Vishnu Temple in Tiruanantpuram, Kerala-केरल के तिरुअनंतपुरम में विष्णु मंदिर - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Friday, 24 April 2020

Vishnu Temple in Tiruanantpuram, Kerala-केरल के तिरुअनंतपुरम में विष्णु मंदिर

कभी भरत को सोने की चिड़िया कहा जाता था। यहां के हर मंदिर और मंदिर में इतना सोना और धन होने की बात की गई थी जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। लेकिन आपको बता दें कि देश के एक ऐसे मंदिर के बारे में जहां बहुत धन और सोना है। कुछ साल पहले, यह मंदिर अपने अथाह खजाने के बारे में दुनिया भर में चर्चा में था। आइए आपको बताते हैं कि भगवान विष्णु का यह मंदिर कहां है और इस मंदिर का इतिहास क्या रहा है।





पद्मनाभस्वामी मंदिर केरल के तिरुवनंतपुरम में मौजूद भगवान विष्णु का प्रसिद्ध मंदिर है। भारत के प्रमुख वैष्णव मंदिरों में शामिल यह ऐतिहासिक मंदिर तिरुवनंतपुरम के पर्यटन स्थलों में से एक है। यह मंदिर अपने खजाने के लिए लगातार चर्चा में बना हुआ है। पद्मनाभस्वामी मंदिर केरल के तिरुवनंतपुरम में मौजूद भगवान विष्णु का प्रसिद्ध मंदिर है। भारत के प्रमुख वैष्णव मंदिरों में शामिल यह ऐतिहासिक मंदिर तिरुवनंतपुरम के पर्यटन स्थलों में से एक है। यह मंदिर अपने खजाने के लिए लगातार चर्चा में बना हुआ है।
पद्मनाभस्वामी मंदिर केरल के तिरुवनंतपुरम में मौजूद भगवान विष्णु का प्रसिद्ध मंदिर है। भारत के प्रमुख वैष्णव मंदिरों में शामिल यह ऐतिहासिक मंदिर तिरुवनंतपुरम के पर्यटन स्थलों में से एक है। यह मंदिर अपने खजाने के लिए लगातार चर्चा में बना हुआ है।


पद्मनाभस्वामी मंदिर त्रावणकोर के राजाओं द्वारा बनाया गया था। 9 वीं शताब्दी के ग्रंथों में भी इसका उल्लेख है, लेकिन मंदिर का मौजूदा स्वरूप 18 वीं शताब्दी में बनाया गया था। 1750 में, महाराज मार्तंड वर्मा ने खुद को पद्मनाभ दास के सामने प्रकट किया। इसके बाद शाही परिवार ने खुद को भगवान पद्मनाभ को समर्पित कर दिया। पद्मनाभस्वामी मंदिर त्रावणकोर के राजाओं द्वारा बनाया गया था। 9 वीं शताब्दी के ग्रंथों में भी इसका उल्लेख है, लेकिन मंदिर का मौजूदा स्वरूप 18 वीं शताब्दी में बनाया गया था। 1750 में, महाराज मार्तंड वर्मा ने खुद को पद्मनाभ दास के सामने प्रकट किया। इसके बाद शाही परिवार ने खुद को भगवान पद्मनाभ को समर्पित कर दिया।
पद्मनाभस्वामी मंदिर त्रावणकोर के राजाओं द्वारा बनाया गया था। 9 वीं शताब्दी के ग्रंथों में भी इसका उल्लेख है, लेकिन मंदिर का मौजूदा स्वरूप 18 वीं शताब्दी में बनाया गया था। 1750 में, महाराज मार्तंड वर्मा ने खुद को पद्मनाभ दास के सामने प्रकट किया। इसके बाद शाही परिवार ने खुद को भगवान पद्मनाभ को समर्पित कर दिया।

