हेमकुंड साहिब का इतिहास (History of Hemkund Sahib) - ॐ जय माता दी ॐ

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“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Friday, 15 May 2020

हेमकुंड साहिब का इतिहास (History of Hemkund Sahib)

हेमकुंड साहिब (Hemkund Sahib)


हेमकुंड साहिब या गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब जी सिखों का एक धार्मिक स्थल है जो उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है। हेमकुंड एक बर्फ की झील है जो सात विशाल पर्वतों से घिरी हुई है जिन्हें हेमकुंड पर्वत भी कहते हैं। हेमकुंड साहिब की यात्रा हिन्दू की पवित्र अमरनाथ यात्रा से भी जोड़ कर देखी जाती है। 

हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा सिख गुरु गोबिंद सिंह जी को समर्पित है और इसका उल्लेख दसम ग्रंथ में भी है जो कि स्वयं गुरु जी द्वारा लिखी गई है। दसम ग्रंथ में गुरु ने अपने जन्म के बारे में घटना बताई है कि हेमुकंड की नदी के पास ही जब उन्होंने अपने ध्यान और तपस्या द्वारा भगवान का स्मरण कर लिया था तो भगवान ने उन्हें धरती पर जन्म लेने को कहा ताकि वह लोगों तक आस्था और धर्म का सही मतलब पहुंचा सकें और लोगों को बुराइयों से बचने का रास्ता बता सकें। 
हेमकुंड की खोज सिखों द्वारा की गई थी जब वह अपने गुरु के तप स्थान को ढूंढ़ने की चाह से निकले थे। आज हेमकुंड में जो गुरुद्वारा स्थित है उसकी स्थापना सन् 1960 के आस-पास की गई थी। पत्थर और चिनाई के भव्य तारे के आकार की यह संरचना हेमकुंड झील के किनारे पर है। यहां ऋषिकेश-बद्रीनाथ राजमार्ग पर स्थित गोबिन्दघाट द्वारा पहुंचा जा सकता है। यहां पास में भगवान लक्ष्मण को भी एक मंदिर समर्पित है।

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