टेकरी माता मंदिर शक्तिपीठ ( मां चामुंडा और मां तुलजा भवानी ) - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Saturday, 2 May 2020

टेकरी माता मंदिर शक्तिपीठ ( मां चामुंडा और मां तुलजा भवानी )

इंदौर के प्रसिद्ध देवास टेकरी माता मंदिर ( मां चामुंडा और मां तुलजा भवानी )

 ऐसी मान्यता है कि माताओं की दोनों मूर्तियां स्वयंभू हैं और जागृत स्वरूप में हैं। सच्चे मन से यहां जो भी मन्नत मांगी जाती है। वह हमेशा पूरी होती है। विद्वानों के मुताबिक देवी के 52 शक्तिपीठ में से मां चामुंडा, तुलजा दरबार को एक शक्तिपीठ के तौर पर माना जाता है। हालांकि, ऐसा बताया जाता है कि देश के अन्य शक्तिपीठों पर माता के शरीर के हिस्से गिरे थे। लेकिन, यहां टेकरी पर माता का रुधिर गिरा था। इस कारण मां चामुंडा का प्राकट्य यहां हुआ। चामुंडा को सात माताओं में माना जाता है। तुलजा भवानी की स्थापना मराठी राज परिवारों ने करवाई थी। मराठी राजाओं की यह कुलदेवी मानी जाती हैं। यह दोनों माताएं सगी बहनें हैं। महाराज विक्रमादित्य के भाई भतृहरि यहां तपस्या कर चुके हैं। उन्हें दो हजार साल से ज्यादा हो गए हैं। ऐसे में मंदिर की प्राचीनता का कोई प्रमाण नहीं है। मंदिर अनादिकाल से है। लोक मान्यता है कि देवी मां के दोनों स्वरूप जागृत अवस्था में हैं। बड़ी मां तुलजा भवानी और छोटी मां चामुण्डा देवी बहनें हैं। ऐसी मान्यता है कि एक बार दोनों माताओं में किसी बात को लेकर विवाद हो गया। गुस्साई दोनों माता टेकरी छोड़कर जाने लगीं। बड़ी मां पाताल में और छोटी मां टेकरी ने नीचे उतरने लगीं। माताओं को जाता देख उन्हें मनाने के लिए बजरंगबली और भैरूबाबा उनके पीछे चल दिए। जब हनुमानजी उनके पास पहुंचे तो उनका रौद्र रूप देख एक पल के लिए वे भी सहम गए। विनती के बाद दोनों माताएं मान गईं। लेकिन जब तक बड़ी मां का गुस्सा शांत होता उनका आधा धड़ पाताल में समा चुका था। वहीं छोटी माता टेकरी से काफी नीचे उतर आईं थीं, इस कारण बड़ी मां और छोटी मां उसी रूप में टेकरी में रुक गईं

Famous Dewas Tekri Mata Temple in Indore (Maa Chamunda and Maa Tulja Bhavani)

 It is believed that both the idols of the mothers are self-proclaimed and are in an awakened form. Whatever vow is sought here with the true mind. She is always fulfilled. According to scholars, out of the 52 Shaktipeeth of the Goddess, the mother Chamunda, Tulja Darbar is considered as a Shaktipeeth. However, it is said that the mother's body parts fell on other Shaktipeeths of the country. But, here on the tekri, mother's blood had fallen. For this reason, the appearance of Maa Chamunda occurred here. Chamunda is considered among the seven mothers. Tulja Bhavani was founded by Marathi Raj families. This Kuldevi of Marathi kings is considered. Both these mothers are real sisters. Maharaja Vikramaditya's brother Bhatruhari has done penance here. It has been more than two thousand years. In such a situation, there is no evidence of the antiquity of the temple. The temple is from Anadikal. It is popularly believed that both the forms of Mother Goddess are in the awakened state. Elder mother Tulja Bhavani and younger mother Chamunda Devi are sisters. It is believed that once there was a dispute between the two mothers about something. Angry both mothers started leaving. The elder mother came down in Hades and the younger mother Tekri started coming down. Bajrangbali and Bhairubaba followed them to convince the mothers to leave. When Hanumanji reached him, he too stunned for a moment to see his form. Both mothers agreed after pleading. But by the time the elder mother's anger subsided, half of her torso had settled. At the same time, the younger mother had come down from Tekri, due to which the elder mother and the younger mother stayed in the tekri in the same form.

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