ऐसा माना जाता है कि इसी कारण से त्रावणकोर के राजाओं ने अपनी संपत्ति पद्मनाभ मंदिर को सौंप दी थी। त्रावणकोर के राजाओं ने 1947 तक शासन किया था। आजादी के बाद इसे भारत में मिला दिया गया था, लेकिन पद्मनाभ स्वामी मंदिर को सरकार ने नहीं लिया। इसे त्रावणकोर के शाही परिवार के लिए छोड़ दिया गया था। ऐसा माना जाता है कि इसी कारण से त्रावणकोर के राजाओं ने अपनी संपत्ति पद्मनाभ मंदिर को सौंप दी थी। त्रावणकोर के राजाओं ने 1947 तक शासन किया था। आजादी के बाद इसे भारत में मिला दिया गया था, लेकिन पद्मनाभ स्वामी मंदिर को सरकार ने नहीं लिया। इसे त्रावणकोर के शाही परिवार के लिए छोड़ दिया गया था।
ऐसा माना जाता है कि इसी कारण से त्रावणकोर के राजाओं ने अपनी संपत्ति पद्मनाभ मंदिर को सौंप दी थी। त्रावणकोर के राजाओं ने 1947 तक शासन किया था। आजादी के बाद इसे भारत में मिला दिया गया था, लेकिन पद्मनाभ स्वामी मंदिर को सरकार ने नहीं लिया। इसे त्रावणकोर के शाही परिवार के लिए छोड़ दिया गया था।

तब से, पद्मनाभ स्वामी मंदिर का कामकाज शाही परिवार के तहत एक केंद्रीय ट्रस्ट बोर्ड के नियंत्रण में आ गया है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि जब भारत सरकार हैदराबाद के निज़ाम जैसे देश के शाही परिवारों की संपत्ति को जब्त कर रही थी, तब त्रावणकोर के तत्कालीन राजा ने मंदिर में अपनी संपत्ति को छुपाया होगा। तब से, पद्मनाभ स्वामी मंदिर का कामकाज शाही परिवार के तहत एक केंद्रीय ट्रस्ट बोर्ड के नियंत्रण में आ गया है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि जब भारत सरकार हैदराबाद के निज़ाम जैसे देश के शाही परिवारों की संपत्ति को जब्त कर रही थी, तब त्रावणकोर के तत्कालीन राजा ने मंदिर में अपनी संपत्ति को छुपाया होगा।
तब से, पद्मनाभ स्वामी मंदिर का कामकाज शाही परिवार के तहत एक केंद्रीय ट्रस्ट बोर्ड के नियंत्रण में आ गया है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि जब भारत सरकार हैदराबाद के निज़ाम जैसे देश के शाही परिवारों की संपत्ति को जब्त कर रही थी, तब त्रावणकोर के तत्कालीन राजा ने मंदिर में अपनी संपत्ति को छुपाया होगा।

Bharata was once told by the golden bird. There was talk of having so much gold and wealth in every temple and temple here that everyone is surprised to hear. But let us tell you about one such temple in the country where there is a lot of wealth and gold. A few years ago, this temple was in discussion all over the world about its bottomless treasure. Let us tell you where is this temple of Lord Vishnu and what has been the history of this temple.

Padmanabhaswamy Temple is the famous temple of Lord Vishnu present in Thiruvananthapuram, Kerala. This historic temple included among the major Vaishnava temples of India is one of the tourist destinations of Thiruvananthapuram. This temple remains in constant discussion for its treasure. Padmanabhaswamy Temple is the famous temple of Lord Vishnu present in Thiruvananthapuram, Kerala. This historic temple included among the major Vaishnava temples of India is one of the tourist destinations of Thiruvananthapuram. This temple remains in constant discussion for its treasure.
Padmanabhaswamy Temple is the famous temple of Lord Vishnu present in Thiruvananthapuram, Kerala. This historic temple included among the major Vaishnava temples of India is one of the tourist destinations of Thiruvananthapuram. This temple remains in constant discussion for its treasure.


