भगवान काल भैरव का ऐसा मंदिर जहां काल भैरव को शराब पिलाई जाती है - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Sunday, 17 May 2020

भगवान काल भैरव का ऐसा मंदिर जहां काल भैरव को शराब पिलाई जाती है




मार्गशीर्ष (अगहन) मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को काल भैरवाष्टमी कहते हैं। क्योंकि इस दिन काल भैरव जन्म हुआ था। हिंदू धर्म के अनुसार माना जाता है कि काल भैरव भगवान शिव के दूसरा रूप है। इसलिए इन्हें शिव का अवतार माना जाता है।
काल भैरव की इन मंदिर की अपनी अलग खासियत है। इन मंदिर में जो काल भैरव की मूर्तिया स्थापित है। जहां पर भगवान को प्रसाद के रूप में शराब चढ़ाई जाती है। इतना ही नहीं, कुछ मंदिरों में तो भक्तों के द्वारा चढ़ाई गई शराब को भगवान सभी की आंखों के सामने ग्रहण भी करते हैं।
जैसे ही भैरव मूर्ति की आगे पात्र में शराब भरी जाती है, कुछ ही देर में सभी की आंखों के सामने ही शराब से भरा वो पात्र खाली हो जाता है। जानिए ऐसे ही मंदिरों के बारें में।
 
काल भैरव मंदिर, उज्जैन
इस मंदिर अपने आप पर एक अजूबा है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि भगवान काल भैरव साक्षात रूप में मदिरा पान करते है। वैसे तो काल भैरव के हर मंदिर में भगवान भैरव को मदिरा प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाती है।
लेकिन उज्जैन स्थित काल भैरव मंदिर में जैसे ही शराब से भरे प्याले काल भैरव की मूर्ति के मुंह से लगाते है तो देखते ही देखते वो शराब के प्याले खाली हो जाते है।
शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव के भौहें के बीच से एक ज्योति से काल भैरव को प्रकट किया। वह सामने आकर भगवान शिव के आगे हाथ जोड़कर बोले कि हे प्रभु मेरे लिए क्या आदेश है। भगवान शिव ने क्रोधित होकर कहा कि भैरव तुम अपनी पैनी तलवार से ब्रह्मा का पांचवा सिक काट दो। काल भैरव ने ब्रह्मा का सिर पकड़कर उसे धड़ से अलग कर दिया। क्योंकि ब्रह्मा ने इसी मुख से झूठ बोला था।
इससे लगे ब्रह्म हत्या के पाप को दूर करने के लिए वह अनेक स्थानों पर गए, लेकिन उन्हें मुक्ति नहीं मिली। तब भैरव ने भगवान शिव की आराधना की। शिव ने भैरव को बताया कि उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर ओखर श्मशान के पास तपस्या करने से उन्हें इस पाप से मुक्ति मिलेगी। तभी से यहां काल भैरव की पूजा हो रही है। कालांतर में यहां एक बड़ा मंदिर बन गया। मंदिर का जीर्णोद्धार परमार वंश के राजाओं ने करवाया था।


खबीस बाबा मंदिर, उत्तरप्रदेश
यह मंदिर उत्तरप्रदेश राज्य के सीतापुर शहर में है। इस मंदिर की भी अपनी खासियत है। यहां मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है। यहां स्थित खबीस बाबा को भगवान का ही अवतार माना जाता है। और इनकों भी शराब का भोग लगाया जता है। और प्रसाद के रूप में शराब ही दी जाती है। यहां पर भक्त बड़ी संख्या में आते है।

भैरव नाथ मंदिर, उत्तराखंड
भगवान शिव के मंदिर केदारनाथ के पास काल भैरव का मंदिर स्थित है। यह मंदिर बहुत अधिक महत्वपूर्ण है। जब सर्दी के मौसम में बर्फबारी की वजह से भगवान केदारनाथ के मंदिर के कपाट भक्तों के लिए बंद हो जाते है। तो इसी भैरव मंदिर मंदिर को ही मुख्य मंदिर मान कर भक्तगण पूजा-पाठ करते है।
साथ ही पुराणों के अनुसार इस मंदिर के बारें में माना जाता है कि भगवान भैरव को मां वैष्णो देवी से वरदान प्राप्त है। इसलिए, जो भक्त वैष्णोदेवी के दर्शन करता है, उसे यहां आकर भगवान भैरव के भी दर्शन करना अनिवार्य है। माना जाता है कि केदारनाथ के भैरव के दर्शन किए बिना वैष्णो देवी की यात्रा अधूरी है।

काल भैरव मंदिर, गुजरात
अहमदबाद की भुज शहर में भगवान काल भैरव का फेमस मंदिर है। यह मंदिर भी भगवान भैरव के दूसरें मंदिरों के अलग और खास है, क्योंकि यहां पर भगवान को खास तरह की शराब चढ़ाई जाती है। भगवान भैरव के दूसरें मंदिर में आप किसी भी तरह की शराब चढ़ा सकते है, लेकिन इस मंदिर में केवल ब्रांड की शराब चढ़ाई जा सकती है, लेकिन भगवान काल भैरव को केवल विदेशी ब्रांड्स की शराब ही भोग के रूप में दी जाती है।

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