Why only peacock feathers on Krishna's crown?-कृष्णा के मुकुट पर सिर्फ मोर पंख ही क्यों​ ? - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Thursday, 30 April 2020

Why only peacock feathers on Krishna's crown?-कृष्णा के मुकुट पर सिर्फ मोर पंख ही क्यों​ ?

कृष्णा के मुकुट पर सिर्फ मोर पंख ही क्यों​ ?




कृष्णा के मुखुट पर मोरपंख होने के बहुत सारे कारण विद्वान् व्यक्ति देते आये है जिनमे से कुछ इस तरह है |

१) मोर एकमात्र ऐसा प्राणी है जो सम्पूर्ण जीवन में ब्रह्मचर्य का पालन करता है | मोरनी का गर्भ भी मोर के आंसुओ को पीकर ही धारण होता है | इत: इतने पवित्र पक्षी के पंख भगवान खुद अपने सर पर सजाते है |

२) भगवान कृष्णा मित्र और शत्रु के लिए समान भावना रखते है इसके पीछे भी मोरपंख का उद्दारण देखकर हम यह कह सकते है | कृष्णा के भाई थे शेषनाग के अवतार बलराम और नागो के दुश्मन होते है मोर | अत: मोरपंख सर पर लगाके कृष्णा का यह सभी को सन्देश है की वो सबके लिए समभाव रखते है |

३) राधा भी बनी मोरमुकुट का कारण :


कहते है की राधा जी के महलो में बहुत सारे मोर हुआ करते थे | जब कृष्णा की बांसुरी पर राधा नाचती थी तब उनके साथ वो मोर भी नाचा करते थे | तब एक दिन किसी मोर का पंख नृत्य करते करते गिर गया | कृष्णा ने उसे झट से उताकर अपने सिर पर सज्जा लिया | उनके लिए यह राधा के प्रेम की धरोहर ही थी |

४) मोरपंख में सभी रंग है गहरे भी और हलके भी | कृष्णा अपने भक्तो को ऐसे रंगों को देखकर यही सन्देश देते है जीवन ही इस तरह सभी रंगों से भरा हुआ है कभी चमकीले रंग तो कभी हलके रंग , कभी सुखी जीवन तो कभी दुखी जीवन |


वहीं मोर जो नागों का शत्रु है वह भी श्रीकृष्ण के सिर पर विराजित है.

यही विरोधाभास ही श्रीकृष्ण के भगवान होने का प्रमाण भी है कि वे शत्रु और मित्र के प्रति समभाव रखते हैं.


ऐसा भी कहते है कि राधा रानी के महलों में मोर थे और वे उन्हें नचाया करती थी जव वे ताल ठोकती तो मोर भी मस्त होकर राधा रानी जी के इशारों पर नाचने लग जाती.!

एक बार मोर मस्त होकर नाच रही थी कृष्ण भी वहाँ आ गए और नाचने लगे तभी मोर का एक पंख गिरा तो श्यामसुन्दर ने झट उसे उठाया और राधा रानी जी का कृपा प्रसाद समझकर अपने शीश पर धारण कर लिया |



Why only peacock feathers on Krishna's crown?

There have been many reasons given by the learned person due to having a peacock on the mouth of Krishna, some of which are like this.
1) The peacock is the only creature that follows celibacy throughout life. A peacock's womb is also worn only after drinking peacock tears. Its: The Lord himself decorates the wings of such a sacred bird on his head.
2) Lord Krishna has the same feeling for friend and foe, we can say this even after seeing the example of Morpunkha. Balaram, the incarnation of Sheshnag, was Krishna's brother, and the enemies of Nago are peacocks. Therefore, by putting on the head of the peacock, it is Krishna's message to everyone that they have the potential for everyone.
3) Radha also became the cause of Mormukut:
It is said that there used to be many peacocks in the palace of Radha ji. When Radha danced on Krishna's flute, he also danced with her peacock. Then one day a peacock's feather fell while dancing. Krishna hurriedly prostrated him on his head. For him, it was an inheritance of Radha's love.
4) All colors are dark and light in peacock. Krishna gives this message to his devotees after seeing such colors, life itself is full of all colors in this way, sometimes bright colors, sometimes light colors, sometimes happy life and sometimes unhappy life.

At the same time, the peacock who is the enemy of the serpents is also enthroned on the head of Shri Krishna.
The same contradiction is also a proof of Lord Krishna being God that he has a similar attitude towards enemy and friend.

It is also said that there were peacocks in the palaces of Radha Rani and she used to dance them, when she used to beat the rhythm, then the peacock would also be able to dance at the behest of Radha Rani Ji.
Once the peacock was dancing with great joy, Krishna also came there and started dancing, then a peacock feather fell, then Shyamsundar quickly picked it up and took it on his head as Radha Rani Ji's grace offerings.

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