The Padmanabhaswamy temple was built by the kings of Travancore. It is also mentioned in the texts of the 9th century, but the existing form of the temple was built in the 18th century. In 1750, Maharaj Martand Varma revealed himself to Padmanabha Das. After this the royal family dedicated themselves to Lord Padmanabha. The Padmanabhaswamy temple was built by the kings of Travancore. It is also mentioned in the texts of the 9th century, but the existing form of the temple was built in the 18th century. In 1750, Maharaj Martand Varma revealed himself to Padmanabha Das. After this the royal family dedicated themselves to Lord Padmanabha.
The Padmanabhaswamy temple was built by the kings of Travancore. It is also mentioned in the texts of the 9th century, but the existing form of the temple was built in the 18th century. In 1750, Maharaj Martand Varma revealed himself to Padmanabha Das. After this the royal family dedicated themselves to Lord Padmanabha.

It is believed that for this reason the kings of Travancore handed over their wealth to the Padmanabha temple. The kings of Travancore ruled until 1947. After independence it was merged with India, but the Padmanabha Swamy temple was not taken over by the government. It was left to the royal family of Travancore. It is believed that for this reason the kings of Travancore handed over their wealth to the Padmanabha temple. The kings of Travancore ruled until 1947. After independence it was merged with India, but the Padmanabha Swamy temple was not taken over by the government. It was left to the royal family of Travancore.
It is believed that for this reason the kings of Travancore handed over their wealth to the Padmanabha temple. The kings of Travancore ruled until 1947. After independence it was merged with India, but the Padmanabha Swamy temple was not taken over by the government. It was left to the royal family of Travancore.

Since then, the functioning of the Padmanabha Swamy Temple has come under the control of a Central Trust Board under the royal family. Experts also say that when the Indian government was seizing the wealth of the royal families of a country like the Nizam of Hyderabad, then the then king of Travancore might have hidden his wealth in the temple. Since then, the functioning of the Padmanabha Swamy Temple has come under the control of a Central Trust Board under the royal family. Experts also say that when the Indian government was seizing the wealth of the royal families of a country like the Nizam of Hyderabad, then the then king of Travancore might have hidden his wealth in the temple.
Since then, the functioning of the Padmanabha Swamy Temple has come under the control of a Central Trust Board under the royal family. Experts also say that when the Indian government was seizing the wealth of the royal families of a country like the Nizam of Hyderabad, then the then king of Travancore might have hidden his wealth in the temple.


मंदिर में रखी गई अपार संपत्ति के बारे में कई मान्यताएं हैं। ऐसा कहा जाता है कि पद्मनाभ स्वामी मंदिर का एक और तहखाना अभी तक नहीं खुला है। तहखाने में जो बचता है वह अब तक एक रहस्य बना हुआ है। कहा जाता है कि इस मंदिर के सातवें द्वार को केवल कुछ मंत्रों के उच्चारण से खोला जा सकता है और अगर इसे तोड़ा जाता है तो कुछ अनहोनी हो सकती है, इसीलिए इस दरवाजे को अभी तक नहीं खोला गया है। इस मंदिर की सबसे खास बात यहाँ भगवान विष्णु की एक विशाल मूर्ति है जिसमें भगवान श्रीहरि शेषनाग पर शयन मुद्रा में दर्शन दे रहे हैं।

