Why is Shri Kedarnath called 'Jagrit Mahadev' -श्री केदारनाथ को क्यों कहते हैं ‘जागृत महादेव’ - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Tuesday, 28 April 2020

Why is Shri Kedarnath called 'Jagrit Mahadev' -श्री केदारनाथ को क्यों कहते हैं ‘जागृत महादेव’



श्री केदारनाथ को क्यों कहते हैं ‘जागृत महादेव’ .... !!
एक बार एक शिव-भक्त अपने गांव से केदारनाथ धाम की यात्रा पर निकला। पहले यातायात की सुविधाएँ तो थी नहीं, वह पैदल ही निकल पड़ा। रास्ते में जो भी मिलता केदारनाथ का मार्ग पूछ लेता। मन में भगवान शिव का ध्यान करता रहता। चलते चलते उसको महीनो बीत गए। आखिरकार एक दिन वह केदार धाम पहुच ही गया। केदारनाथ में मंदिर के द्वार 6 महीने खुलते है और 6 महीने बंद रहते है। वह उस समय पर पहुचा जब मन्दिर के द्वार बंद हो रहे थे। पंडित जी को उसने बताया वह बहुत दूर से महीनो की यात्रा करके आया है। पंडित जी से प्रार्थना की - कृपा कर के दरवाजे खोलकर प्रभु के दर्शन करवा दीजिये । लेकिन वहां का तो नियम है एक बार बंद तो बंद। नियम तो नियम होता है। वह बहुत रोया। बार-बार भगवन शिव को याद किया कि प्रभु बस एक बार दर्शन करा दो। वह प्रार्थना कर रहा था सभी से, लेकिन किसी ने भी नही सुनी।
पंडित जी बोले अब यहाँ 6 महीने बाद आना, 6 महीने बाद यहा के दरवाजे खुलेंगे। यहाँ 6 महीने बर्फ और ढंड पड़ती है। और सभी जन वहा से चले गये। वह वही पर रोता रहा। रोते-रोते रात होने लगी चारो तरफ अँधेरा हो गया। लेकिन उसे विश्वास था अपने शिव पर कि वो जरुर कृपा करेगे। उसे बहुत भुख और प्यास भी लग रही थी। उसने किसी की आने की आहट सुनी। देखा एक सन्यासी बाबा उसकी ओर आ रहा है। वह सन्यासी बाबा उस के पास आया और पास में बैठ गया। पूछा - बेटा कहाँ से आये हो ? उस ने सारा हाल सुना दिया और बोला मेरा आना यहाँ पर व्यर्थ हो गया बाबा जी। बाबा जी ने उसे समझाया और खाना भी दिया। और फिर बहुत देर तक बाबा उससे बाते करते रहे। बाबा जी को उस पर दया आ गयी। वह बोले, बेटा मुझे लगता है, सुबह मन्दिर जरुर खुलेगा। तुम दर्शन जरुर करोगे।
बातों-बातों में इस भक्त को ना जाने कब नींद आ गयी। सूर्य के मद्धिम प्रकाश के साथ भक्त की आँख खुली। उसने इधर उधर बाबा को देखा, किन्तु वह कहीं नहीं थे । इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता उसने देखा पंडित जी आ रहे है अपनी पूरी मंडली के साथ। उस ने पंडित को प्रणाम किया और बोला - कल आप ने तो कहा था मन्दिर 6 महीने बाद खुलेगा ? और इस बीच कोई नहीं आएगा यहाँ, लेकिन आप तो सुबह ही आ गये। पंडित जी ने उसे गौर से देखा, पहचानने की कोशिश की और पुछा - तुम वही हो जो मंदिर का द्वार बंद होने पर आये थे ? जो मुझे मिले थे। 6 महीने होते ही वापस आ गए ! उस आदमी ने आश्चर्य से कहा - नही, मैं कहीं नहीं गया। कल ही तो आप मिले थे, रात में मैं यहीं सो गया था। मैं कहीं नहीं गया। पंडित जी के आश्चर्य का ठिकाना नहीं था।
उन्होंने कहा - लेकिन मैं तो 6 महीने पहले मंदिर बन्द करके गया था और आज 6 महीने बाद आया हूँ। तुम छः महीने तक यहाँ पर जिन्दा कैसे रह सकते हो ? पंडित जी और सारी मंडली हैरान थी। इतनी सर्दी में एक अकेला व्यक्ति कैसे छः महीने तक जिन्दा रह सकता है। तब उस भक्त ने उनको सन्यासी बाबा के मिलने और उसके साथ की गयी सारी बाते बता दी। कि एक सन्यासी आया था - लम्बा था, बढ़ी-बढ़ी जटाये, एक हाथ में त्रिशुल और एक हाथ में डमरू लिए, मृग-शाला पहने हुआ था। पंडित जी और सब लोग उसके चरणों में गिर गये। बोले, हमने तो जिंदगी लगा दी किन्तु प्रभु के दर्शन ना पा सके, सच्चे भक्त तो तुम हो। तुमने तो साक्षात भगवान शिव के दर्शन किये है। उन्होंने ही अपनी योग-माया से तुम्हारे 6 महीने को एक रात में परिवर्तित कर दिया। काल-खंड को छोटा कर दिया। यह सब तुम्हारे पवित्र मन, तुम्हारी श्रद्वा और विश्वास के कारण ही हुआ है। हम आपकी भक्ति को प्रणाम करते है।
।। ॐ नम: शिवाय ।।


