Why did Lord Narayan cheat with maa Parvati-क्यों किया भगवान नारायण ने मां पार्वती के साथ छल - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Wednesday, 29 April 2020

Why did Lord Narayan cheat with maa Parvati-क्यों किया भगवान नारायण ने मां पार्वती के साथ छल

बद्रीनाथ धाम कभी भगवान शिव और पार्वती का विश्राम स्थान हुआ करता था। यहां भगवान शिव अपने परिवार के साथ रहते थे लेकिन श्रीहरि विष्णु को यह स्थान इतना अच्छा लगा कि उन्होंने इसे प्राप्त करने के लिए योजना बनाई। पुराण कथा के अनुसार सतयुग में जब भगवान नारायण बद्रीनाथ आए तब यहां बदरीयों यानी बेर का वन था और यहां भगवान शंकर अपनी अर्द्धांगिनी पार्वतीजी के साथ मजे से रहते थे। एक दिन श्रीहरि विष्णु बालक का रूप धारण कर जोर-जोर से रोने लगे। उनके रुदन को सुनकर माता पार्वती को बड़ी पीड़ा हुई। वे सोचने लगीं कि इस बीहड़ वन में यह कौन बालक रो रहा है? यह आया कहां से? और इसकी माता कहां है? यही सब सोचकर माता को बालक पर दया आ गई। तब वे उस बालक को लेकर अपने घर पहुंचीं।
शिवजी तुरंत ही ‍समझ गए कि यह कोई विष्णु की लीला है। उन्होंने पार्वती से इस बालक को घर के बाहर छोड़ देने का आग्रह किया और कहा कि वह अपने आप ही कुछ देर रोकर चला जाएगा। लेकिन पार्वती मां ने उनकी बात नहीं मानी और बालक को घर में ले जाकर चुप कराकर सुलाने लगी। कुछ ही देर में बालक सो गया तब माता पार्वती बाहर आ गईं और शिवजी के साथ कुछ दूर भ्रमण पर चली गईं। भगवान विष्णु को इसी पल का इंतजार था। इन्होंने उठकर घर का दरवाजा बंद कर दिया।
भगवान शिव और पार्वती जब घर लौटे तो द्वार अंदर से बंद था। इन्होंने जब बालक से द्वार खोलने के लिए कहा तब अंदर से भगवान विष्णु ने कहा कि अब आप भूल जाइए भगवन्। यह स्थान मुझे बहुत पसंद आ गया है। मुझे यहीं विश्राम करने दी‍जिए। अब आप यहां से केदारनाथ जाएं। तब से लेकर आज तक बद्रीनाथ यहां पर अपने भक्तों को दर्शन दे रहे हैं और भगवान शिव केदानाथ में।



In the same way, there are many more.
Badrinath Dham was once the resting place of Lord Shiva and Parvati. Here Lord Shiva lived with his family but Srihari Vishnu loved the place so much that he planned to get it. According to the Purana story, when Lord Narayana came to Badrinath in Satyuga, then there was a forest of plains, and Lord Shankar lived here with his ardent lady Parvatiji. One day Srihari Vishnu took the form of a child and started crying loudly. Goddess Parvati felt very sad to hear his cry. They started thinking that who is this child crying in this rugged forest? Where did it come from? And where is its mother? Thinking of all this, the mother took pity on the child. She then took the child to her home.

Shiva immediately understood that this is a play of Vishnu. He urged Parvati to leave this child outside the house and said that he would cry himself for a while. But Parvati's mother did not listen to them and after taking the child into the house, she kept quiet and started sleeping. Shortly after the child fell asleep, Mata Parvati came out and went on some distance excursion with Shiva. Lord Vishnu was waiting for this moment. He got up and closed the door of the house.

When Lord Shiva and Parvati returned home, the door was closed from inside. When he asked the child to open the door, Lord Vishnu said from the inside that you should forget God. I like this place very much. Let me rest here. Now go to Kedarnath from here. Since then, Badrinath has been giving darshan to his devotees here and Lord Shiva in Kedanath.

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