Why the city kirtan comes out? क्यों निकला जाता है नगर कीर्तन? - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Sunday, 26 April 2020

Why the city kirtan comes out? क्यों निकला जाता है नगर कीर्तन?

गुरु नानक देवजी का प्रकाश पर्व सिख समुदाय का सबसे बड़ा पर्व है। सिखों के पहले गुरु नानक देव जी की जयंती देशभर में प्रकाश पर्व के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व समाज के हर व्यक्ति को साथ में रहने, खाने और मेहनत से कमाई करने का संदेश देता है। इस बार गुरु नानक देव की जयंती 23 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जा रही है।


सिखों के प्रथम गुरु, गुरु नानक देव जी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में विशाल नगर कीर्तन निकाला जाता है। इस दौरान पंज (पांच) प्यारे नगर कीर्तन की अगुवाई करते हैं। श्री गुरुग्रंथ साहिब को फूलों की पालकी से सजे वाहन पर सुशोभित करके कीर्तन विभिन्न जगहों से होता हुआ गुरुद्वारे पहुंचता है। प्रकाश उत्सव के उपलक्ष्य में प्रभातफेरी निकाली जाती है जिसमें भारी संख्या में संगतें भाग लेती हैं। प्रभातफेरी के दौरान कीर्तनी जत्थे कीर्तन कर संगत को निहाल करते हैं।

इस अवसर पर गुरुद्वारे के सेवादार संगत को गुरु नानक देवजी के बताए रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। कहते हैं कि श्री गुरु नानक देव महाराज महान युगपुरुष थे। नानक देव जी ने अपना पूरा जीवन समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने में समर्पित कर दिया। ऐसे महान युगपुरुष की आज के समय में बहुत जरूरत है।

भगवान एक है। एक ही गुरु है और कोई नहीं। जहां गुरु जाते हैं, वह स्थान पवित्र हो जाता है। भगवान को याद करने, मेहनत से कमाई करने और उसके बाद बांट के खाने का संदेश दुनियाभर में देने वाले ऐसे ही गुरु को सिख समुदाय उनकी जयंती पर याद करता है।

एक ओर जहां गुरुद्वारों में भव्य सजावट की जाती है, वहीं गुरु का प्रसाद लंगर भी बांटा जाता है। साथ ही गुरु नानक देव जी पर आधारित पोस्टर जारी किए जाते हैं। अपनी परंपरानुसार प्रभातफेरी में शामिल स्त्री-पुरुष सफेद वस्त्र एवं केसरिया चुन्नी धारण कर गुरुवाणी का गायन करते हुए चलते हैं। सभी जत्थों का जगह-जगह पर हार-फूल से स्वागत किया जाता है। शाम को दीवान सजाकर शबद कीर्तन का कार्यक्रम भी किया जाता है।


प्रकाश पर्व के दिन सुबह से ही गुरुद्वारों में धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो जाता है, जो देर रात तक चलता है। प्रकाश पर्व यानी मन की बुराइयों को दूर कर उसे सत्य, ईमानदारी और सेवाभाव से प्रकाशित करना।


अब यह नगर कीर्तन हर गुरु के प्रकाश पर्व पर मनाया जाता है उसी तरह गुरु नानक देव गई के पर्व की तरह है बाकि गुरु के प्रकाश पर्व पर धूम धाम से मनाया जाता है
Prakash Parv of Guru Nanak Devji is the biggest festival of the Sikh community. The birth anniversary of Guru Nanak Dev Ji, the first of the Sikhs, is celebrated all over the country as Prakash Parv. This festival gives a message to every person of the society to live together, eat and earn hard work. This time, the birth anniversary of Guru Nanak Dev is being celebrated on 23 November, the day of Kartik Purnima.


The huge city kirtan is taken out to commemorate the birth anniversary of Guru Nanak Dev Ji, the first Sikh Guru. During this time Panj (five) leads the beloved city of Kirtan. Kirtan reaches Gurudwara via various places after embellishing Sri Gurugranth Sahib on a vehicle decorated with flower palanquin. Prabhatferi is carried out on the occasion of Prakash Utsav in which a large number of Sangatas participate. During Prabhatferi, Kirtani batches perform kirtan and sang Sangat.

On this occasion, the sevadar of the gurudwara motivates Sangat to follow the path described by Guru Nanak Devji. It is said that Sri Guru Nanak Dev Maharaj was a great era man. Nanak Dev ji devoted his entire life to remove the evils prevailing in the society. Such great era man is very much needed in today's time.

God is one. There is only one Guru and no one else. Where the Guru goes, the place becomes sacred. The Sikh community remembers such a guru who gives the message of remembering God, working hard, and then eating food distributed worldwide.

On one hand, while the gurdwaras are decorated with grand decorations, the Guru's Prasad Langar is also distributed. Also posters based on Guru Nanak Dev Ji are released. As per their tradition, the men and women involved in the Prabhatferi walk in singing white gurvani, wearing white clothes and saffron chunni. All batches are greeted with garlands at different places. Shabad Kirtan is also performed by decorating the Diwan in the evening.


The procession of religious ceremonies starts in the gurudwaras from the morning of Prakash Parv, which lasts till late night. Prakash Parv means to remove the evils of the mind and illuminate it with truth, honesty and service.

Now this city kirtan is celebrated on the light festival of every guru, in the same way as the festival of Guru Nanak Dev Gai, the rest is celebrated with great pomp on the light festival of Guru.

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