Even today people are afraid of worshiping this Shivlinga-आज भी लोग इस शिवलिंग की पूजा करने से डरते हैं - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Friday, 1 May 2020

Even today people are afraid of worshiping this Shivlinga-आज भी लोग इस शिवलिंग की पूजा करने से डरते हैं




सच्चे मन से भगवान भोलेनाथ का नाम लेने से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते है और उनकी हर मनोकामना पूर्ण कर देते है। भगवान शिव का एक ऐसा मंदिर भी है जहां शिवलिंग पर भक्त न तो दूध चढ़ाते हैं और ना ही जल। इतना ही नहीं इस शिव मंदिर में लोग पूजा करने तक से डरते हैं।

आज भी लोग इस शिवलिंग की पूजा करने से डरते हैं

Ek Hathiya Dewal Temple In Uttarakhand.

उत्तराखंड में राजधानी देहरादून से 70 किलोमीटर दूर स्थित कस्बा थल जिससे लगभग छह किलोमीटर दूर स्थित है ग्राम सभा बल्तिर। यहां भगवान शिव को समर्पित एक हथिया देवाल नाम का अभिशप्त देवालय है। यहां भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने के दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। मंदिर की अनूठी स्थापत्य कला को निहारते हैं। इस मंदिर की खास बात यह है कि लोग यहां भगवान शिव के दर्शन करने तो आते हैं, लेकिन यहां भगवान पूजा नहीं की जाती।


इस मंदिर का नाम एक हथिया देवाल इसलिए पड़ा क्योंकि यह एक हाथ से बना हुआ है। यह मंदिर बहुत पुराना है और पुराने ग्रंथों, अभिलेखों में भी इसका जिक्र आता है। किसी समय यहां राजा कत्यूरी का शासन था। उस दौर के शासकों को स्थापत्य कला से बहुत लगाव था। यहां तक कि वे इस मामले में दूसरों से प्रतिस्पर्द्धा भी करते थे। लोगों का मानना है कि एक बार यहां किसी कुशल कारीगर ने मंदिर का निर्माण करना चाहा। वह काम में जुट गया। कारीगर की एक और खास बात थी। उसने एक हाथ से मंदिर का निर्माण शुरू किया और पूरी रात में मंदिर बना भी दिया।


जब सुबह हुई तो गांव के सभी लोग इस मंदिर को देखकर हैरान रह गए। इसके बाद उस मूर्तिकार को गांव में बहुत ढूंढा गया, लेकिन वह कही नहीं मिला। वह एक हाथ का कारीगर गांव छोडक़र जा चुका था। ग्रामीणों और पंडितों ने जब उस देवालय के अंदर उकेरी गई भगवान शंकर के लिंग और मूर्ति को देखा तो यह पता चला कि रात्रि में शीघ्रता से बनाए जाने के कारण शिवलिंग का अरघा विपरीत दिशा में बनाया गया है जिसकी पूजा फलदायक नहीं होगी बल्कि दोषपूर्ण मूर्ति का पूजन अनिष्टकारक भी हो सकता है। बस इसी के चलते रातों रात स्थापित हुए उस मंदिर में विराजमान शिवलिंग की पूजा नहीं की जाती। इस डर के चलते तब से अब तक किसी ने इस शिवलिंग की पूजा नहीं की और आज भी इस मंदिर में स्थित शिवलिंग की पूजा नहीं की जाती।


Even today people are afraid of worshiping this Shivlinga.


By taking the name of Lord Bholenath with true mind, all the sufferings of the devotees are removed and they fulfill their wishes. There is also a temple of Lord Shiva where devotees offer neither milk nor water to the Shivling. Not only this, people are afraid to even worship in this Shiva temple.

In the Uttarakhand, 70 km from the capital Dehradun, the town house is located about six kilometers away from the gram sabha batir. There is a dedicated temple named Hathiya Dewal dedicated to Lord Shiva. Here devotees come from far and wide to visit Lord Bholenath. Looks at the unique architecture of the temple. The special thing about this temple is that people come here to see Lord Shiva, but God is not worshiped here.

This temple got its name from a Hathiya Dewal because it is made with one hand. This temple is very old and it is also mentioned in old texts, inscriptions. At one time it was ruled by King Katyuri. The rulers of that era were very fond of architecture. He even competed with others in this matter. People believe that once a skilled artisan here wanted to build the temple. He got involved in work. The artisan had another special thing. He started building the temple with one hand and also built the temple throughout the night.

When it was morning, all the people of the village were surprised to see this temple. After that the sculptor was searched a lot in the village, but could not find it anywhere. He had left the one hand artisan village. When the villagers and the pandits saw the linga and idol of Lord Shankar carved inside that temple, it was found that due to the early construction in the night, the Argha of Shivalinga is built in the opposite direction, which will not be fruitful but worship of the faulty idol. Worship can also be harmful. Due to this, the Shiva lingam enshrined in that temple is installed overnight. Due to this fear, no one has worshiped this Shivling since then and even today the Shivling located in this temple is not worshiped.

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