Once a Shiva-devotee left his village on a journey to Kedarnath Dham. Earlier there was no traffic facilities, he got out on foot. Whoever got in the way would have asked the route of Kedarnath. Lord Shiva kept meditating in the mind. Her months passed while walking. Finally one day he reached Kedar Dham. The temple gates in Kedarnath are open 6 months and closed for 6 months. He arrived at a time when the temple gates were closing. He told Panditji that he has come from far and wide months. Prayed to Pandit ji - Please open the doors and have darshan of the Lord. But there is a rule once closed. Rules are rules. He cried a lot. Repeatedly remembered Bhagwan Shiva that the Lord had just appeared once. He was praying to everyone, but nobody listened.
Panditji said, now come here after 6 months, after 6 months the doors will open here. 6 months of snow and snow fall here. And all the people left there. He kept on crying. It started being weeping and it became dark all around. But he had faith in his Shiva that he would definitely be pleased. He was also feeling hungry and thirsty. He heard the call of someone coming. I saw a monk Baba coming towards him. That sannyasin Baba came to him and sat nearby. Asked - where did the son come from? He narrated the whole situation and said that my arrival here was wasted, Baba ji. Baba Ji explained to him and also gave him food. And then Baba kept talking to him for a long time. Baba ji felt pity on him. He said, son, I think, the temple will definitely open in the morning. You will definitely see
Do not know when this devotee fell asleep in talks. The devotee's eyes opened with the dim light of the sun. He saw Baba here and there, but he was nowhere. Before he could understand anything, he saw Panditji coming with his entire circle. He bowed to the Pandit and said - Yesterday you said that the temple will open after 6 months? And in the meantime no one will come here, but you have come only in the morning. Panditji looked at him intently, tried to identify and asked - You are the one who came when the temple gate was closed? Those I met. Back as soon as 6 months! The man said with surprise - No, I have not gone anywhere. Yesterday you met, I slept here at night. I did not go anywhere. Pandit ji was not surprised.
He said - But I had gone to the temple 6 months ago and today I have come after 6 months. How can you live here for six months? Panditji and the entire congregation were surprised. In such a cold, how can a single person live for six months. Then that devotee told him to meet Sanyasi Baba and all the things that were done with him. That a monk had come - was tall, grew jataye, had trident in one hand and damru in one hand, was wearing antelope. Pandit ji and everyone fell at his feet. They said, we have put our lives but could not see the Lord, you are a true devotee. You have just seen Lord Shiva. He changed your six months into one night with his yoga and illusion. Shortened the time period. All this has happened due to your pure mind, your faith and faith. We bow to your devotion.

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