एक ऐसा शिवलिंग जो दिन में 3 बार रंग बदलता है-A Shiva Lingam that changes color 3 times a day - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Monday, 4 May 2020

एक ऐसा शिवलिंग जो दिन में 3 बार रंग बदलता है-A Shiva Lingam that changes color 3 times a day



 शिव भगवान के एक ऐसे चमत्कारिक शिवलिंग की बारे में जो दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है. इस मंदिर की महिमा और महत्त्व का आज तक लोगों को पता नहीं होने की वजह से लोग यहाँ कम संख्या में ही पहुँच पाते हैं।




राजस्थान के धौलपुर जिले में स्थित ‘अचलेश्वर महादेव’ मन्दिर के बारे में जानकारी 

धौलपुर जिला राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है।



यह इलाका चम्बल के बीहड़ों के लिये भी प्रसिद्ध है। कभी यहाँ बागी और डाकूओं का राज हुआ करता था. इन्ही बीहड़ो में मौजूद है, भगवान अचलेश्वर महादेव का मन्दिर। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है यहां स्थित शिवलिंग दिन मे तीन बार रंग बदलता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है।



सुबह के समय इसका रंग लाल रहता है तो दोपहर को केसरिया और रात को यह चमत्कारिक शिवलिंग श्याम रंग का हो जाता है। इस शिवलिंग के बारें में एक बात और भी प्रसिद्ध है कि इस शिवलिंग का अंत आज तक कोई खोज नहीं पाया है।



आसपास के लोग बताते हैं कि बहुत साल पहले इस शिवलिंग के रंग बदलने की घटना का पता लगाने के लिए खुदाई हुई थी. तब पता चला कि इस शिवलिंग का कोई अंत भी नहीं है. काफी खोदने के बाद भी इस शिवलिंग का अंत भी नहीं हुआ. तबसे इस शिवलिंग की महिमा और भी बढ़ चुकी है।



अचलेश्वर महादेव के रंग बदलने के पीछे कौन-सा विज्ञान है इस बात के लिए पुरातत्व विभाग भी यहाँ कार्य कर चुका है लेकिन सभी इस ईश्वरीय शक्ति के सामने हार मान चुके हैं।



मंदिर की महिमा का व्याख्यान करते हुए पुजारी बताते हैं कि यहाँ से भक्त खाली नहीं जाते हैं. खासकर युवा लड़के और लड़कियां यहाँ अपने करियर, नौकरी और विवाह संबंधित समस्याओं के साथ आते हैं और यह भगवान शिव की महिमा ही है कि वह सबकी मुरादे पूरी भी करते हैं।



साथ ही साथ पुजारी यह भी बताते हैं कि इस मंदिर का महत्त्व तो हज़ारों सालों से जस का तस है किन्तु फिर भी बहुत अच्छी संख्या में भक्त इसलिए नहीं आ पाते हैं क्योकि यहाँ आने वाला रास्ता आज भी कच्चा और उबड़-खाबड़ है।



आज भी यह एक रहस्य ही है कि इस शिवलिंग का उद्भव कैसे हुआ और कैसे ये अपना रंग बदलता है. भगवान अचलेश्वर महादेव का यह मन्दिर हजारों साल पुराना बताया जाता है। यह शिवलिंग एक प्राचीन चट्टान से बना हुआ है और देखने से ऐसा भी प्रतीत होता है कि जैसे किसी पहाड़ को काटकर यहाँ रख दिया गया है।


About a miraculous Shivalinga of Lord Shiva who changes his color thrice a day. Due to the fact that people do not know the glory and importance of this temple, people are able to reach here only in small numbers.



Information about 'Achleshwar Mahadev' temple located in Dholpur district of Rajasthan

Dhaulpur district is located on the border of Rajasthan and Madhya Pradesh.



This area is also famous for the ravines of Chambal. Sometimes rebels and bandits used to rule here. The temple of Lord Achaleshwar Mahadev is present in these ravines. The biggest feature of this temple is that the Shivling located here changes colors three times a day. this temple is dedicated to Lord Shiva.



Its color remains red in the morning, then saffron in the afternoon and this marvelous Shivalinga becomes black in the night. There is one more famous thing about this Shivling that no end of this Shivling has been discovered till date.



People around say that many years ago, the Shivling was excavated to find out the color change event. Then it was found that there is no end to this Shivling. Even after a lot of digging, this Shivling was not finished. Since then, the glory of this Shivling has increased even more.



Archaeological department has also worked here for this science which is behind changing the color of Achaleshwar Mahadev, but all have given up in front of this divine power.



While lecturing the glory of the temple, the priest says that the devotees do not go empty from here. Especially young boys and girls come here with their career, job and marriage related problems and it is the glory of Lord Shiva that he fulfills all wishes.



At the same time, the priests also tell that the importance of this temple has been intact for thousands of years, but still a good number of devotees are not able to come because the path coming here is still raw and bumpy.



Even today it remains a mystery how this Shivlinga originated and how it changes its color. This temple of Lord Achaleshwar Mahadev is said to be thousands of years old. This Shivalinga is made of an ancient rock and from the looks it also looks like a mountain has been cut and placed here.

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