आपको बता दें कि 2011 में इस मंदिर से बड़ी मात्रा में सोने के आभूषण, सोने-चांदी के सिक्के, गहना-जड़ित मुकुट, मूर्तियां आदि मिले थे। यहां तक ​​कि कुछ हार नौ फीट लंबे और दस किलो वजन के होते हैं। इस पूरे खजाने की कीमत लगभग 5 लाख करोड़ रुपये आंकी गई थी। आपको बता दें कि 2011 में इस मंदिर से बड़ी मात्रा में सोने के आभूषण, सोने-चांदी के सिक्के, गहना-जड़ित मुकुट, मूर्तियां आदि मिले थे। यहां तक ​​कि कुछ हार नौ फीट लंबे और दस किलो वजन के होते हैं। इस पूरे खजाने की कीमत लगभग 5 लाख करोड़ रुपये आंकी गई थी।
आपको बता दें कि 2011 में इस मंदिर से बड़ी मात्रा में सोने के आभूषण, सोने-चांदी के सिक्के, गहना-जड़ित मुकुट, मूर्तियां आदि मिले थे। यहां तक ​​कि कुछ हार नौ फीट लंबे और दस किलो वजन के होते हैं। इस पूरे खजाने की कीमत लगभग 5 लाख करोड़ रुपये आंकी गई थी।

यहाँ पद्मनाभ ने भगवान विष्णु की विश्राम अवस्था को कहा है। पद्मनाभ स्वामी मंदिर के साथ एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु की प्रतिमा सबसे पहले इसी स्थान से मिली थी, जिसके बाद यहां मंदिर का निर्माण किया गया। मंदिर का निर्माण राजा मार्तंड ने करवाया था। यहाँ पद्मनाभ ने भगवान विष्णु की विश्राम अवस्था को कहा है। पद्मनाभ स्वामी मंदिर के साथ एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु की प्रतिमा सबसे पहले इसी स्थान से मिली थी, जिसके बाद यहां मंदिर का निर्माण किया गया। मंदिर का निर्माण राजा मार्तंड ने करवाया था।
यहाँ पद्मनाभ ने भगवान विष्णु की विश्राम अवस्था को कहा है। पद्मनाभ स्वामी मंदिर के साथ एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु की प्रतिमा सबसे पहले इसी स्थान से मिली थी, जिसके बाद यहां मंदिर का निर्माण किया गया। मंदिर का निर्माण राजा मार्तंड ने करवाया था।


मंदिर में एक स्वर्ण स्तंभ भी है जो मंदिर की सुंदरता को बढ़ाता है। मंदिर के गलियारे में कई खंभे हैं जो खूबसूरती से उकेरे गए हैं, जो इसकी भव्यता में चार चाँद लगाते हैं। पुरुषों को धोती और महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। मंदिर में एक स्वर्ण स्तंभ भी है जो मंदिर की सुंदरता को बढ़ाता है। मंदिर के गलियारे में कई खंभे हैं जो खूबसूरती से उकेरे गए हैं, जो इसकी भव्यता में चार चाँद लगाते हैं। पुरुषों को धोती और महिलाओं को मंदिर में प्रवेश के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।
मंदिर में एक स्वर्ण स्तंभ भी है जो मंदिर की सुंदरता को बढ़ाता है। मंदिर के गलियारे में कई खंभे हैं जो खूबसूरती से उकेरे गए हैं, जो इसकी भव्यता में चार चाँद लगाते हैं। पुरुषों को धोती और महिलाओं को मंदिर में प्रवेश के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।

केरल का पद्मनाभस्वामी मंदिर। इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की एक विशाल मूर्ति है, जिसे देखने हर दिन दूर-दूर से हजारों भक्त आते हैं। इस प्रतिमा में भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं। ऐसा माना जाता है कि तिरुवनंतपुरम का नाम अनंत के भगवान के नाम पर रखा गया है। केरल का पद्मनाभस्वामी मंदिर। इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की एक विशाल मूर्ति है, जिसे देखने हर दिन दूर-दूर से हजारों भक्त आते हैं। इस प्रतिमा में भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं। ऐसा माना जाता है कि तिरुवनंतपुरम का नाम अनंत के भगवान के नाम पर रखा गया है।
केरल का पद्मनाभस्वामी मंदिर। इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की एक विशाल मूर्ति है, जिसे देखने हर दिन दूर-दूर से हजारों भक्त आते हैं। इस प्रतिमा में भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं। ऐसा माना जाता है कि तिरुवनंतपुरम का नाम अनंत के भगवान के नाम पर रखा गया है।

