भलेई माता का अनोखा मंदिर, मूर्ति को आता है पसीना - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Tuesday, 5 May 2020

भलेई माता का अनोखा मंदिर, मूर्ति को आता है पसीना





देवभूमि कहे जाने वाले हिमाचल प्रदेश में प्रसिद्ध और मान्यता प्राप्त तीर्थस्थल हैं। इसके साथ ही, हिमाचल यहाँ उपलब्ध स्थानों के कारण पर्यटकों के बीच भी जाना जाता है। इसकी प्रसिद्धि में शामिल है चंबा जिले में स्थित प्रसिद्ध देवीपीठ भलेई माता मंदिर।



वैसे तो हजारों भक्त हर दिन भलेई माता के मंदिर जाते हैं, लेकिन यहां नवरात्रि में एक विशेष उछाल होता है। यह मंदिर अपनी अजीब मान्यता के लिए अधिक जाना जाता है, जिस पर यहां आने वाले भक्तों की विशेष आस्था है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में देवी की मूर्ति, उस मूर्ति में पसीना आ रहा है।



लोगों का यह भी मानना है कि जिस समय देवी की मूर्ति को पसीना आता है, उस समय उन भक्तों की सभी इच्छाएं वहां मौजूद होती हैं, उनकी इच्छाएं पूरी होती हैं। गौरतलब है कि भलेई एक ऐसा देवीपीठ है जिसके बारे में यहाँ के पुजारी बताते हैं कि इस गाँव में देवी माता प्रकट हुई थीं। उसके बाद इस मंदिर का निर्माण किया गया।

In this temple, the idol of the Goddess comes to sweat…

There are famous and recognized pilgrimage centers in Himachal Pradesh called Dev Bhoomi. Along with it, Himachal is also well known among the tourists due to the places available here. Adding to its fame is the famous Devipeeth Bhalei Mata Temple located in Chamba district.



Though thousands of devotees visit the temple of Bhalei Mata every day, but there is a special boom in Navratri here. This temple is more known for its strange belief, on which the devotees who come here have special faith. It is believed that the idol of Mother Goddess in this temple, that idol is sweating.



People also believe that at the time when the idol of the Goddess sweats, all the wishes of those devotees are present there, their wishes are fulfilled. It is worth mentioning that Bhalei is one such Devipeeth about which the priests here say that Devi Mata had appeared in this village. After that this temple was built.

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में माता भद्रकाली का एक ऐतिहासिक धार्मिक स्थल मौजूद है। भलेई भ्राण नामक स्थान पर बसा होने के कारण 500 साल पुराने इस धार्मिक को भलेई माता मंदिर (bhalei mata temple chamba) के नाम से जाना जाता है। माता के मंदिर में क्षेत्र के स्थानीय लोगों के अलावा दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। भलेई माता में भक्तों की गहरी आस्था है। भक्तों का विश्वास है कि माता से मांगी गई हर मनोकामना जरूर पूरी होती है। भक्तों की मनोकामना पूरी होगी या नहीं इसका पता भी यहीं चल जाता है। आम दिनों के अलावा नवरात्रि में यहां भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। माना जाता है कि भलेई माता मंदिर में 300 साल तक महिलाओं के जाने पर प्रतिबंध था।

मंदिर का इतिहास

भलेई माता मंदिर को लेकर पुजारी का कहना है कि इसी गांव में देवी भद्रकाली प्रकट हुई थी। जिसके बाद यहां मंदिर की स्थापना की गई। मंदिर का निर्माण चंबा के राजा प्रताप सिंह ने करवाया था। कहा जाता है कि एक बार चोर मंदिर में स्थापित माता की प्रतिमा को चुरा ले गए थे। चोर प्रतिमा को लेकर चौहड़ा नामक स्थान तक तो पहुंच गए, लेकिन वह इससे आगे बढ़ते तो अंधे हो जाते। जब वह पीछे मुड़कर देखते तो उन्हें सब कुछ दिखाई देता। इससे डरकर चोर वहीं मां भलेई की प्रतिमा को छोड़कर भाग गए। इसके बाद वापस से माता की प्रतिमा को पूर्ण विधि विधान से मंदिर में स्थापित किया गया। पहले यहां महिलाओं के आने पर प्रतिबंध था, लेकिन एक बार एक महिला भक्त को सपने में माता ने दर्शन दिया और आदेश दिया कि वह मंदिर में जाकर दर्शन करे। इसके बाद से मंदिर में महिलाओं के जाने पर से प्रतिबंध हटा दिया गया।

bhalei mata temple chamba

देवी को आता है पसीना

वर्तमान में सभी लोग बिना किसी तरह के भेदभाव के मंदिर में दर्शन करते हैं। अपने दर्शनों के लिए आने वाले भक्तों की मां इच्छा अवश्य पूरी करती हैं। नवरात्रों के अवसर पर यहां लाखों की संख्या में भक्त आते हैं। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होगी या नहीं इसके पीछे एक दिलचस्प प्रथा प्रचलित है। स्थानीय मान्यता के अनुसार मां की मूर्ति पर अगर पसीना आ जाए तो मंदिर में मौजूद सभी भक्तोंं की मनोकामना जरूर पूरी होती है। ऐसे में श्रद्धालु घटों तक मंदिर में बैठकर मूर्ति पर पसीना आने का इंतजार करते हैं। भलेई माता मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए भी जाना जाता है। इतने प्राचीन मंदिर की वास्तुकला देखने लायक है। भलेई माता की चतुर्भुजी मूर्ति काले पत्थर से बनी हुई है। कहा जाता है कि यह मूर्ती खुद से यहां प्रकट हुई थी। माता के बाएं हाथ में खप्पर और दाएं हाथ में त्रिशूल है।

कैसे पहुंचे भलेई माता मंदिर

माता का यह प्रसिद्द धार्मिक स्थान डलहौजी से 35 किलोमीटर, जबकि चंबा से 32 किलोमीटर की दूरी पर है। डलहौजी और चंबा से आसानी से बस अथवा टैक्सी के माध्यम से भलेई माता मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। यहां से नजदीकी रेलवे स्टेशन लगभग 100 किलोमीटर दूर पठानकोट में है, जबकि निकटतम गग्गल हवाई अड्डा यहां से लगभग 130 किलोमीटर की दूरी पर है।

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