान हैं। अतएवंभ भी बारह होते हैं। उनमें से चार कुंभ पृथ्वी पर होते हैं और गूंभ देवलोक में होते हैं।

समुद्र मंथन की कथा में कहा गया है कि कुंभ पर्व का सीधा सम्बन्ध तारों से है। शरण कलश को स्वर्गलोक तक ले जाने में जयंत को 12 दिन लगे। देवों का एक दिन मनुष्यों के 1 वर्ष के बराबर है। इसीलिए तारों के क्रम के अनुसार हर 12 वें वर्ष कुंभ पर्व के विभिन्न तीर्थ स्थानों पर आयोजित किया जाता है।

युद्ध के दौरान, सूर्य, चंद्र और शनि जैसे देवताओं ने कलश की रक्षा की थी, इसलिए जब उस समय के वर्तमान राशि चक्र की रक्षा करने वाले चंद्र-सूर्य ग्रह आते हैं, तो कुंभ होता है और हर तीन साल में चार पवित्र स्थानों पर कुंभ मेला होता है। नियमित अंतराल पर आयोजित किया जाता है।

अर्थात्, अमृत की बूंदों को फैलाने के दौरान, सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति की स्थिति के विशिष्ट योग के अवसर हैं, जहां इन राशियों में घरों के संयोग पर कुंभ उत्सव का आयोजन किया जाता है। इस अमृत कलश की सुरक्षा में सूर्य, गुरु और चंद्रमा द्वारा विशेष प्रयास किए गए थे। इसीलिए इन घरों में उन विशिष्ट परिस्थितियों में कुंभ पर्व मनाने की परंपरा है।

अमृत ​​की ये बूंदें चार स्थानों पर गिरीं: - गंगा नदी (प्रयाग, हरिद्वार), गोदावरी नदी (नासिक), क्षिप्रा नदी (उज्जैन)। सभी नदियाँ गंगा से संबंधित हैं। गोदावरी को गोमती गंगा कहा जाता है। क्षिप्रा नदी को उत्तरी गंगा के रूप में भी जाना जाता है, जहाँ गंगा गंगेश्वर की पूजा की जाती है।


Legend of Kumbh: Actually, there was a war for twelve consecutive days between the deity and the demons over the authority over nectar. Which are like twelve years of humans. There are also twelve. Four of them are on Kumbh Earth and the Gumbhas are in Devaloka.


The story of Samudra Manthan states that the Kumbh festival is directly related to the stars. It took Jayant 12 days to take the asylum to Swargalok. One day of Devas is equal to 1 year of humans. That is why every 12th year according to the order of stars is held at different pilgrimage places of Kumbh festival.

During the war, the gods like Surya, Chandra and Saturn had protected the Kalash, so when the lunar-sunset planets which protect the current zodiac signs of that time, then the Kumbh is done and every three years at all the holy places. . At regular intervals, a fair is organized.

That is, during the time of spilling the drops of nectar, there are opportunities for specific yoga of the position of Sun, Moon and Jupiter, where the Kumbh festival is organized on the coincidence of houses in these zodiac signs. In the protection of this nectar urn, special efforts were made by Surya, Guru and Moon. That is why these houses have a tradition of celebrating Kumbh festival in those specific situations.

These drops of nectar fell in four places: - Ganges River (Prayag, Haridwar), Godavari River (Nashik), Kshipra River (Ujjain). All rivers belong to Ganga. Godavari is called as Gomti Ganga. The river Kshipra is also known as Northern Ganga, where Ganges Gangeswar is worshiped.
उज्जैन में कुंभ: सिंह राशि में बृहस्पति एवं मेष राशि में सूर्य का प्रवेश होने पर यह पर्व उज्जैन में होता है। इसके अलावा कार्तिक अमावस्या के दिन सूर्य और चन्द्र के साथ होने पर एवं बृहस्पति के तुला राशि में प्रवेश होने पर मोक्षदायक कुंभ उज्जैन में आयोजित होता है।

In Ujjain: When the Sun enters Jupiter and Aries in the Leo zodiac, it happens in the mountain. In addition, the salvation is held in Kumbhajain on the day of Kartik Amavasya when it is with the sun and moon and when Jupiter enters Libra.

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