There are many beliefs about the immense wealth kept in the temple. It is said that another cellar of Padmanabha Swamy temple is yet to open. What remains in the cellar remains a mystery until now. It is said that the seventh door of this temple can be opened only with the utterance of some mantras and if it is broken then something untoward may happen, that is why this door has not been opened yet. The most special thing of this temple is located here a huge statue of Lord Vishnu in which Lord Shrihari is giving darshan on Sheshnag in a sleeping posture.

Let us tell you that in 2011, a large amount of gold ornaments, gold-silver coins, jewel-studded crowns, idols, etc. were found from this temple. Even some necklaces are nine feet long and weigh ten kilos. The value of this entire treasure was estimated to be around Rs 5 lakh crore. Let us tell you that in 2011, a large amount of gold ornaments, gold-silver coins, jewel-studded crowns, idols, etc. were found from this temple. Even some necklaces are nine feet long and weigh ten kilos. The value of this entire treasure was estimated to be around Rs 5 lakh crore.
Let us tell you that in 2011, a large amount of gold ornaments, gold-silver coins, jewel-studded crowns, idols, etc. were found from this temple. Even some necklaces are nine feet long and weigh ten kilos. The value of this entire treasure was estimated to be around Rs 5 lakh crore.

Here Padmanabha has said the resting state of Lord Vishnu. A mythology is associated with the Padmanabha Swamy temple. It is believed that the statue of Lord Vishnu was first found from this place, after which the temple was constructed here. The temple was built by King Martand. Here Padmanabha has said the resting state of Lord Vishnu. A mythology is associated with the Padmanabha Swamy temple. It is believed that the statue of Lord Vishnu was first found from this place, after which the temple was constructed here. The temple was built by King Martand.
Here Padmanabha has said the resting state of Lord Vishnu. A mythology is associated with the Padmanabha Swamy temple. It is believed that the statue of Lord Vishnu was first found from this place, after which the temple was constructed here. The temple was built by King Martand.


There is also a golden pillar in the temple which adds to the beauty of the temple. There are many pillars in the corridor of the temple which are beautifully carved, which adds to its grandeur four moons. It is compulsory for men to wear dhoti and women to wear a sari to enter the temple. There is also a golden pillar in the temple which adds to the beauty of the temple. There are many pillars in the corridor of the temple which are beautifully carved, which adds to its grandeur four moons. It is compulsory for men to wear dhoti and women to wear saree for entering the temple.
There is also a golden pillar in the temple which adds to the beauty of the temple. There are many pillars in the corridor of the temple which are beautifully carved, which adds to its grandeur four moons. It is compulsory for men to wear dhoti and women to wear saree for entering the temple.

Padmanabhaswamy Temple of Kerala. The sanctum sanctorum of this temple has a huge statue of Lord Vishnu, which is visited by thousands of devotees from far and wide every day. In this statue, Lord Vishnu sits in a sleeping posture on Sheshnag. It is believed that Thiruvananthapuram is named after the serpent named Anant of God. Padmanabhaswamy Temple of Kerala. The sanctum sanctorum of this temple has a huge statue of Lord Vishnu, which is visited by thousands of devotees from far and wide every day. In this statue, Lord Vishnu sits in a sleeping posture on Sheshnag. It is believed that Thiruvananthapuram is named after the serpent named Anant of God.
Padmanabhaswamy Temple of Kerala. The sanctum sanctorum of this temple has a huge statue of Lord Vishnu, which is visited by thousands of devotees from far and wide every day. In this statue, Lord Vishnu sits in a sleeping posture on Sheshnag. It is believed that Thiruvananthapuram is named after the serpent named Anant of God.

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