माँ पार्वती की बाली का राज़ ,एक अनोखा गुरुद्वारा- मणिकर्ण , मनाली, हिमाचल प्रदेश-माँ पार्वती की बाली का राज़ ,एक अनोखा गुरुद्वारा- मणिकर्ण , मनाली, हिमाचल प्रदेश - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Friday, 1 May 2020

माँ पार्वती की बाली का राज़ ,एक अनोखा गुरुद्वारा- मणिकर्ण , मनाली, हिमाचल प्रदेश-माँ पार्वती की बाली का राज़ ,एक अनोखा गुरुद्वारा- मणिकर्ण , मनाली, हिमाचल प्रदेश

माँ पार्वती की बाली का राज़ ,एक अनोखा गुरुद्वारा- मणिकर्ण , मनाली, हिमाचल प्रदेश


मणिकर्ण में बहुत से मंदिर और एक गुरुद्वारा है।सिखों के धार्मिक स्थलों में यह स्थल विशेष स्थान रखता है। गुरुद्वारा मणिकर्ण साहिब गुरु नानकदेव की यहां की यात्रा की स्मृति में बना था। जनम सखी और ज्ञानी ज्ञान सिंह द्वारा लिखी तवारीख गुरु खालसा में इस बात का उल्लेख है कि गुरु नानक ने भाई मरदाना और पंच प्यारों के साथ यहां की यात्रा की थी। इसीलिए पंजाब से बडी़ संख्या में लोग यहां आते हैं। पूरे वर्ष यहां दोनों समय लंगर चलता रहता है।
यहाँ पर भगवान राम, भगवान कृष्ण, भगवान विष्णु और भगवान शिव के मंदिर हैं। हिंदू मान्यताओं में यहां का नाम इस घाटी में शिव के साथ विहार के दौरान पार्वती के कान (कर्ण) की बाली (मणि) खो जाने के कारण पडा़.
मणि) यहां गिर गयी थी और पानी में खो गयी। खूब खोज-खबर की गयी लेकिन मणि नहीं मिली। आखिरकार पता चला कि वह मणि पाताल लोक में शेषनाग के पास पहुंच गयी है। जब शेषनाग को इसकी जानकारी हुई तो उसने पाताल लोक से ही जोरदार फुफकार मारी और धरती के अन्दर से गरम जल फूट पडा। गरम जल के साथ ही मणि भी निकल पडी। आज भी मणिकरण में जगह-जगह गरम जल के सोते हैं।
मणिकर्ण अपने गर्म पानी के चश्मों के लिए भी प्रसिद्ध है।[1] देश-विदेश के लाखों प्रकृति प्रेमी पर्यटक यहाँ बार-बार आते है, विशेष रूप से ऐसे पर्यटक जो चर्म रोग या गठिया जैसे रोगों से परेशान हों यहां आकर स्वास्थ्य सुख पाते हैं। ऐसा माना जाता है कि यहां उपलब्ध गंधकयुक्त गर्म पानी में कुछ दिन स्नान करने से ये बीमारियां ठीक हो जाती हैं। खौलते पानी के चश्मे मणिकर्ण का सबसे अचरज भरा और विशिष्ट आकर्षण हैं। प्रति वर्ष अनेक युवा स्कूटरों व मोटरसाइकिलों पर ही मणिकर्ण की यात्रा का रोमांचक अनुभव लेते हैं।

The secret of Maa Parvati's Bali, a unique gurudwara- Manikarna, Manali, Himachal Pradesh

There are many temples and a gurudwara in Manikarna. This place holds a special place in the religious sites of Sikhs. The Gurudwara Manikarna Sahib was built in memory of Guru Nanak Dev's visit here. The Tawarikh Guru Khalsa, written by Janam Sakhi and Giani Gyan Singh, mentions that Guru Nanak traveled here with Bhai Mardana and Panch Pyaar. That is why a large number of people from Punjab come here. Anchor continues here both times throughout the year.

There are temples of Lord Rama, Lord Krishna, Lord Vishnu and Lord Shiva. Here in Hindu beliefs, the name of Parvati lost her ear (Karna) earring (Mani) during the Vihara with Shiva in this valley.
Mani) fell here and got lost in water. Much searching was done but the gem was not found. Eventually it is revealed that Mani has reached Sheshnag in Hades. When Sheshnag came to know about this, he gave a loud shout from the Hades and burst hot water from inside the earth. The gem also came out with hot water. Even today, in Manikaran, we sleep with hot water everywhere.

Manikarna is also famous for its hot water goggles. [1] Millions of nature-loving tourists from all over the world come here frequently, especially those who are troubled by diseases like skin diseases or arthritis, to come here to get health pleasure. Huh. It is believed that a few days bathing in sulfuric hot water available here cures these diseases. Boiling water glasses are the most astonishing and distinct attraction of Manikarna. Every year many youngsters take the thrilling experience of traveling to Manikarna only on scooters and motorcycles.

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